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Sunday, January 12, 2025

Viksit Bharat 2047 - Innovation and Technology Dimension and Promotion

 

https://x.com/narendramodi/status/1878478287455900010

https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2085956

https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1997740


https://www.iitk.ac.in/new/highlights-role-of-innovation-for-viksit-bharat

https://innovateindia.mygov.in/vb-essay-competition/

https://viksitbharat.io/about-us/




Sunday, March 17, 2024

Start-Up India - Initiatives



Want Mentors for Startup?

Startup Registration Process


Startup India Innovation Week 2024! - 10 - 18 Jan 2024
Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi Ji announced 16th January, the foundation day of Startup India, as National Startup Day. In honour of this, we are celebrating Innovation Week 2024.

In the second & third week of January, India's vibrant startup ecosystem takes centre stage for celebration of inspiration, knowledge exchange, and growth. Whether you're an aspiring entrepreneur, seasoned investor, or simply passionate about India's future, keep your eyes peeled as there’s lots more to explore.

What to expect?
Deep dive into a sea of knowledge with insightful webinars on diverse topics, from navigating funding landscapes to scaling your venture globally. The virtual stage is yours to explore, learn from industry experts, and gain practical strategies to propel your startup forward.


India is now called the 'Startup Hub' as it has more than 99,000 startups, and 107 unicorn companies worth $30 billion.
5 Startup Schemes of Govt. of India.


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startup Notification - February 2016
http://www.kpmg.com/IN/en/services/Tax/TaxDocuments/KPMG-Flash-News-Government-notifies-startup-definition-2.pdf

are you eligible for benefits under startup India scheme
https://yourstory.com/2016/01/startup-india-action-plan-eligible/


http://www.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/StartupIndia_ActionPlan_16January2016.pdf

Start Up India - A Video Presentation
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Bharatiya Janata Party Upload



PM launches Start-up India movement, unveils action plan for encouraging Start-ups
16 January 2016

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today launched the Start-up India initiative in New Delhi. The launch by the Prime Minister this evening, was preceded by a day-long workshop on various aspects of entrepreneurship.

The Prime Minister visited a virtual exhibition and interacted with Start-up entrepreneurs. 10 outstanding Start-up innovators shared their thoughts and experiences before the Prime Minister delivered his address. He said that when he had launched the Start-up India Initiative on 15th August, the announcement had virtually gone unnoticed, but today it had registered with people.

He said successful start-ups are usually created by those who are driven by an idea, or an urge to solve a problem that people face. He said making money is not the primary objective, but is often a by-product. He said Start-up innovators are often driven by a sense of compassion for others.

The Prime Minister said he wishes to turn the youth of India from job-seekers to job-creators. He said if a Start-up can offer employment to even five people, it would be doing a great service to the nation. He mentioned some areas where youth innovators should focus, including crop wastage, and cyber security.

The Prime Minister unveiled the highlights of the Start-up Action Plan. He said a dedicated Start-up fund worth Rs. 10,000 crore will be created for funding of Start-ups.

He said Start-ups will be exempted from paying income tax on their profit for the first three years. He said the Government is working on a simple exit policy for Start-ups. He also said the Government is working towards fast-tracking of Start-up patent applications.

He announced an eighty percent exemption in patent fee for Start-up businesses, and said a self-certification based compliance system for Start-ups would be introduced for 9 labour and environment laws. He said the Atal Innovation Mission will be launched to give a boost to innovation.

Release ID :134541




Text of PM’s speech at the launch of Start-Up India, Stand-Up India programme


आज Saturday है, सरकार का स्वभाव छुट्टी का होता है और 6 बजने का बाद तो सवाल ही नहीं उठता है। अगर कोई आपको पूछे कि फर्क क्या है, तो फर्क यही है। मैं भी कभी सोचता हूं कि मुझे भी आप जैसी कोई ताकत दी होती। जब रितेश को सुन रहा था तो मुझे विचार आ रहा था कि एक चाय बेचने वाले ने Hotel Chain का विचार क्यों नहीं किया लेकिन हो सकता है कि मेरे नसीब में, नरेंद्र मोदी चाय बेचने वाला कुछ कर पाए या न कर पाए लेकिन देश के करोड़ों नौजवान कुछ कर पाएं ये उम्मीद तो मेरे दिल में भरी हुई है। जब मैंने 15 अगस्त को लालकिले से कहा Start-Up India, Stand-Up India तो ऐसे ही हवा के झोंके की तरह बात आई और चली गई, कहीं Registry नहीं हुई लेकिन आज शायद सौ, सवा सौ दिन के बाद अब ये Register होगी कि Start-Up India है क्या.

Seeing is believing आज देशभर के IIT’s में नौजवान आपको देख रहे हैं। देश के कई स्थानों पर युवा सुबह से इस कार्यक्रम को, वे भी आपके साथ हिस्सेदार है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि सरकार ये करेगी तो ये होगा, सरकार ये करेगी तो ये होगा। मेरी सोच थोड़ी अलग है। मेरी सोच है कि सरकार ये न करेगी तो इतना सारा होगा और इसलिए आज आप सबको इसलिए आपको इकट्ठा किया है कि आप हमें बताइए कि क्या-क्या नहीं करना है। 70 साल तक बहुत कुछ किया हमने और हम कहां पहुंचे और मैं कहता हूं कि एक बार हम न करने का निर्णय करें तो ये लोग 10 साल में देश को कहां से कहां पहुंचा सकते हैं। देश के हर इंसान के दिल में एक ख्वाब होता है, उस ख्वाब के साथ उसके दिल में कुछ विचार भी होता है, ideas भी होते हैं। कुछ लोगों को ideas हर दिन होते हैं और शाम होते-होते बाल मृत्यु हो जाता है। लेकिन कुछ लोग होते हैं जो ideas के साथ involve हो जाते हैं, वो उससे बाहर नहीं निकलते हैं और पूरा परिवार परेशान हो जाता है कि ये कुछ करता नहीं है, बस इसी में लगा रहता है, किसी से बात नहीं करता है, यार-दोस्तों से नहीं मिल रहा है, क्या हो गया है इसको, कहीं पागल तो नहीं हो गया है लेकिन वही एक दिन कुछ कमाल करके दिखा देता है। तब पूरे परिवार को लगता है नहीं-नहीं साहब इसमें तो पहले से ही ऐसा था। आपके सबके जीवन में से एक अनुभव आया होगा। जो सर्वनाश आपने सुना किसी मां ने कहा हो या न कहो लेकिन कम-अधिक मात्रा में सबको अनुभव आया ही होगा क्योंकि ज्यादातर ये first generation entrepreneur है whole Start-Up और जब कुछ सोचोगे तो नहीं बेटे, अपना काम नहीं तू कहीं नौकरी कर ले। शुरू में जब दोस्तों ने सुना होगा बहुत मजाक उड़ाया होगा, उपहास किया होगा, जाते-आते आपको उसी नाम से सुनाते होंगे, ये कुछ करने वाला है, ये कुछ करने वाला है फिर एक पल आया होगा सारी ओर विरोध हुआ होगा, सब दूर, परिवार के लोगों ने विरोध किया होगा, ये नहीं करना है, जाओ, कमाओ, नौकरी कर लो, देखो उसका पहचान है, वो नेताजी को जानते हैं, जाओ उसको मिल लो। उस विरोध के बावजूद भी जो टिके होंगे, आज सब लोग कहते होंगे यार, इसने तो कमाल कर दिया, कुछ ऐसा मुझे भी करना है। हर किसी के Start-Up की जिंदगी की यही कहानी है। एक भीतर से ऊर्जा होती है , भीतर से सपने होते हैं, भीतर से उसके साथ खप जाने का इरादा होता है तब जाकर के परिस्थितयां पलटती हैं और दुनिया में हर किसी ने यही किया होगा। कभी आज हम सोचें कि उन्होंने 1423, I think 1423 है, कोलंबस जब निकला होगा क्या मिलने वाला था लेकिन उसको लगा होगा कोई एक नया route मुझको खोजना है, विश्व को मुझे जोड़ना है और वो चल पड़ा, चलने से पहले उसने ढेर सारी चीजों का अध्ययन किया होगा। Technology develop की होगी और नया एक spice route दुनिया को दिया होगा। आज, आज जो space में काम कर रहे हैं, शुरू जब हुआ होगा तो लोग मजाक उड़ाते होंगे, यार ये क्या कर रहे हैं। हर चीज की कहीं शुरूआत होती है तो जो करता है, उसी को दिखता है, क्या होने वाला है औरों को वही दिखता है कि ये पागल है और इसलिए जिन्हों।ने यह सफलता पाई है, वे सिर्फ entrepreneur नहीं है। एक प्रकार से adventure उनकी प्रकृति का हिस्साल है तब जाकर के होता है। Start-up की success सिर्फ entrepreneurship की quality से नहीं है। risk taking capacity, adventure करने का इरादा ये उसके साथ जुड़ता है और तब जाकर के हम दुनिया को कुछ दे सकते हैं।

Start-up, मैं कल Adam से बात कर रहा था। वो बड़ा interesting है, उसको मिलने जैसा है। उसको हिन्दु स्तारन की spiritual दुनिया में बड़ा interest है, लेकिन उसने मुझे एक बात अच्छीज बताई। वो कह रहा है जो पैसे कमाने के इरादे से आता है वो कभी Start-up कर ही नहीं सकता। जो कुछ करने के इरादे से आता है, पैसे उसके लिए by product होते हैं और आप सब ने देखा होगा कि आप लोगों ने जब शुरू किया होगा तब आपने bank balance क्या होगा, ये कभी नहीं सोचा होगा लेकिन किसकी जिन्दगी में क्या‍ बदलाव लाता हूं यह सोचा होगा, तब हुआ होगा। उबेर कुबेर बन गया। हमारे यहां कुबेर भंडारी होते थे न पहले। मैं नहीं मानता हूं कि उसने पहले सोचा होगा। उसने पहले यही सोचा होगा कि भई लोगों की समस्‍या का मैं समाधान कैसे करू, सस्तेब में कैसे करू और उसमें से एक व्य्वस्थाी विकसित हो गई।

