Showing posts with label India National Day. Show all posts
Showing posts with label India National Day. Show all posts

Sunday, April 5, 2015

India - National Maritime Week in Hindi - मर्चेंट नेवी सप्ताह

30 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में मर्चेंट नेवी सप्ताह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास को याद करते हुए भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहला बंदरगाह लोथल में स्थापित किया गया था।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने वर्ष 1890 के आसपास एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें एक नहर प्रणाली के माध्यम से 100 किमी दूर समुद्र को जोड़ने के लिए एक जलमार्ग का निर्माण किया जाना था। भारत में जहाज निर्माण की ऐतिहासिक परंपरा के बारे में बात करते हुए उन्होंने देश में नौवहन और बंदरगाह उद्योग के चौतरफा, मजबूत और समेकित विकास पर जोर दिया।

1964 के बाद से, ‘मर्चेंट नेवी सप्ताह’ का समापन प्रतिवर्ष 5 अप्रैल को होता है। हर वर्ष 5 अप्रैल को भारतीय समुद्री क्षेत्र की उपलब्धियों को मनाते हुए मुंबई से लंदन तक पहले इंडियन फ्लैग मर्चेंट वेसल, ‘एस एस लॉयल्टी’ के प्रथम नौकायन के स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पोत से अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भारत के आगमन की शुरुआत हुई।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस समारोह पूरे देश के विभिन्न शहरों के बंदरगाह में आयोजित किया जाएगा। एक पुष्पांजलि अर्पित की रस्म प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में गहरे समुद्र में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए जिन बहादुर नौसेना अधिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नाविक स्मारक में पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया जाएगा। ‘मेक इन इंडिया – समुद्री क्षेत्र के लिए एक अवसर’ विषय पर एक संगोष्ठी भी मुंबई में और राज्य स्तरों पर आयोजित की जाएगी। 5 अप्रैल को मुख्य समारोह के दौरान विभिन्न नौवहन क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘वरुण पुरस्कार’, उत्कृष्टता पुरस्कार, वीरता पुरस्कार भी दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री को कई योजनाओं और इससे संबंधित मामलों पर जानकारी दी गई।

भारतीय मर्चेंट नेवी कैडेट / प्रशिक्षुओं के लिए ऑन-बोर्ड नौका प्रशिक्षण हेतु वित्तीय सहायता योजना
भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के 2000 कैडेट और इसके संबद्ध बैच, जिन्होंने वर्ष 2010, 2011 और 2012 में अपने ऑन-शोर (on-shore) कक्षा प्रशिक्षण पूरा कर लिया है लेकिन भारतीय फ्लैगशिपमें प्रशिक्षण सीट की अनुपलब्धता के कारण ऑन-बोर्ड नौका प्रशिक्षण नहीं ले पाये हैं, उन्हें इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत उन्हें प्रशिक्षण लागत का 30% या तीन लाख रुपये, जो भी कम हो, की अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना कैडेट की सभी श्रेणियों के लिए उपलब्ध होगी। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों से संबंधित कैडेट 70% (प्रशिक्षण की शेष लागत) ऋण संबंधित सामाजिक क्षेत्र के मंत्रालयों के वित्त और विकास निगमों के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।

तटीय नौवहन के लिए मॉडल शिफ्ट प्रोत्साहन योजना
यह योजना वर्तमान (12 वीं) पंचवर्षीय योजना के 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च 2017 तक चलेगी जिसका उद्देश्य मौजूदा परिवहन मोड, जैसे – सड़क और रेल से तटीय परिवहन और अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन से घरेलू नौभार (कार्गो) परिवहन के मोडल शिफ्ट को प्रोत्साहित करना है। प्रोत्साहन निम्नलिखित हैं :
   I.     सात वस्तुओं, उर्वरक, खाद्यान्न, पत्थर, टाइल्स, चीनी, खाद्य नमक और अधिक आयामी कार्गो से संबंधित बल्क या ब्रेक-बल्क कार्गो की ढुलाई पर 1 रूपया प्रति टन समुद्री मील अधिकतम 1500 समुद्री मील तक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  II.     फुल कंटेनर लोड (एफसीएल) में कंटेनर में किसी भी वस्तु की ढुलाई के लिए 3000/- रुपये प्रति टीइयू प्रोत्साहन दिया जाएगा।
आरओ-आरओ पोत के माध्यम से वाहनों की ढुलाई के लिए निम्नलिखित प्रोत्साहन दिये जाएंगे : 300/- रुपये प्रति दोपहिया वाहन;  600/- रुपये प्रति तीन पहिया वाहन; और अन्य वाहनों के लिए प्रति वाहन 3000/- रुपये।

भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय ने गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों और लंबे समुद्री आवागमन और समुद्री परंपरा से समृद्ध अन्य तटीय बंदरगाह वाले शहरों में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव दिया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी में एक परिसर स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। विश्वविद्यालय का समुद्री क्षेत्र में कुशल मानव शक्ति बनाने का प्रस्ताव है क्योंकि यहाँ जबर्दस्त रोजगार क्षमता उपलब्ध है। इसमें एक उपकुल‍पति को भी नियुक्त करने का प्रस्ताव है जो भारत के पश्चिमी तट पर स्थित विश्वविद्यालय के परिसरों पर विशेष ध्यान देंगे और अगर जरुरत हुई तो इसके लिए पर्याप्त बजटीय सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

सागरमाला परियोजना

“सागरमाला परियोजना” की शुरुआत भारत के समुद्र तट के साथ बड़े बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और इसके तेजी से विस्तार तथा मौजूदा और भविष्य के परिवहन आस्तियों का उचित उपयोग करते हुए अंतर्देशीय और तटीय नेविगेशन के विकास के उद्देश्य से शुरू की गई है। मंत्रालय ने वर्ष 2015-16 के लिए 692 करोड़ रुपए का अनुरोध किया जिसमें से 200 करोड़ रुपये अगले वित्त वर्ष के दौरान आवंटित किया गया है। कैबिनेट ने पहले से ही परियोजना को मंजूरी दे दी है।
विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार से संबंधित छूट (cabotage restriction)
 नौवहन मंत्रालय मर्चेंट शिपिंग अधिनियम,1958 के अनुभाग 407  के तहत विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में निम्नलिखित विशेषताओं के साथ छूट देने पर विचार कर रहा है :

a)  आरओ-आरओ / हाइब्रिड आरओ-आरओ / आरओ-पैक्स / प्योर कार वाहक / प्योर कार और ट्रक वाहक आदि विशेष जहाजों, जिनकी भारत में कम आपूर्ति है, यात्रियों को ले जाने वाले किसी भी प्रकार के जहाजों के लिए (जैसे – नौका), प्रोजेक्ट कार्गो या अति आयामी कार्गो (ओडीसी) के लिए अधिसूचना की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में छूट।

b)  पूर्वी तट पर स्थित भारत के सभी बंदरगाहों के लिए एक्जिम कंटेनरीकृत कार्गो और खाली डिब्बे लाने एवं ले जाने के लिए विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में छूट।

अंतर्देशीय जल परिवहन :
अंतर्देशीय जल परिवहन की नई योजनाएं शुरू की गईं हैं जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं :
जल मार्ग विकास परियोजना : इस परियोजना की घोषणा वर्ष 2014-15 के बजट भाषण में की गई थी जिसका उद्देश्य ओपन रिवर नेविगेशन तकनीक और हार्डवेयर के साथ-साथ ड्रेजिंग, आधुनिक नदी सूचना प्रणाली, डिजिटल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रात्रि नौचालन सुविधा, टर्मिनल सुविधा और चैनल मार्किंग के आधुनिक तरीकों को मजबूत बनाना है। परियोजना के पूरा होने से 1500 से 2000 डीडब्ल्यूटी जहाज चलाने के लिए 3.0 मीटर का न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) बनेगी ताकि कम से कम हल्दिया और इलाहाबाद के बीच व्यावसायिक नौचालन हो सके। 4200 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना विश्व बैंक की वित्तीय मदद से लागू की जा रही है।