जब Start-up की चर्चा होती है तो ज्यांदातर IT के आस-पास ही सोचा जाता है और अब हर कुछ कितने कदम दूर है, बस App के पास पहुंच गए, हो गया। हर समस्यास का समाधान App. खैर मैं उससे बहुत beneficiary हूं क्यों कि मैंने Narendra Modi App शुरू किया है। मुझे इतने नए युवा विचार मिलते हैं। इतने लोगों से जानने को मिलता है और मै आपसे भी आग्रह करता हूं। देश भर के इस प्रकार के Start-up और दुनिया भर के लोगों से मैं कहता हूं आप मेरे App के साथ जुड़कर के अपनी success story बताइए, मैं दुनिया को बताऊंगा क्योंंकि यही viral होने वाला है। success story ही viral होने वाली है और लोगों का मन मन्दि र जो है वो सफलता को जकड़ने वाला है। निराशा का माहौल चला गया है, गया वो दिन पूरे हो गए। आशा, विश्वाकस, कर गुजरने का इरादा ये समय नज़र आ रहा है और वही स्थि तियों को बदलता है। वही परस्थिैतियों को परिवर्तित करने की ताकत रखता है और वो मैं अनुभव कर रहा हूं और आज मैं जैसे ही यहां enter हुआ, सब ने मुझे एक ही रिपोर्ट किया, साहब क्यार energy है इस कार्यक्रम में। ये विज्ञान भवन कोई पहली बार भरा नहीं है लेकिन energy पहली बार भरी है और ये सभागृह में वो energy होगी लेकिन ये पूरे हिन्दु स्ताहन के नौजवानों के मन मन्दि्र का प्रतिबिंब है यहां पर, उनकी आशा-आकांक्षाओं की प्रतिध्वंनि है यहां पर। और उस अर्थ में इसका अपना एक महत्व है।

जो App बनाता है या जो Start-up की दुनिया में enter होता है या कोई नई चीजों को innovate करता है उसके मूल में कुछ नया करने का इरादा होता है, adventurous nature होता है। हर चीज की गहराई में जाने का स्व भाव होता है लेकिन सबसे बड़ी बात होती है उसके अंदर एक संवेदना होती है। बहुत कम लोग इस बात को अनुभव कर पाएंगे, उसके अंदर एक संवेदना होती है और जब वो कोई बुरे हाल देखता है, कोई समस्या़ देखता है, वो उसे सोने नहीं देती। समस्याऔ उसकी नहीं है, किसी और की है लेकिन वो उसे सोने नहीं देती। उसका मन करता है मैं कोई रास्ताह खोजू, मैं कुछ करू इसके लिए।

मैं अभी बाहर आपका virtual exhibition देख रहा था। वहां मुझे एक simple चीज किसी ने बताई। एक ऐसा ही pad था hardboard का और build था। अब इतने बड़े Start-up की दुनिया में उसको कहां रखा होगा वहां, मैंने पूछा। बोले साहब हमारे देश में बहुत सारे accidents होते हैं। accident होने के बाद जो injured व्य क्तिक है उसकी हड्डी तो टूटती ही टूटती है। उसको ले जाना है तो medical services के लोग आएंगे तब तक क्यार करे? तो उन्होंहने एक hardboard पर एक सामान्यr चीज बनाई है, उसके पैर के नीचे लगा दो, पट्टी कैसे बांधों, उस पर सब लिखा हुआ है। बोले कोई खर्चा नहीं है। अब इसका मतलब कि उसके दिल में आग लगी होगी। कि एक accident होता है, बेचारा कितना परेशान होता है। ले जाते ही दो हड्डियां और टूटती हैं। उसमें से उसने सोचा और वो एक innovation बन गया। किसी के लिए जो दर्द होता है, जो हमें दुआ देने की ताकत दे या न दे, हमारे भीतर एक ऐसी अवस्थास पैदा करते हैं जो इन लाखों-करोड़ों के दर्द को दूर करने का कारण बन जाती है और तब Start-up होता है और इसलिए आपका ये Start-up का अभियान, ये bank balance, और रुपए-पैसे कितने हैं, उसके साथ जुड़ा हुआ नहीं है, जन सामान्य को समस्याओं से मुक्ति दिलाना, सुविधाओं को सरल करना, इस एक महत्वपूर्ण काम को करने की ताकत रखता है। और इसलिए अगर हम हमारे आस-पास बारीकी से देखे तो हमें लगेगा यार, भगवान ने मुझे बुद्धि दी है, मैं पढ़ा हूं, मैं technology जानता हूं। मैं सोचू इसका समाधान, मैं खोजू कुछ और फिर वो शुरू कर देता है। हर कोई, सामान्य मानविकी क्या करेगा, बेचारा उससे जूझेगा या तो व्यवस्था को कोसेगा। कहेगा ये नहीं किया, वो नहीं किया। मीडिया वाला होगा तो रिपोर्ट कर देगा। समस्या वैसी की वैसी रह जाएगी। लेकिन जिसके मन में ये जो चेतना पड़ी हुई है वो उसका उपाय खोजेगा और वो Start-up का कारण बनता है।

अब यहां इतने नौजवान हैं। मेरे मन में आता है कि आप लोग सोचिए। हमारे देश का किसान इतनी मेहनत करता है, इतनी मेहनत करता है और जो अनाज की पैदावार होती है, बहुत मात्रा में वो waste जाता है, बर्बाद होता है। अब पुराने जमाने के infrastructure, उसके लिए पैसे, ये व्यवस्थाएं, क्याो मेरा कोई नौजवान उस पर दिमाग लगाकर के ऐसी व्यवस्थाएं विकसित कर सकता है कि जो affordable हो और इतना बड़ा हमारा जो wastage है वो बच जाए। हो सकता है शायद दुनिया के अनेक गरीब देशों का पेट भर सकते हैं, इतना wastage. हमारे फल-फूल, सब्जी , फल पैदा करने वाला किसान पहाड़ियों में रहता है, शहर में आने तक बेचारे का माल खराब हो जाता है। हम वो क्या technology दे, क्या, व्यंवस्थाा दे आधुनिक।

मैं अभी एक दिन कुछ ये aerated water बनाने वाली कंपनियों से मिला था। मैंने कहा आप इतना बढ़िया-बढ़िया बनाते हो, पेप्सीं और कोला और न जाने क्या –क्याn है, नाम भी मुझको मालूम नहीं। क्योंन ने आप 2%, 5% natural fruit juice, compulsory उसका हिस्सार बना दे, हिन्दुनस्ता़न के हर किसान जो पैदावार करता है अपने आप बिक जाएगी। अगर इस पर कोई सोचे। अब देखिए आज हमारे ही देश के वैज्ञानिकों ने pharmaceuticals के द्वारा हमारे ही लोगों ने vaccine पर काम किया। आज दुनिया के अधिकतम देशों में, अधिकतम गरीब लोगों को, सस्तेa में सस्ताक बालकों को जो vaccine कही से पहुंचता है वो भारत के वैज्ञानिकों के द्वारा किया हुआ होता है।

और इन दिनों जितने भी लोग मुझे मिलते हैं वो कहते हैं साहब हमारी मांग बहुत है, इसके production के लिए और क्याा रास्ताल निकाले। लोग अपना donation देने के लिए तैयार होते हैं कि हम, हमने जो भारत के लागों ने vaccine की दिशा में कितने करोड़ों-करोड़ों बालकों की जिन्दdगी बच रही है। जिसने lab में बैठकर के काम किया होगा, जिसने concept सोचा होगा, उसकी तो उस समय पहचान नहीं हुई होगी लेकिन आज लगता है कि उसने कितनी बड़ी मानवता की सेवा की है।

हम ऐसी कौन-सी चीजें करें जिसके कारण हमारे यहां अब जैसे हमारे यहां atomic energy वालों ने onion को लंबे समय तक बचाने के लिए काफी व्यवस्थाएं विकसित की हैं क्योंकि प्याज के दाम कभी ऊपर- कभी नीचे चले जाते हैं तो सरकारों की सांस भी ऊपर-नीचे हो जाती है। क्यों, क्योंकि वो लंबे समय तक रहता नहीं है, खराब हो जाता है। उत्पादन ज्यादा हुआ तो भी किसान मरता है, उत्पादन कम हुआ, लेकिन उसको preserve करने की व्यवस्थाएं जब विकसित होती हैं। atomic energy वाले इस पर काफी काम कर रहे हैं लेकिन वो इतना costly होता है।

क्या< हमारे Start-up की दुनिया के नौजवान ऐसी चीजों में जाएं। IT के दायरे से बाहर नि‍कलकर के हम और ऐसे छोटे-छोटे पुर्जे, अब भारत में जुगाड़। मैं समझता हूं शायद ऐसा innovative India दुनिया में कहीं नज़र नहीं आएगा । आज हर व्य क्तिे के पास कोई न कोई innovation है। मैंने ऐसे लोग देखे है कि बिजली नहीं है तो अपनी मोटरसाइकिल से पंप चलाते हैं और पानी निकालते हैं और खेत में पानी पहुंचा देते हैं। उसने अपने तरीके से ढूंढा होता है। ऐसे जुगाड़ करने वाले लोगों की कमी नहीं है। लेकिन वो जुगाड़ करता है, अपनी व्यावस्था़ को संभाल लेता है। लेकिन अगर हमारे पास उस प्रकार की दृष्टि हो, दर्शन हो। देखे तो हमें spark होता है यार इसको मैं scalable करू, ऐसी व्यवस्था मैं बना दूंगा।

हम जब ‘मेक इन इंडिया’ कहते हैं तो ‘मेक फॉर इंडिया’ भी हैं क्यों कि सवा सौ करोड़ का देश है, इतना बड़ा मार्किट है। लेकिन हम चाहते हैं कि वो full proof कैसे बने, आसान कैसे हो और सामान्या मानविकी के लिए वो easily accessible कैसे हो। ये अगर व्यवस्था एं देने में हम सफल हो और मैं मानता हूं कि हमारे देश का नौजवान हमारी अपनी समस्याओं को। यहां किसी ने कहा कि मैं अगर उस देश को उसकी समस्याओं को समझूंगा, शायद तिवारी ने कहा। मैं अपनी समस्याओं को समझूंगा तब जाकर के मुझे रास्तें खोजने का सूझेगा और ये जितना हमारा बढ़ेगा देश के विकास के लिए बहुत संभावनाएं हैं। उन संभावनाओं को लेकर के छोटी-छोटी आवश्यकताओं से लेकर के बड़ी-बड़ी।

और Start-up का मतलब ये तो नहीं है कि हर किसी के पास बिलियन डॉलर का काम हो रहा है और दो हजार लोग काम करे, जरूरी नहीं है। पांच लोगों को भी अगर मैं रोजगार देता हूं तो मेरा Start-up मेरे देश को आगे बढ़ा रहा है। एक psychological change लाना है कि youth के दिमाग में job seeker की मानसिकता से उसको बाहर लाना है। वो job creator बने। और एक बार उसके दिमाग में आ गया कि मुझे, मुझे दो लोगों की जिन्दागी को संभालना है, वो कर लेगा।

हमारे देश में education, infrastructure पर बल दिया जाता है, teacher की appointment पर बल दिया जाता है, वो काम हो भी रहा है। लेकिन समय की मांग है quality education की। गरीब से गरीब दूर-सुदूर जंगलों में रहना वाला व्यंक्ति हो, पहाड़ों में रहने वाला व्यक्ति हो। मैं ऐसे कैसे चीजों को खोज के निकालूं कि उसी quality का education जो कि अमीर घरानों के बच्चों को मिलता है, उस technology के द्वारा गरीब से गरीब तक मैं कैसे पहुंचाऊं? और देश तब बदलेगा कि हम समाज के आखिरी इंसान को इन सुविधाओं से लाभान्वित करके उसकी जिन्दगी बदलने का अवसर दे। हमें उसको feed करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर उसको quality education मिलता है तो वहां भी ऐसे spark वाले बच्चे होंगे जो उठकर के खड़े हो जाएंगे और दुनिया को बदल देंगे।

Health sector, आज health sector ज्यादातर डॉक्‍टरों पर dependent कम है, technology पर dependent है। डॉक्टर भी खुद technology पर dependent है। मशीन तय करता है कि तुम्हें क्या तकलीफ है फिर डॉक्टर कहता है ठीक है, किताब देखकर के, लो ले लो। इसका मतलब health sector में technology, innovation की संभावनाएं बढ़ती चली जा रही है लेकिन भारत जैसे देश में ये affordable कैसे हो, ये हमारे सामने चुनौती है। सस्ते में सस्ता व्यवस्था कैसे बने, इस पर हम सोचे, नयेपन से सोचे। और इसलिए Start-up कहने के बाद कुछ लोगों की सोच होती है, ये तो बड़ा हाई-फाई होगा, लैपटॉप के बाहर दुनिया कुछ नहीं होगी, मोबाइल से जुड़े होंगे। ऐसा नहीं है। ये लोग है जिन्होंने कोई न कोई कमाल किए हैं। यहां हर प्रकार के लोग हैं।

आप देखिए handicraft. भारत का handicraft दुनिया में अपना डंका बजाए, ऐसी आप App बनाकर के दुनिया में प्लेटफॉर्म क्यों न खड़ा करे। सिर्फ ई-कॉमर्स नहीं, हम उससे दो कदम आगे कैसे जाए और उसमें जैसी global requirement हो वैसी designing भी provide करे ताकि हमारा जो गरीब आदमी गांव में बैठकर के छोटी चीजें बनाता है उसको भी idea मिले कि नहीं ऐसा नहीं, ऐसा करो। यहां stitch मत करो, यहां करो, लकड़ी ऐसे मत रखो, लकड़ी ऐसे रखो। वो अपने आप बदलता रहेगा और आपकी requirement को पूरा करेगा। इसके लिए connectivity चाहिए, ये बड़ी requirement है और ये, ये काम आप नौजवानों के दिमाग से हो सकता है और इसलिए मैं जब कहता हूं Start-up तो मैं ये मानकर चलता हूं कि Stand up India. इसके लिए मुझे अलग सोच करने की जरूरत नहीं है। जिस देश के पास 800 मिलियन 35 से कम आयु के नौजवान हो, जिस देश के नौजवानों के पास talent हो, हाथ में हुनर हो, अपरमपार सपने हो और पूरी दुनिया में अवकाश ही अवकाश हो, क्याह नहीं हो सकता।

आज मैं IT professionals से कहना चाहूंगा। विश्वप के दुनिया के किसी भी देश के नेताओं से मैं मिलता हूं, दुनिया का कोई भी delegation आता है, उनकी जो बातें होती हैं उसमें एक चिन्ताम हर एक को सता रही है और वो है cyber security. हर कोई परेशान है cyber security को लेकर के। क्याह भारत cyber security provider के रूप में authority बन सकता है। एक बार हिन्दुस्तान का brand का cyber security का software मिल गया तो दुनिया की कोई ताकत उसको हिला नहीं सकती है, कर सकते हैं क्या? मानव जाति के लिए चुनौतियां आवश्यक हैं क्यों कि सिरफिरे लोग तो है जो तबाही करने पर तुले हुए हैं लेकिन हम मानवता को बचा भी तो सकते हैं। हमारे पास इस प्रकार के लोग हैं और ये भी सही है भारत के पास millions of millions problem है, कोई इंकार नहीं कर सकता है। लेकिन at the same time मुझे इस बात का भरोसा भी है कि billions of billions mind भी है। अगर million problem है तो billion mind भी तो हमारे देश में है। हर Start-up के पीछे कोई न कोई समस्या के समाधान का इरादा रहना चाहिए और जब किसी Start-up के पास समस्या के समाधान का इरादा होगा तो उसके संतोष का level भी कहीं कुछ और होगा। जब किसी की जिन्दगी में बदलाव लाता है तो उसको एक satisfaction मिलता है और इसलिए मैं वो कुछ करके दिखाऊं जिसमें मैं job creator बनूं, मैं वो कुछ करके दिखाऊं जिसके कारण किसी की जिन्दइगी में मैं काम आऊं, मैं वो कुछ करके दिखाऊं कि मेरे देश को एक कदम आगे ले जाने में मेरा भी कोई योगदान हो। इतना भी अगर सपना लेकर के हम चलते, हम बहुत कुछ कर सकते हैं।

आज यहां हमारे सामने एक action plan प्रस्तुत हुआ है। उस action plan की कुछ विशेषताएं हैं जो मैं आपके सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा ताकि आप सुबह से सारी बातें सुन रहे हैं लेकिन आखिरकार ये भी तो हो कि क्या होने वाला है। सबसे पहला मेरा घोष वाक्य है कि सरकार बीच में न आए बस, बहुत कुछ हो जाएगा और उसी विचार के आस-पास जो भी चीजें बनाई हैं एक तो हमने महत्वपूर्ण निर्णय किया है वो है, self-certification आधारित compliance की व्यवस्था। Start-ups के लिए नौ श्रम और पर्यावरण कानून जो आपको प्रभावित करते हैं के संबंध में self-certification को हमने introduce किया है और एक बात 3 साल तक कोई inspection नहीं होगा और आप समझ सकते हैं कि जब Inspector नहीं आएगा तो कितनी सुविधा रहती है। दूसरी बात है Start-Up India hub, single point up contact, ये हम व्यवस्था खड़ी करने जा रहे हैं और hand holding की व्यवस्था है। Start-Up में जैसे इन नौजवानों में मैंने एक व्यवस्था देखी है, उनसे मैं कल से बातें कर रहा हूं, काफी कुछ मैं इनसे सीख रहा हूं। हर एक के दिमाग में एक चीज रही है कि वो अपना तो कर रहे हैं लेकिन Guardian के नाते, mentor के नाते बहुत अच्छा काम करे है, हर कोई कुछ न कुछ कर रहा है, ये अपना social contribution के रूप में कर रहे हैं, mentor के रूप में वो औरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और इसलिए Hand holding की व्यवस्था, उस पर हम बल देना चाहते हैं, एक मित्र के रूप में, एक सलाहकार के रूप में, एक साथी के रूप में सरकार कैसे आपके साथ काम करे। Mobile App और Portal इस वर्ष की पहली अप्रैल से Start-Up के लिए Online Portal और एक Mobile आधारित App के जरिए संचारित होने वाला एक छोटा सा form शुरू किया जाएगा। वरना हमारे यहां तो address भी लिखते हैं तो 10 line का होता है। फलां गांव, फलां गली के सामने, फलां मौहल्ले से गुजरते हुए, पिछली खिड़की में, मूलतः लोगों का स्वभाव हर चीज को बड़ा करना, लंबा करना है तो इसको एक Mobile Phone पर छोटा सा एक Form बन जाए, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं और इसको Registration की व्यवस्था भी उसी प्रकार से होगी।

एक और problem रहता है Start-Up के लोगों के लिए.... patent का Intellectual property right सबके लिए ये एक बात रहती है आखिरकर वो ही तो पूंजी है Start-Up वालों की, अगर उसको protection नहीं मिला लेकिन कभी-कभी हमारे यहां patent के लिए महीनों लग जाते हैं process में, ये चिंताजनक व्यवस्था को बदलना है और patent registration का शीघ्र पता लगाना एवं कानूनी सहायता। हम नए प्रयोगों को protect, कानूनी सहायता देने का आवश्यकता समझते हैं। हम Start-Up के IPR Services की Scheme ला रहे हैं। जिसमें Start-Up के आवेदन की File शीघ्र करने की सहायता मिलेगी और ये भी सही है कि Intellectual property की दुनिया में, विश्व में जितने registration हुए हैं, उसमें काफी पीछे हैं हम लोग। IP में नहीं है लेकिन YP में है। हमारे पास Youth Property है YP और वो मुझे YP और IP को मिलाना है ताकि हमें कुछ ज्यादा परिणाम मिलें। हम ये भी एक सोच रहे हैं कि भारत के प्रमुख शहरों में एक इस काम के लिए facilitation की व्यवस्था हो, स्थानीय Chamber of Commerce हो और लोगों के साथ मिलकर के, इस विषय के वकीलों का एक समूह हो। इन सबको जोड़कर के कैसे निशुल्क व्यवस्था हो ताकि इस field में काम करने वाले वकीलों की संख्या बहुत कम है और Fee भी बहुत ज्यादा है और उसको लगता है कि भई इस काम के लिए मैं इतने रूपए दूं और करता रहूं, करता रहूं और उतनी, उसकी property चोरी हो जाती है, बेचारा कहीं का रहता नहीं है तो इसलिए बिना पैसे उसको ये व्यवस्था मिले। उसी प्रकार से Fees में भी, आज जो Fees है patent के लिए उसमें हम 80 percent reduction करेंगे क्योंकि देखिए भारत का भविष्य भी Innovation और creativity में है और Innovation और creativity को जितना हम बल देंगे, उतना ही हमें परिणाम मिलेगा। हम Start-Up के लिए सार्वजानिक खरीद की शर्तों में भी छूट देने का निर्णय कर रहे हैं। सरकारी खरीद में Start-Up को बढ़ावा देने के लिए हम Experience Turn over के आधार पर भी छूट देंगे। हमारे देश में क्या problem है, कोई भी काम है तो पूछते हैं कितना Turn over है, वो कहता है मौका दोगे तभी तो Turn over शुरू होगा या कोई काम देते हैं तो पूछते है कि भई कितना experience है तो वो कहता है कि भई experience की शुरूआत तो करो कहीं से और इसलिए नए के लिए दरवाजे बंद करने की व्यवस्था है, हम उसमें छूट देने की व्यवस्था में आगे बढ़ने चाहते हैं ताकि quality को, हां उसमें compromise नहीं होना चाहिए लेकिन नया है इसलिए उसको मौका न मिले ये स्थिति तो बदलनी है तभी नौजवानों को अवसर मिलेगा लेकिन मेरा आग्रह है Zero defect and Zero effect तो इस पर हम जरूर बल देंगे।