नए प्रमुख बंदरगाह
सरकार ने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के क्रमशः दुर्गाराजपतनम और सागर में एक नए प्रमुख बंदरगाह की स्थापना करने का निर्णय लिया है। दोनों बंदरगाहों की स्थापना से संबंधित परियोजनाएं पीपीपी मोड में विकसित की जाएंगी जिसे पहले ही मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल गई थी।

पोर्ट कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन
मंत्रिमंडल ने प्रमुख बंदरगाह में कुशल निकासी प्रणाली पर ध्यान देने और कनेक्टिविटी में सुधार करने के लिए विशेष उद्देश्य हेतु वाहन (एसपीवी) बनाने के लिए नौवहन मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एसपीवी निम्नलिखित परियोजनाओं को शुरू करेगा :

प्रमुख बंदरगाहों के लिए प्रत्येक स्तर पर कनेक्टिविटी
बंदरगाहों में निकासी अवसंरचना का आधुनिकीकरण
आंतरिक बंदरगाह रेलवे प्रणाली का प्रबंधन और संचालन
बंदरगाह संबंधित रेलवे परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना
राष्‍ट्रीय समुद्री दिवस पर नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी के नेतृत्‍व में आज समुद्री क्षेत्र के एक शिष्‍टमंडल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की।

इस अवसर पर श्री गडकरी ने प्रधानमंत्री को फ्लैग लगाया।

इस दौरान बातचीत में प्रधानमंत्री ने इस तथ्‍य को रेखांकित किया कि भारत की समुद्री विरासत लगभग पांच हजार साल पुरानी है। देश में सबसे पुराने बंदरगाह के तौर पर लोथल का जिक्र आता है। उन्‍होंने समुद्री क्षेत्र के सभी पक्षों से मिलकर देश में एक विश्‍व स्‍तरीय समुद्री संग्रहालय बनाने के लिए काम करने की अपील की ताकि भारत की शानदार समुद्री विरासत से दुनिया परिचित हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में समुद्री जहाजों के निर्माण की जबर्दस्त क्षमता है। मेक इन इंडिया पहल के तहत इस क्षमता का उपयोग जरूरी है।
श्री नितिन गडकरी ने इस मौके पर प्रधानमंत्री को नौवहन क्षेत्र में कौशल विकास की योजनाओं की जानकारी दी।

http://www.narendramodi.in/hi/prime-minister-inaugurates-merchant-navy-week-2015/

Monday, March 23, 2015

PM Narendra Modi's Homage Speech at National Martyrs Memorial in Hussainiwala - 23 March 2015 - Hindi






प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 23 मार्च, 2015 को फिरोजपुर, पंजाब में हुसैनीवाला स्थित राष्‍ट्रीय शहीद स्‍मारक में लोगों को संबोधित करते हुए।
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the people at National Martyrs Memorial, at Hussainiwala, in Firozpur, Punjab on March 23, 2015.
Pic Source: http://pib.nic.in/photo//2015/Mar/l2015032363418.jpg



विशाल संख्‍या में पधारे हुए सभी प्‍यारे भाईयों और बहनों और विशेष रूप से महाराष्‍ट्र से आये मित्रों को भी नमस्कार,

बोले सो निहाल..सत् श्री अकाल! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो!