एक और चिंता का विषय है हमारे देश में exit के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है। एक बार pipe में आ गए और इसलिए Start-Up के लिए सबसे पहले हम exit की व्यवस्था कर रहे हैं। हम ये भलीभांति समझते हैं कि एक विशाल और सफल कारोबार का निर्माण करने के लिए असफलताओं से बचा नहीं जा सकता है। असफलताएं होंगी और मैं सबसे ज्यादा असफलताओं के लिए हिम्मत करने वालों को promote करना चाहता हूं। जो पानी से भागता है, वो कभी तैरना नहीं सीख सकता है। एक बार तो डूबना ही पड़ता है तब जाकर के तैरना शुरू होता है और इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए 90 दिन के भीतर Start-Up exit कर पाए, हम ऐसी व्यवस्था करने के लिए संसद में Bankruptcy Bill, 2015 हम लाए हैं और बाकी मुसीबत तो आप जानते हैं। अब आम नौजवान, अपनी twitter, Facebook की दुनिया में message दीजिए, काम अटका पड़ा है Parliament में, हो सकता है अब समझेंगे कुछ लोग। Fund of Funds, Start-Up की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अगले 4 वर्षों में 2500 crore रुपए की प्रतिवर्ष आवंटन के साथ 10,000 crore रुपए का dedicated फंड बनाया जाएगा। वैसे आपने देखा होगा, पिछले दिनों इस काम को शुरू किया है। Start-Up के लिए credit guarantee एक फंड आपके फंड संबंधी आवश्यकताओं में सहायता करने के लिए हम अगले 4 वर्षों में प्रतिवर्ष 500 crore रुपए की निधि के साथ आपके लिए credit guarantee scheme लाएंगे और इसके कारण मैं समझता हूं काफी सुविधाएं आपकी बढ़ जाएंगी। उसी प्रकार से Tax incentive, Start-Up के लिए वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए हम सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त Funds के लिए निवेश किए जाने वाले Capital gain tax की छूट देना चाहते हैं, अब बाकी बात तो Finance Minister करेंगे लेकिन मैंने उनकी हाजिरी में बोल दिया है तो गाड़ी आगे चलेगी। कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को बेचने से आए हुए धन को, अपने ही Start-Up में लगाए तो Capital gain से उसको मुक्ति दी जाएगी। Start-Up से profit को 3 साल के लिए Income Tax से मुक्ति दे दी जाएगी। Women entrepreneur की संख्या बढ़ रही है Women Start-Up की, मैं सरकार से कहूंगा कोई विशेष योजना उनके लिए बना सकते हैं क्या, हम Fair market value के ऊपर investment पर लगने वाले tax से संबंधित आपकी समस्याओं का समाधान भी करेंगे। Incubation and Industry Academia ये एक बहुत महत्वपूर्ण व्यवस्था है क्योंकि इसके बिना इस विषय को develop नहीं किया जा सकता है और उसके लिए Atal Innovation Mission (AIM) विश्वस्तरीय Innovation hub को बढ़ावा देने, technology आधारित Start-Up को competitive बनाना और उसके लिए एक Atal Innovation Mission प्लेटफोर्म की शुरुआत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य प्रतिभा, उपयोग की उद्यमियता को बढ़ावा देना तथा Incubators के Network को सुधार करना। इसके तहत sector specific Incubators को निर्माण करना है। 500 incurring labs तैयार होंगे, pre Incubation की अलग व्यवस्था की जाएगी, मौजूदा जो Incubation center हैं, उनको और बलवान बनाया जाएगा और Start-Up को seed capital भी दिया जाएगा।

Innovation को एक राष्ट्रीय स्तर पर award देने की दिशा में भी सोचा जाएगा, जिसके कारण इस बात को प्रोत्साहन मिले, उसके लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में already 35 नए Incubation center तैयार करने का काम तो चल ही रहा है। Public Private Partnership का भी model इसमें लिया है और करीब 35 Public Private Partnership नए Incubation center बन रहे हैं। राष्ट्रीय जो संस्थाएं हैं उसमें 31 center of Innovation, 13 Start-Up centers और 18 Technology business Incubators की स्थापना का भी काम चल रहा है। अभी आपने IIT मद्रास का देखा, उन्होंने research park में जिस प्रकार से काम खड़ा किए, 100 से ज्यादा कंपनियां उस पर काम कर रही हैं। इसी प्रकार से हम 7 और center खड़े करना चाहते हैं देश में और उसके लिए करीब 100 crore rupees भारत सरकार देगी ताकि ये काम आगे बढ़े।

Bio technology भी एक बहुत बड़ा क्षेत्र है जिसमें हम जितना बल दें, उतना कम है और bio technology में entrepreneurship को बढ़ाने के लिए 5 नए bio clusters, 50 नए bio Incubators, 150 technology transfer offices और 20 bio connect offices बनाने का निर्णय किया है। विद्यार्थियों में भी एक talent रहती है इस विषय में even स्कूल के बच्चों में भी कुछ न कुछ स्वभाव innovation का रहता है, इसको बढ़ावा देना है क्योंकि भारत ने innovation में कुछ न कुछ कर दिखाना होगा तो छात्रों के लिए innovation आधारित कार्यक्रम शुरू किया जाएगा क्योंकि उनके अंदर ये जो spark पड़ा हुआ है, उसको अगर channelize करे तो देश को बहुत कछ मिल सकता है। स्कूली छात्रों के लिए Innovation के core programme शुरू किए जाएंगे और 5 लाख स्कूलों में 10 लाख बच्चों पर focus करके इस काम को बढ़ावा दिया जाएगा। Incubator grant challenges, सरकार 10 ऐसे Incubator center की पहचान करेगी जो World class बनने की क्षमता रखते हैं, इनमें से प्रत्येक को सरकार की तरफ से 10 करोड़ रुपए की सहायता दी जाएगी।

Start-Up के लिए कोई न कोई event करने रहेंगे ताकि क्या हो रहा है इसका भी परिचय होना जरूरी है और इसलिए Start-Up fest इसकी एक परंपरा हमारे देश में बननी चाहिए। मैं जब 10 September में US गया, हमारे शुक्ल जी यहां बैठे हैं तो, काफी मित्र थे उस समय वहां US में Start-Up की दिशा में भारतीय लोगों ने बहुत कुछ काम किया है तो मैं हिंदुस्तान से 40 ऐसे Start-Up के लोगों को लेकर गया था और वहां पर एक joint event किया था। इतना inspiring था मैं काफी देर हर चीज को देखा था, भारत में भी हम Start-Up fest को परंपरागत रूप से खड़ा करना चाहते हैं, सरकार उसमें जितना भी मदद कर सकती है, वो करेगी ताकि हमारे नई पीढ़ी के लोगों को देखने को भी मिले और जैसा आपने कहा सर्व विनाश के सामने, उन्होंने कहा आज इस event से मुझे नए सपने देखने की ताकत मिली है। अब ये अपने-आप में एक बहुत बड़ा संदेश है। अगर हम लगातार इस बात को करते रहते हैं तो हमारे नए लोगों को भी, जो उनके मन में कुछ पड़ा होगा तो उसको वो एक अवसर मिल सकता है और उसका एक networking भी अच्छा कर सकता है तो जो योजना को आज मैंने आपके सामने प्रस्तुत किया है, इसके कुछ पहलू मैंने आपके सामने रखे हैं। मुझे विश्वास है कि ये event आने वाले दिनों में भारत की युवा पीढ़ी को, भारत के talent को, भारत के लिए, मानवता के लिए कुछ न कुछ नया करने की ताकत देगी, प्रेरणा देगी। मेरी सभी नौजवानों को हृदय से बहुत बहुत शुभकामनाएं हैं। विश्व के अनेक भागों से जो लोग आए हैं, मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि उन्होंने आकर के सबका हौंसला बुलंद किया है और भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, आगे बढ़ने वाला है और उसमें आप लोगों की अहम भूमिका रहने वाली है। बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। 



16 January 2016


START-UP India Launch by Prime Minister Narendra Modi on 16th January, 2016 


The Government of India is launching the “Start-up India,” movement on January 16th, 2016 in New Delhi. The event is aimed at celebrating the entrepreneurship spirit of country’s youth and will be attended by CEOs and founders of top Start-ups (over 1500) from across the country. The closing session will be addressed by the Honorable Prime Minister of India, Shri Narendra Modi who shall formally launch the initiative and unveil the Start-up Action Plan.

Union Minister of Finance and Corporate Affairs Shri Arun Jaitley shall inaugurate the event in Vigyan Bhawan at 9.30 am on 16th January 2016. Minister of State for Commerce and Industry, Smt. Nirmala Sitharaman shall be the Guest of Honour for the event.

The event shall be a non-stop day long global workshop on Start-up Entrepreneurship and shall include panel discussions on topics such as “Unleashing Entrepreneurship and Innovation: What do Indian Startups Need to Grow and Prosper”, “Celebrating Women: Stories of Innovative Women Entrepreneurs”, “How digitization will change India’s future”, “Making Indian Healthcare Leapfrog” and “Financial inclusion is within reach”. The panel discussion on “Show Me the Money: How do we Capitalize Entrepreneurship?” shall be chaired by Minister of State for Finance Shri Jayant Sinha. A unique Question and Answer (Q&A) session titled “Face-to-face with Policy makers” is also being organized wherein Secretaries of Key Government Ministries and Departments will answer questions on how Government will be creating an enabling ecosystem for Start-ups. The objective is to reinforce commitment of the Government towards creating an ecosystem that is conducive for growth of Start-ups. The panel shall comprise of Secretaries from Department of Revenue, Department of Human Resources and Development, Department of Corporate Affairs, Department of Financial Services, Department of Economic Affairs, Department of Science and Technology, Department of Biotechnology, Department of Electronics and Information Technology, Department of Micro, Small and Medium Enterprises and Department of Skill Development. Additionally, the panel will have representation from Securities Exchange Board of India (SEBI) and Small Industries Development Bank of India (SIDBI).

The event shall also feature interactive talks with global leaders and venture capitalists such as Mr. Masayoshi Son (Founder and CEO, SoftBank), Mr. Travis Kalanick (Founder, Uber) and Mr. Adam Nuemann (Founder, WeWork). A delegation of over 40 top CEOs and founders of Start-ups, Venture Capitalists and Angels investors from Silicon Valley will be attending as special guests for the event and will be taking part in interactive Q&A sessions. Google shall be conducting an innovative session titled “Launchpad Accelerator” which will involve live pitches being made by early stage Start-ups to potential investors. Nikesh Arora, President & Chief Operating Officer, SoftBank shall be interacting with participants on aspects relating to Start-up funding. A virtual exhibition is also being organized as part of the event to showcase some of the unique and innovative work done by Start-ups in the country.

As Prime Minister Shri Narendra Modi had indicated as part of his last “Mann ki baat” radio programme, a full Action Plan of Start-up India shall be launched as part of the event. The plan shall highlight initiatives and schemes being undertaken by the Government to address various aspects relating to developing a conducive Start-up ecosystem in the country.

Considering the importance of this event towards promotion of Start-up culture in the country, the event will be telecast live in IITs, IIMs, NITs, IIITs and Central Universities and to youth groups in over 350 districts of India.

Department of Industrial Policy and Promotion (DIPP) is organizing this event along with Invest India and Start-up ecosystem players iSpirt, YourStory, NASSCOM, SheThePeople.tv and Kairos Society and youth wings of FICCI and CII.


11 October 2015
A Million New Enterprises in Micro, Small and Medium Sector contributing ONE LAKH crores to GDP should be started during the Deen Dayal centenary year.

What is the minimum required?. Plans to provide around 4 lakh crores investment to these new units.The financial system of the country, both formal and informal and the startup capital system of the country has to make plans to provide this capital.

There should be plan to reach at least 2 million potential entrepreneurs so that 50% of them start the new ventures. First, potential entrepreneurs are to be described and identified.



Policy Workshops

Education Policy
Economic Policy
Agricultural Policy
Industrial Policy
Services Policy
Science and Technology Policy
National Policy for Governance
Land Use Policy
Policy on Co-operatives
Sampoorna Rojgar
Labour Policy
National Security Policy
Foreign Policy

Reference
National Policy Studies in the light of Ekatma Manav Darshan
Edited by Ravindra Mahajan
Centre for Integral Studies and Research
Pune
2013




China Startup Programme

China is promoting startups. According to a recent report (12 October 2015) 10,000 startups are being set up every day. The statistics collected by Government show that six million firms were set up during the period March 2014 to August 2015
(Xin Guobin, Vice Minister for Industry and Information Technology)


Updated   18.3.2024
3 October 2016, 24 Jan 2016, 17 Jan 2016

Sunday, November 5, 2017

Jnanasangam - Pune 2017 - National Ethos in Bharatiya Tradition of Education and Contemporary Context




Call to free education from West's influence
Governor O.P. Kohli
Pune,  Sun,05 Nov 2017
https://www.nyoooz.com/news/pune/953065/call-to-free-education-from-wests-influence/




Shri Vinod Tawde addressed the gathering during valedictory function.

Shri Tawde told the gathering that he was active in ABVP. He welcomes such gatherings and he requested the organizers to send to him the proposals made in the conference for implementation. He said he wants concrete recommendation for each standard (Class I to Masters courses) so that he consider them for including in the system.

The Governor also said that government is keen on bringing changes and the proceedings of the seminar have to be sent to the government. Governor said Bhaskaracharya belongs to Maharashtra and he calculated the time earth takes to make one round around the Sun. How did he make it? We have to know and use it further.


The Sessions

1. National Ethos in Education

2. Understanding National Ethos Through Literature in Bharat
Prof Avadhesh Kumar Singh
V.C. Auro University, Surat Gujarat

Prof Singh explained the reasons for naming Maharshi Valmiki as Adi Kavi.  Kavi requires darshan and varnan capabilities. He said the ethos are karuna, prema. application in practice, seva and tyaag.

About Prof Singh

https://collegedunia.com/news/c-25478-interview--prof-avadhesh-kumar-singh-vc-of-auro-university

https://www.aurouniversity.edu.in/Dr-Avadhesh-Kumar.html?height=400&width=600

साहित्य = सम + हित + यत

वह विधा और विद्या, जो मानवका हित संपादित करती है|

http://saahityaalochan.blogspot.in/2008/08/blog-post_2139.html 



Bhartiya Evam Paschatya Kavya Sidhant
Dr Ganpati Chandra Gupta
Rajkamal Prakashan Pvt Ltd
https://books.google.co.in/books?id=w5Ut61s0m34C

3. Social Reforms Through Tradition of Education

Prof Shymarao Atre is the main speaker




4. National Ethos Reflected in Education Commissions
Prof. Indumati Katdare

5. Exploring the Research Areas for Understanding National Ethos

Prof Shubada Joshi

She explained the model Prayojanam - Istha sadhana - Phala prapti

6. Decolonising Teaching of Humanities




Related website pages and blogs

Wider Association of Vedic Studies

http://waves-india.com/


Social And Cultural Ethos Of India
K.K. Sinha
Atlantic Publishers & Dist, 2008 - Constitutional history - 200 pages
https://books.google.co.in/books?id=Jb-fO2R1CQUC

Comparative Ethos in Management
Nikhil Barat, Bani P. Banerjee
Excel Books India, 2009 - Management - 138 pages
https://books.google.co.in/books?id=SAS_PgH6_qgC

Sunday, May 7, 2017

Friday, April 21, 2017

India to Become 3rd Biggest Economy by 2030 - US Department of Agriculture Study - 2015



12 April 2015

US Department of Agriculture made the following projections of GDP for USA, China and India in 2030

Projections

USA  $24.8 trillion
China   $22.2 trillion
India   $6.6 trillion

India will do better.

23 April 2017




The Vice Chairman, NITI Aayog, Dr. Arvind Panagariya briefing the media after the 3rd Governing Council Meeting, in New Delhi on April 23, 2017. The CEO, NITI Aayog, Shri Amitabh Kant is also seen.
CNR :96031 Photo ID :101435
http://pibphoto.nic.in/photo//2017/Apr/l20170423101435.jpg

India GDP will be $7.2 trillion in 2030 - NITI Ayog


Niti Ayog has developed a 15 year plan from the financial year 2015 - 16 to 2030 - 31 and made the forecast that Indian GDP will be $7.2 trillion in 2030.


Meeting related materials

Opening Remarks by PM
http://www.narendramodi.in/pm-delivers-opening-remarks-at-3rd-meeting-of-governing-council-of-niti-aayog--535165

Presentation by Amitabh Kant, CEO, NITI
http://niti.gov.in/writereaddata/files/new_initiatives/CEO-Amitabh%20Kant_presentation_at_the_3rd_Governing%20Council%20Meet.pdf


PIB Press Release on Accomplishments of NITI during the last three years
http://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=161229

http://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/economy-to-grow-over-three-fold-to-7-25-trillion-by-2030-niti-aayog/articleshow/58330158.cms

http://www.hindustantimes.com/business-news/niti-aayog-projects-growth-at-an-average-of-8-in-15-years/story-U4uBHFznIBqWBg8peCRhBK.html


Presentations on NITI Aayog’s work, GST, and raising agricultural income, made at meeting of Governing Council, NITI Aayog
http://www.pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=161238

PM's  closing remarks at 3rd Meeting of Governing Council of NITI Aayog
http://www.pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=161240



11 May 2015

 $10 trillion economy by 2034


We need to boost R&D spending to 2.4% of GDP to achieve GDP growth of 9% p.a. for number of years and  become $10 trillion economy by 2034

India's economy would need to increase its research and development (R&D) spending from mere 0.8 per cent of gross domestic product (GDP) in 2013 to 2.4 per cent  similar to developed markets of Korea (3.8 per cent), US (2.7 per cent) and China (1.9 per cent)  to grow its GDP by 9 per cent per annum to become a $10 trillion economy over the next two decades. Minister of state for science & technology and earth sciences, Mr Y.S. Chowdary  stressed the point while inaugurating '3rd Innovation Summit-cum-Excellence Awards: Innovative India@2020,' organised by The Associated Chambers of Commerce and Industry of India (ASSOCHAM) on 11th May 2015.



Focus on innovation should not  be restricted to new technologies and products but also include innovative distribution and financing processes and business models according to the minister.

http://www.business-standard.com/article/news-cm/need-to-boost-r-d-spending-to-2-4-to-achieve-gdp-growth-of-9-p-a-to-become-10-trillion-economy-by-2034-science-technology-minister-115051200273_1.html



Updated 24 April 2017,  1 November 2015
Published on 12 April 2015




Friday, March 31, 2017

The April Alternative Blogging Challenge


My Posts for the April Alternative Blogging Challenge - Theme MAKE IN INDIA


Make in India is a good topic for these four posts.
BCG announced that India's consumption will triple by 2025.
So Make in India has good scope to become success.

Four Proposed Posts

Make in India 2017-18 - Success Drivers and Challenges

Make in India - Mechanical Engineering Products and Components

Make in India - Electrical Engineering Products and Components

Make in India - Electronics Products and Components


The April Alternative Blogging Challenge - Signup


Now the Signup Page is Posted. You can visit the page given below and add your blog as a participating blog in the challenge. I added my blog

http://aprilalternativechallenge.blogspot.com/2017/03/ready-set-signup-for-april-alternative.html

http://aprilalternativechallenge.blogspot.com/2017/03/signups-for-april-alternative-challenge.html


The signups will start on 27th March  and will stay open until April 28th, the last day of the Challenge. Why don't you write a comment on this post and we can stay in touch regarding the challenge.

I shall write four parts for this challenge also on India.

Is Make in India a good topic for these four posts. BCG announced that India's consumption will triple by 2025. So Make in India has good scope to become success.

Four Proposed Posts

Make in India 2017-18 - Success Drivers and Challenges

Make in India - Mechanical Engineering Products and Components

Make in India - Electrical Engineering Products and Components

Make in India - Electronics Products and Components

Give your views.

Updated 3 April, 29 March 2017, 26 March 2017, 24 March 2017, 20 March 2017

Tuesday, April 7, 2015

India has Resources to Excel in the Third Industrial Revolution

India missed the first and second industrial revolutions. But India is well poised to prosper in the third industrial revolution.

Third industrial revolution is based on renewable energy and internet or digital communication. India has the basic resources required in both the areas.

Jeremy Rifkin described India as Saudi Arabia of Renewable Energy and exhorted Indian policy makers and businessmen to concentrate on renewable energy and develop technology for harnessing it.

In the area of digital communication also, India is well endowed with large number of educational institutes and graduates and post graduates. It made a name for the software services in international markets thus providing the base for further progress in the field. What is needed is the realization that a great opportunity is there to encash by focusing on developing renewable energy and digital communication to provide them to domestic consumers and provide services related to them in international markets by being ahead in technology developments in these two areas.

News items on Rifkin in India

Ficci press release on mega trends  http://www.ficci.com/pressrelease/856/FICCI-press-jan-17-megatrends.pdf

http://telugutimes.in/shownews.asp?cat=1&subCat=8&ContentId=13212

http://www.financialexpress.com/news/india-could-lead-3rd-industrial-revolution-rifkin/900735/

http://www.mydigitalfc.com/news/india-cusp-economic-transformation-jeremy-rifkin-357

http://www.businessworld.in/businessworld/businessworld/content/India-Can-Lead-New-Revolution.html

Articles and Video on Rifkin's Third Industrial Revolution Idea


Jeremy Rifkin is Wharton School professor who authored the best selling book “The third industrial revolution.”

7 April 2015

It is interesting to read to this new item. Modi Government has embarked on big solar energy push.


Updated 7 April 2015, 3 March 2012

Saturday, January 17, 2015

India: 20 Trillion Dollars - Modi Speech in Hindi - ग्लोबल बिजनेस समिट 2015 में माननीय प्रधानमंत्री के उद्घाटन संबोधन






http://pib.nic.in/photo//2015/Jan/l2015011661248.jpg


इकोनॉमिक टाइम्स ग्लोबल बिजनेस समिट में माननीय प्रधानमंत्री के उद्घाटन संबोधन

मूल पाठ का हिंदी अनुवाद




आज यहां ग्लोबल बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए मुझे प्रसन्‍नता हो रही है। यह अर्थशास्त्रियों एवं उद्योग जगत की हस्तियों को साथ लाने का अच्छा मंच है। मैं इसके आयोजन के लिए द इकोनॉमिक टाइम्स को धन्यवाद देता हूं।

अगले दो दिनों के दौरान, आप विकास एवं महंगाई, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे, गंवाए जा चुके अवसरों और असीमित संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। आप भारत को अपार संभावनाओं से भरे एक देश के रूप में देखेंगे, जो पूरी दुनिया में अद्वितीय है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपके सुझावों पर मेरी सरकार पूरा ध्यान देगी।

मित्रों,

संक्रांति 14 जनवरी, को मनायी गयी। यह एक पावन त्‍यौहार है। यह उत्तरायण का प्रारंभ है जिसे एक पुण्यकाल माना जाता है। इसके साथ ही लोहड़ी पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य, उत्तर की यात्रा प्रारंभ करता हैं। यह शीतकाल से बसंत ऋतु की ओर कदम बढ़ाने का भी सूचक है।

नए ज़माने के भारत ने भी अपनी परिवर्तन यात्रा शुरू कर दी है (The New Age India has also begun its transition); यह 3 से 4 वर्ष की सुस्त उपलब्धियों के शीतकाल से नये वसंत की ओर की यात्रा है। लगातार दो वर्षों तक 5 फीसदी से भी कम की आर्थिक विकास दर और शासन का कोई भी सटीक तौर-तरीका न होने से देश गहरी निराशा में डूब चुका था। दूरसंचार से लेकर कोयले घोटाले की खुलती परतों ने अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया था। हम, भारत को अवसरों की भूमि बनाने के लक्ष्य से भटक गए थे। अवसरों की कमी के कारण अब हम अधिक समय तक पूंजी और श्रम बल के पलायन का जोखिम नहीं उठा सकते।

जो बर्बादी हो चुकी है अब हमें उसमें सुधार लाना होगा। विकास की रफ्तार बहाल करना एक कठिन चुनौती है। इसके लिए कड़ी मेहनत, सतत प्रतिबद्धता और ठोस प्रशासनिक कदम उठाने की आवश्यकता होगी। हालांकि, हम निराशा पर विजय पा सकते हैं और हमें अवश्य ऐसा करना चाहिए। हमने जो भी कदम उठाए हैं उन्हें निश्चित रूप से इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

मित्रों,

नियति ने मुझे इस महान राष्ट्र की सेवा करने का अवसर प्रदान किया है। महात्मा गांधी ने कहा था कि जब तक हम "हर आंख से आंसू को नहीं पोछ देते" हमें आराम से नहीं बैठना चाहिए। गरीबी हटाना मेरा बुनियादी लक्ष्य है। समावेशी विकास की मेरी सोच इसी पर टिकी है। इस विजन को नए जमाने के भारत की वास्तविकता में तब्दील करने के लिए हमें अपने आर्थिक लक्ष्यों एवं उद्देश्यों के बारे में पूरी तरह से स्पष्ट रहना होगा।

सरकार को एक ऐसा इको-सिस्टम अवश्य तैयार करना चाहिए:

• जहां अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास के लिए हो; और आर्थिक विकास, चहुंमुखी प्रगति को बढ़ावा दे;
• जहां विकास, रोजगार का सृजन करता हो; और रोजगार, हुनर पर केन्द्रित हो;
• जहां हुनर का सामंजस्‍य उत्पादन से हो; और उत्पादन, गुणवत्ता के मानदंड के अनुरूप हो;
• जहां गुणवत्ता, वैश्विक मानदंड पर खरी उतरे; और वैश्विक मानदंडों को पूरा करने से समृद्धि आए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समृद्धि सभी के कल्याण के लिए हो।

आर्थिक सुशासन और चहुंमुखी विकास के लिए यही मेरी अवधारणा है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारत के लोगों की उन्नति के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करें और नए जमाने के इस भारत का सृजन करें।

मित्रों,

मैं आपको बताना चाहता हूं कि हम इस नये वसंत में प्रवेश करने के लिए क्या करने जा रहे हैं। मेरी सरकार, विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़ी तेजी से नीतियों एवं कानूनों की रूप-रेखा तैयार कर रही है। मैं इसी मामले में सभी का सहयोग चाहता हूं।

पहला, हम बजट में घोषित राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने के प्रति कटिबद्ध हैं। हमने इस दिशा में व्यवस्थित ढंग से कार्य किया है। 


आपमें से कई अपनी कम्पनियों में काईजेन का अभ्यास करते हैं। बर्बादी कम करने का अर्थ है फालतू खर्च में कटौती और दुरुपयोग को रोकना। इसके लिए आत्म-अनुशासन की जरूरत होती है।

यही वजह है कि फालतू खर्च में कटौती के उपाय सुझाने के लिए हमारे पास व्यय प्रबंधन आयोग है। इस तरह से, हम रुपये को ज्यादा उत्पादक बनाएंगे, और इसका अधिकतम लाभ उठाएंगे।

दूसरा, पेट्रोलियम क्षेत्र में बड़े सुधार हुए हैं।

डीजल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त कर दिया गया है। इसने खुदरा पेट्रोलियम के क्षेत्र में निजी कम्पनियों के प्रवेश का रास्ता खोल दिया है।

गैस की कीमतों को अंतर्राष्ट्रीय मूल्‍यों से जोड़ दिया गया है। इससे निवेश का नया प्रवाह आएगा। इससे आपूर्ति बढ़ेगी। यह कदम महत्वपूर्ण बिजली क्षेत्र को समस्याओं से मुक्‍त करेगा।

आज भारत में रसोई गैस की सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजना, दुनिया में सबसे बड़ा नकद हस्‍तांतरण कार्यक्रम है। आठ करोड़ से भी अधिक परिवार यह सब्सिडी सीधे अपने बैंक खातों में प्राप्‍त कर रहे हैं। देश के एक तिहाई परिवार इससे जुड़ गए हैं। इससे हेराफेरी पूरी तरह समाप्‍त हो जाएगी।

इसे ध्यान में रखते हुए अन्‍य कल्याण योजनाओं में भी सीधे नकद हस्‍तांतरण शुरू करने की हमारी योजना है।

तीसरा, महंगाई को सख्‍त कदमों से काबू में किया गया है।

तेल के गिरते हुए मूल्‍यों ने महंगाई को भी बेहद कम करने में मदद की है। खाद्य पदार्थों की महंगाई एक साल पहले 15 प्रतिशत से भी अधिक थी जो पिछले महीने गिरकर 3.1 प्रतिशत के स्तर पर आ गई।

इससे भारतीय रिजर्व बैंक को ब्‍याज दरें कम करने और सतत विकास सुनिश्चित करने का अवसर मिला।

चौथा, जीएसटी लागू करने के लिए संविधान में संशोधन के लिए राज्‍यों की सहमति प्राप्‍त करना भी एक बड़ी उपलब्धि है। और हमारे अरूण जी तो कहते हैं कि शायद आजादी के बाद इतना बड़ा Reform का कदम इससे पहले कभी नहीं उठाया गया।

जीएसटी का मसला पिछले 10 वर्षों से भी अधिक समय से विचाराधीन है। जीएसटी अकेले ही भारत को निवेश के लिहाज से प्रतिस्‍पर्धी और आकर्षक बना सकता है।

पांचवां, गरीबों को वित्‍तीय प्रणाली में शामिल किया गया है।

महज चार महीनों की छोटी सी अवधि में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 10 करोड़ से भी अधिक नये बैंक खाते खोलने में कामयाबी मिली है। हमारे जैसे विशाल देश के लिए यह बड़ी चुनौती थी लेकिन इच्‍छाशक्ति, दृढ़संकल्प और प्रत्‍येक बैंकर के पूर्ण सहयोग की बदौलत आज हम सभी को बैंक खाते की सुविधा देने वाला देश बनने के काफी करीब पहुंच गए हैं। जल्‍द ही सभी खातों को "आधार" से जोड़ दिया जायेगा। अब पूरे देश में बैंक का उपयोग करने की आदत आम हो जायेगी। अब इससे भविष्‍य में व्‍यापक अवसर पैदा होंगे। लोगों की बचत बढ़ेगी। वे नई वित्‍तीय योजनाओं में निवेश करेंगे। एक सौ बीस करोड़ लोग पेंशन और बीमे की उम्‍मीद कर सकते हैं। जैसे-जैसे देश तरक्‍की करेगा, इन बैंक खातों के जरिए मांग बढ़ेगी और विकास होगा।

हमने सदा सामाजिक एकता, राष्‍ट्रीय एकता आदि के बारे में ही बहस की है। हमने कभी भी वित्‍तीय एकता पर विचार-विमर्श नहीं किया। हर व्‍यक्ति को वित्‍तीय प्रणाली में शामिल करने के बारे में कभी भी विचार-विमर्श नहीं हुआ। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पूंजीवादी और समाजवादी दोनों ही सहमत हैं। मुझे नहीं लगता कि इस बारे में दोनों ले बीच कोई विवाद है। दोस्‍तों, इससे बड़ा सुधार क्‍या हो सकता है?

छठा, ऊर्जा क्षेत्र में सुधार किया गया है। 


कोयला ब्‍लॉक अब नीलामी द्वारा पारदर्शी तरीके से आवंटित किए जा रहे हैं।

खनन को सुविधाजनक बनाने के लिए खनन नियमों में बदलाव किया गया है।

इसी प्रकार के सुधार बिजली क्षेत्र में किए जा रहे हैं। हमने, नेपाल और भूटान में लंबित पड़ी परियोजनाओं को वहां की सरकारों के सहयोग से दुबारा शुरू किया है। नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी संभावित स्रोतों का उपयोग करके सभी को सातों दिन चौबीस घंटे बिजली उपलब्‍ध कराने के लिए कदम उठाए गये हैं।

सातवां, भारत को निवेश की दृष्टि से आकर्षक बनाया जा रहा है। 


बीमा और रियल एस्‍टेट में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाई गई है।

रक्षा एवं रेलवे में एफडीआई और निजी निवेश को प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण संबंधी मामलों को तुरंत निपटाने और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम में संशोधन किया गया है। इससे बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को मुआवजा भी सुनिश्चित किया जायेगा।

आठवां, बुनियादी ढांचे को प्रोत्‍साहन दिया जा रहा है। 


रेलवे और सड़कों के निर्माण में व्‍यापक निवेश की योजना बनाई गई है। इनकी संभावनाओं का अधिक लाभ उठाने के लिए नये दृष्टिकोणों और माध्‍यमों को अपनाया जा रहा है।

नौवां, विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए शासन में पारदर्शिता एवं दक्षता और संस्‍थागत सुधार आवश्‍यक हैं। 


व्‍यापार को सुगम बनाने के लिए नियामक ढांचे को सकारात्‍मक बनाने और स्थिर कर प्रणाली को तेजी से अपनाया जा रहा है।

उदाहरण के लिए मैंने अभी हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आश्‍वासन दिया है कि वे ऋण और अपने परिचालन के बारे में सरकार की ओर से बिना किसी हस्‍तक्षेप के अपने व्‍यावसायिक निर्णय लेने में पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र होंगे। और मैंने जब Banks की Meeting में ये कहा कि मैं आपको कहता हूं कि ये Surprise था, मैंने उनसे कहा कि आपको इस काम में कभी PMO से Phone नहीं आएगा और मैं मानता हूं कि इससे बड़ा कोई Confidence level नहीं होगा, और यही है जो Transparency लाते हैं।

हमें सुशासन के लिए तकनीक का उपयोग करने की जरूरत है। चाहे वो बॉयोमीट्रिक आधारित उपस्थिति दर्ज करने जैसा साधारण मसला ही क्‍यों न हो, जिसने कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य संस्‍कृति में सुधार ला दिया है, या मानचित्र तैयार करने और योजनाएं बनाने में अंतरिक्ष टेक्‍नोलॉजी जैसा प्रतिस्‍पर्धी विषय ही क्‍यों न हो।

मैं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कंप्‍यूटरीकृत करने के लिए व्यापक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम शुरू करना चाहता हूं। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से लेकर राशन की दुकानों और उपभोक्‍ताओं तक की पूरी पीडीएस आपूर्ति श्रृंखला को कंप्‍यूटरीकृत किया जायेगा। टेक्नोलॉजी की मदद से कल्‍याणकारी और प्रभावी खाद्य आपूर्ति उपलब्‍ध होगी।

भारत में बदलाव के लिए केवल योजना बनाना ही नहीं, बल्कि प्रमुख संस्थागत सुधार भी जरूरी है। नेशनल इंस्‍टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया-नीति आयोग की स्‍थापना इस दिशा में एक कदम है। यह आयोग, देश को सहकारी संघीयवाद की राह पर आगे बढ़ायेगा; और जब मैं कहता हूँ सहकारी संघीयवाद, एक प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ; देश को प्रतिस्पर्धात्मक सहकारी संघीयवाद कि आवश्यकता है; राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, राज्यों और केंद्र के बीच प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। नीति आयोग, केंद्र और राज्‍यों के बीच विश्‍वास और भागीदारी बढ़ाने का हमारा मंत्र है।

इस सूची का कोई अंत नहीं है। मैं कई दिनों तक इस पर चर्चा कर सकता हूं, लेकिन मैं यह जानता हूं कि हमारे पास इतना समय नहीं है।

हालांकि हम जो कार्य कर रहे हैं उनके बारे में मैंने आपको व्‍यापक जानकारी दी है। हमने अभी तक अनेक कार्य किए हैं। भविष्‍य में और अधिक कार्य करेंगे।

मित्रों,

सुधारों का कोई अंत नहीं है। सुधारों के पीछे ठोस उद्देश्‍य होना चाहिए। यह उद्देश्‍य लोगों के जीवन में बेहतरी लाने वाला होना चाहिए। इस बारे में भले ही अनेक दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन उनका लक्ष्‍य एक ही होना चाहिए।

हो सकता है कि पहली बार में सुधार किसी को नज़र न आये लेकिन छोटे-छोटे कार्य भी सुधार ला सकते हैं। जो कार्य छोटे लगते हैं, वास्‍तव में वे बेहद महत्वपूर्ण और मूलभूत हो सकते हैं।

बड़े और छोटे कार्यों को करने के बारे में कोई विरोधाभास नहीं है।

पहला दृष्टिकोण नई नीतियां, कार्यक्रम, बड़ी परियोजनाएं बनाने और उल्‍लेखनीय परिवर्तन लाने के बारे में है। दूसरा दृष्टिकोण उन छोटी बातों पर ध्‍यान देना है जो जन आंदोलन शुरू करें और इसे व्‍यापक गति प्रदान करें जिससे विकास को नई गति मिले। हमें दोनों ही रास्‍तों पर आगे बढ़ने की जरूरत है।

मैं इसे एक छोटे से उदाहरण से स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा। 20,000 मेगावाट बिजली के उत्‍पादन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यह बेशक महत्‍वपूर्ण है। अगर मैं कल घोषणा करता हूं कि हम 20,000 MW बिजली... तो Times of India की Headline पर आ जाता है! शायद !

हालांकि, बिजली बचाने के जन आंदोलन चलाकर भी 20,000 मेगावाट बिजली बचाई जा सकती है।

इनके अंतिम परिणाम एक जैसे ही हैं। दूसरी उपलब्धि हासिल करना कहीं ज्‍यादा मुश्किल है, लेकिन पहली उपलब्धि की तरह ही बहुत महत्‍वपूर्ण है। इसी प्रकार एक नई यूनिवर्सिटी खोलने के समान ही एक हजार प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति में सुधार लाना भी महत्‍वपूर्ण है।

हम जो नए एम्‍स स्‍थापित कर रहे हैं उनसे हमारे वायदों के अनुरूप ही सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा में सुधार होगा। मेरे लिए स्‍वास्‍थ्‍य सेवा का आश्‍वासन कोई स्‍कीम नहीं है। यह सुनिश्चित करती है कि स्‍वास्‍थ्‍य पर खर्च किया जा रहा एक-एक रुपया सही जगह खर्च हो और हर नागरिक को स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुगम एवं सुलभ हो।

इसी तरह जब हम स्‍वच्‍छ भारत की बात करते हैं, तो इसका व्‍यापक असर पड़ेगा। यह महज नारा नहीं है। यह लोगों का नजरिया बदलने के लिए है। यह हमारी जीवन शैली बदलता है। स्‍वच्‍छता आदत बन जाती है। कूड़े-कचरे के प्रबंधन से आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। यह लाखों स्‍वच्‍छता उद्यमी बना सकती है। राष्‍ट्र को स्‍वच्‍छता से पहचान मिलती है। यकीनन, स्‍वास्‍थ्‍य पर इसका व्‍यापक असर पड़ता है। आखिरकार स्‍वच्‍छता से ही डायरिया और अन्‍य बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

सत्‍याग्रह आजादी का मंत्र था। महात्‍मा गांधी ने….. पूरी आजादी में केंद्र बिंदु रहा था सत्‍याग्रह और आजादी के योद्धा सत्‍याग्रही थे। नए जमाने के भारत का मंत्र स्‍वच्‍छताग्रह होना चाहिए। सत्‍याग्रह की तरह स्‍वच्‍छताग्रह; और इसके योद्धा स्‍वच्‍छताग्रही होंगे; सत्‍याग्रही की तरह स्‍वच्‍छताग्रही। 


पर्यटन को ही लीजिए। यह ऐसी आर्थिक गतिविधि है जिसका पूरा उपयोग अब तक नहीं किया गया है। इसके लिए स्‍वच्‍छ भारत की जरूरत है। बुनियादी ढांचे और दूरसंचार संपर्क में सुधार की आवश्‍यकता है। शिक्षा और कौशल विकास की जरूरत है। इसलिए यह एक साधारण सा लक्ष्‍य ही कई क्षेत्रों में सुधार ला सकता है।

लोगों को क्‍लीन गंगा कार्यक्रम को समझना चाहिए। यह भी एक आर्थिक गतिविधि ही है। गंगा के मैदानी इलाकों में हमारी 40 प्रतिशत आबादी रहती है। इस क्षेत्र में एक सौ से अधिक कस्‍बे और हजारों गांव हैं। गंगा की सफाई से नए बुनियादी ढांचे का विकास होगा, इससे पर्यटन बढ़ेगा, इससे आधुनिक अर्थव्‍यवस्‍था बनेगी और लाखों लोगों की मदद होगी। इसके अलावा इससे पर्यावरण का भी संरक्षण होगा।

रेलवे भी ऐसा ही उदाहरण है। देश में हजारों रेलवे स्‍टेशन हैं जहां हर रोज एक या दो रेलगाडि़यां रुकती हैं। इन सुविधाओं को विकसित करने में पैसा खर्च हुआ है लेकिन बाकी समय इनका इस्‍तेमाल ही नहीं किया जाता। आसपास के गांव के लिए ये स्‍टेशन आर्थिक विकास के केंद्र बन सकते हैं। कौशल विकास के लिए इनका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। हमारे देश के जो छोटे रेलवे स्टेशन हैं , छोटे छोटे गावों के, वहां Optical fiber network भी है और Electricity भी है। उससे दो किलोमीटर गाँव में बिजली नहीं है, क्‍या हम इस रेलवे स्‍टेशन को, क्‍योंकि इन स्‍टेशनों पर एक या दो ट्रेन आती हैं, वहीं पर skill development center खड़े करें, उस बिजली का उपयोग करें, Optical fiber network का उपयोग करें और उसी Infrastructure की multiple Utility हो सकती है या नहीं हो सकती?

यह छोटी ही सही, मगर खूबसूरत शुरुआत होगी। और मैं जब छोटा था तब मैं ये किताब पढ़ता था; छोटा पर खूबसूरत।

कृषि में भी हमारा मुख्‍य लक्ष्‍य उत्‍पादकता बढ़ाना है। इसके लिए प्रौद्योगिकी, भूमि को अधिक उपजाऊ बनाने, और हर बूँद पानी पर ज्यादा फसल.... हर बूँद पानी पर ज्यादा फसल और जब तक हम पानी के महात्मय को नहीं समझेंगे, मैं समझता हूं पूरे हमारे agriculture sector में सफलता से आगे नहीं बढ़ सकते और नवीनतम तकनीक को प्रयोगशाला से भूमि तक लाना। आज कृषि क्षेत्र के वैज्ञानिकों ने बहुत शोध किया, वो सब प्रयोगशाला में पड़ा हैं, जब तक हम Lab to land process पूरा नहीं करते हैं, किसानों को लाभ नहीं होगा। जैसे ही दक्षता बढ़ेगी खेती की लागत घट जाएगी। इससे खेती व्‍यावहारिक बनेगी।

उत्‍पादन के मामले में कृषि से जुड़ी समूची मूल्‍य श्रृंखला को बेहतर भंडारण, परिवहन और खाद्य प्रसंस्‍करण के जरिए सुधारा जाएगा। हम किसानों को वैश्विक मंडियों से जोड़ेंगे। हम भारत का जायका दुनिया तक पहुंचाएंगे।

मित्रों

मैने कई बार कहा है मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस। यह कोई नारा नहीं है। यह भारत के बदलाव का महत्‍वपूर्ण सिद्धांत है।

सरकारी तंत्र की दो मूलभूत समस्‍याएं हैं - वे जटिल भी हैं और शिथिल भी।

जीवन में लोग मोक्ष के लिए चार धाम की यात्रा करते हैं। सरकार में एक फाइल 36 धाम जाती है और उसे फिर भी मोक्ष नहीं मिलता।

हमें इसे बदलने की जरूरत है। हमारे व्यवस्था को पैना, कारगर, तेज तथा लचीला होना चाहिए। इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उनमें नागरिकों का भरोसा बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए नीति निर्देशित राष्‍ट्र की जरूरत है।

मैक्सिमम गवर्नेंस, मिनिमम गवर्नमेंट क्‍या है? इसका मतलब है कि सरकार का काम व्‍यवसाय करना नहीं है। अर्थव्‍यवस्‍था के ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां निजी क्षेत्र बेहतर काम करेगा और बेहतर परिणाम देगा। उदारवाद के 20 वर्षों में हमने कमांड और नियंत्रण का नजरिया नहीं बदला है। हम सोचते हैं कि कंपनियों के कामकाज में सरकार का दखल ठीक है। इसे बदलना चाहिए, लेकिन इसका मतलब अराजकता लाना नहीं है।

पहले, सरकार को उन बातों पर ध्‍यान देना चाहिए जिनकी राष्‍ट्र को जरूरत है। दूसरे, सरकार में दक्षता हासिल करने की आवश्‍यकता है ताकि राष्‍ट्र ने जो लक्ष्‍य निर्धारित किया है उसे हासिल किया जा सके।

हमें राष्‍ट्र की जरूरत क्‍यों पड़ती है ? इसके पांच मुख्‍य घटक हैं -

• पहला, सार्वजनिक सेवाएं जैसे रक्षा, पुलिस और न्‍यायपालिका
• दूसरा, बाहरी घटक- जो दूसरों को प्रभावित करते हैं जैसे प्रदूषण। इसके लिए हमें नियामक व्‍यवस्‍था की जरूरत है।
• तीसरा, बाजार की शक्ति- जहां एकाधिकार के लिए नियंत्रण की जरूरत होती है।
• चौथा, सूचना में अंतर जहां किसी को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होती है कि औ‍षधियां असली हैं इत्‍यादि।
• पांचवां, हमें यह सुनिश्चित करना है कि कल्‍याण और सब्सिडी व्‍यवस्‍था से समाज का निचला तबका भी वंचित न रहे। इसमें खासतौर से शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल शामिल है।

ये ऐसे पाँच क्षेत्र हैं जहां हमें सरकार की जरूरत होती है।



इन पांच क्षेत्रों में हमें सक्षम, प्रभावी और ईमानदार सरकार की जरूरत होती है। सरकार में हमें निरंतर ये सवाल पूछने चाहिए- मैं कितना पैसा खर्च कर रहा हूं और बदले में उससे क्‍या प्राप्‍त कर रहा हूं ? इसके लिए सरकारी एजेंसियों को दक्ष बनाने के लिए सुधार लाना होगा। इसलिए हमें कुछ कानूनों को फिर से बनाने की जरूरत होगी। कानून सरकार का डीएनए है। उन्‍हें समय-समय पर नया रूप देते रहना चाहिए।

भारत आज दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था है। क्‍या हम भारत को बीस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का सपना नहीं देख सकते ?

क्‍या हमें यह सपना साकार करने के लिए माहौल नहीं बनाना चाहिए ? हम इसके लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। यह कठिन कार्य है। मैं ये अच्छी तरह से जनता हूँ। अर्थव्‍यवस्‍था को तेज विकास के रास्‍ते पर लाने के लिए तुरंत और आसान सुधार काफी नहीं होंगे। यह हमारी चुनौती है और यही हासिल करना हमारा उद्देश्‍य है।

डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं।

डिजिटल इंडिया सरकारी पद्धतियों में सुधार लाएगा, बर्बादी को दूर करेगा, नागरिकों तक पहुंच बढ़ाएगा और उन्‍हें सशक्‍त बनाएगा। इससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी जो ज्ञान आधारित होगी। हर गांव में ब्रॉडबैंड के साथ व्‍यापक ऑनलाइन सेवाओं से भारत को इस हद तक बदला जा सकेगा जिसकी हम कल्‍पना भी नहीं कर सकते।

स्किल इंडिया भारत की युवा आबादी की क्षमताओं से लाभ उठाएगा जिसकी आजकल हर कोई चर्चा कर रहा है।

मित्रों

शासन में सुधार लगातार चलती रहने वाली प्रक्रिया है। जहां अधिनियम, नियम और प्रक्रियाएं जरूरतों के अनुकूल नहीं है हम उनमें बदलाव कर रहे हैं। हम कई तरह की मंजूरियों को कम कर रहे है क्‍योंकि वे निवेश की राह रोकती है। हमारी जटिल कर व्‍यवस्‍था सुधार की बाट जोह रही है जिसमें सुधार की प्रक्रिया हमने शुरू कर दी है। मैं स्‍पीड में विश्‍वास करता हूं। मैं तेजी से बदलाव को बढ़ावा दूंगा। आने वाले समय में आप इसकी सराहना करेंगे।

इसके साथ ही हमें गरीबों, वंचितों और पीछे छूट गए समाज के तबकों पर ध्‍यान देने की जरूरत है।

मुझे विश्‍वास है कि उनके लिए सब्सिडी की आवश्‍यकता है। मैं दोहराता हूँ सब्सिडी की आवश्‍यकता है। हमें जरूरत है सब्सिडी देने के लक्ष्‍य पर आधारित व्‍यवस्‍था की। हमें सब्सिडी में हेरा-फेरी को रोकने की जरूरत है सब्सिडी को नहीं। मैं पहले भी कह चुका हूं कि सब्सिडी में बर्बादी दूर की जानी चाहिए। लक्षित समूह स्‍पष्‍ट रूप से परिभाषित होने चाहिए और सब्सिडी उन तक अच्‍छी तरह पहुंचनी चाहिए। सब्सिडी का अंतिम लक्ष्‍य गरीबों को सशक्‍त बनाना और गरीबी के दुष्‍चक्र को तोड़ना एवं गरीबी से जंग में उन्‍हें भागीदार बनाना हैं। मैं उस रास्‍ते पर जाना चाहता हूं जहां गरीब स्‍वयं भी गरीबी के खिताफ लड़ाई लड़ने के लिए सजग हो, उसके हम वो शस्‍त्र दें, वो अवसर दें ताकि वो भी गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाला हमारा एक मजबूत soldier बन जाए और तभी हम गरीबी से मुक्ति पाएंगे।

इस बारे में मैं यह भी कहना चाहता हूं कि विकास का परिणाम, रोजगार होना चाहिए। सुधार, आर्थिक वृद्धि, प्रगति - यह सब खोखली बातें हैं यदि इनसे रोजगार पैदा न हों।

हमें न सिर्फ अधिक उत्‍पादन की, बल्कि जनता के लिए और जनता द्वारा उत्‍पादन की जरूरत है।

मित्रों

आर्थिक विकास खुद-ब-खुद देश को आगे नहीं ले जा सकता।

विकास के बहुत से आयाम है एक तरफ हमें अधिक आय की जरूरत है। तो दूसरी तरफ हमें समावेशी समाज की भी आवश्‍यकता है जो आधुनिक अर्थव्‍यवस्‍था के दबाव और तनाव को सं‍तुलित रखता है।

इतिहास राष्‍ट्रों के उत्‍थान और पतन का गवाह है। आज भी, कई देश आर्थिक मामले में समृद्ध हो चुके हैं लेकिन सामाजिक रूप से गरीब है। उनकी पारिवारिक प्रणाली, जीवन मूल्‍य, सामाजिक तानाबाना और उनके समाज में मौजूद अन्‍य विशेषताएं छिन्‍न-भिन्‍न हो चुकी है।

हमें उस पथ पर नहीं जाना चाहिए। हमें ऐसे समाज और अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरत है जो एक-दूसरे के पूरक हों। राष्‍ट्र को आगे ले जाने का सिर्फ यही एकमात्र रास्‍ता है।

ऐसा लगता है कि विकास सिर्फ सरकार का एजेंडा बन चुका है। लोगों को लगता है विकास तो सरकारी काम है, सरकार का एजेंडा है, इस मनोस्थिति को हमें बदलना होगा। इसे स्‍कीम के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।

विकास हर किसी का एजेंडा होना चाहिए। यह जन आंदोलन होना चाहिए।

मित्रों, बा‍की दुनिया की तरह, हम भी दो खतरों- आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन के बारे में चिंतित है। हम सब मिलकर इनसे निपटने का रास्‍ता ढूंढ लेंगे।

आज प्रेरणा और आर्थिक वृद्धि के लिए हर कोई एशिया की तरफ देख रहा है और एशिया में भारत महत्‍वपूर्ण है। न सिर्फ अपने आकार बल्कि लोकतंत्र और जीवन मूल्‍यों के लिए। भारत का मुख्‍य जीवन दर्शन सर्वे मंगल मांगल्‍यम् और सर्वे भवंतु सुखिन: है। इसमें विश्‍व कल्‍याण, विश्‍व सहयोग और संतुलित जीवन की बात कही गई है।

भारत बाकी दुनिया के लिए आर्थिक वृद्धि और समावेश का आदर्श बन सकता है।

इसके लिए हमें ऐसी श्रम शक्ति और अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरत है जो वैश्विक जरूरतें और आकांक्षाए पूरी करती हों।

हमें सामाजिक सूचकों में तेजी से सुधार लाने की जरूरत है। भारत को अब अल्‍पविकसित देशों की श्रेणी में नहीं रहना चाहिए। और हम ऐसा कर सकते है।

स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था ''उठो, जागो और जब तक लक्ष्‍य हासिल नहीं हो जाता रुको मत''। नए जमाने के भारत का सपना साकार करने के लिए हम सबको इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

हम सब मिलकर ऐसा कर सकते हैं।

बहुत बहुत धन्यवाद।

Source:
http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=33261




Saturday, June 7, 2014

Dr. K. B. Hedgewar to Narendra Modi - A Milestone in the Dream of Hedgewar and Friends



Hedgewar was influenced by Hindu Mahasabha.

He questioned why India, the land Hindus came under foreign rule and rule of other religion people. He wanted to organize Hindus as a united group of people willing to fight for their nation state. He started Rashtriya Swayam Sevak Sangh in 1925 with a small group of his friends.  The movement started by him is today a big national organization that in turn was responsible for large number of organizations working in different walks of like including education, agriculture, social service, history, trade unionism, and politics. Bharatiya Janata Party was formed when in Janata Party there was a problem regarding membership of RSS by party members who were earlier with Bharatiya Janasangh.

Narendra Modi, in 2014 Lok Sabha elections led BJP to a simple majority in Lok Sabha and thus for the first time in India, an opposition party which has no connection whatsoever with Indian National Congress came to power. A milestone is reached in the dream of Hedgewar as the organization started by him has the political power to support its activity and movement to unite Indians across the country into intense Nation loving people.

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