आज मेरे लिए बड़ी प्रेरक घड़ी है। एक नई प्रेरणा जिनका नाम कानों पर पड़ते ही देश के हर नागरिक को मिलती है ऐसे सरदार भगत सिंह जी, सुखदेव, राजगुरू, बटूकेश्‍वर दत्‍त और भगत‍ सिंह जी की माता जी, जिस धरती पर एक वीर माता के साथ भारत माँ के प्‍यारे लाड़ले चार वीरों की समाधि को नमन करने का मुझे अवसर प्राप्‍त हुआ है। यह पंजाब की धरती की विशेषता है। इस धरती ने, आजादी के जंग में सबसे ज्‍यादा बलिदान दिया है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर मोर्चा संभालते हुए अनेक वीर जवानों ने शहादत दी है।..और देश को आगे बढ़ाने के लिए यहां के किसानों ने अपना पसीना बहाकर के देश के अन्‍न भंडार भर दिये। यह ऐसी धरती है, जहां आजादी के पहले भी यहां के लोग देश के लिए जिए और आजादी के बाद भी देश के लिए जी रहे हैं। मैं इस धरती को, यहां के सभी वीरों को, यहां के सभी वीर माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

अंग्रेजों ने.. उनको भगत सिंह का भय कितना रहता था.. तय तो यह हुआ था कि 24 मार्च को भगत सिंह जी को फांसी दे दी जाएगी। लेकिन घबराई हुई अंग्रेजी सल्‍तनत ने सारे नियमों का उल्‍लंघन करते हुए, सारी परंपराओं को तोड़ते हुए, चोरी छिपे से सरदार भगत सिंह जी को फांसी दी। और इतना ही नहीं, वो शरीर उनके परिवारजनों को देने की बजाय लाहौर जेल से लाकर के यहां पर किसी भी सम्‍मान के बिना मिट्टी के तेल में और अगल-बगल से कूड़ा कचरा इकट्ठा करके उनके शरीर को जला देने का काम उस सल्‍तनत ने किया। यही धरती है, यहां पर उनका शरीर विलीन हो गया। मैं आज भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू.. उन वीरों की उस महान परंपरा को प्रणाम करने आया हूं।

भाईयों-बहनों आज हिंदुस्‍तान में किसी एक नाम को सुनते ही हिंदुस्‍तान के हर कोने में जवान, वृद्ध सबको चेतना जग जाती है, प्रेरणा मिल जाती है, वो नाम है सरदार भगत सिंह। उस नाम में वो ताकत है, जो आज भी देश के नौजवानों को देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा देता है। ऐसे महापुरूषों ने बलिदान दिया, तब जाकर के देश आजाद हुआ। उनके सपनों को पूरा करना.. और उन सपनों को पूरा करने के लिए जैसा भारत उन्‍होंने चाहा था वैसा भारत बनाने के लिए हम जितना करे उतना कम है।

हमारा गांव आबाद हो, हमारा किसान खुशहाल हो, हमारे नौजवान को रोजगार हो, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, गांव, गरीब, शहर के मजदूर, उनके जीवन में बदलाव आए। जब तक हम देश में यह बदलाव नहीं लाते हैं, तब तक देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी।

भाईयों-बहनों हमारा सपना भी है, हमारा कर्तव्‍य भी है कि हम इस भारत मां को सुजलाम, सुफलाम बनाए। यह भारत मां, यहां के नौजवान अपनी आशा-आकांक्षा के अनुरूप जीवन में नई ऊंचाईयों को पार कर सके, हरेक को अवसर मिले विकास का, ऐसे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास, हम सबका दायित्‍व बनता है। तब जाकर के इन महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी।

हमने सपना देखा है – 2022! जब भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमारे देश में 75 साल एक अमृत पर्व होता है। इस अमृत पर्व का विशेष महत्‍व होता है। क्‍या हम 2022 में जब अमृत पर्व मनाएं तब इस देश में कोई भी परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो।

भाईयों-बहनों आज भगत सिंह जी की समाधि पर मैं आया हूं। उस महापुरूष के बलिदान को याद करता हूं और मन करता है जी-जान से जुट जाएं देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी.. जब आजादी का अमृत पर्व मनाएं तब उसका अपना घर मिल जाए। 2019! महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरे होंगे। महात्‍मा गांधी के 150 साल कैसे मनाएं? क्‍या हमारे देश के महापुरूषों को हम स्‍वच्‍छ भारत नजराने के रूप में नहीं दे सकते? क्‍या यह भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों की जिम्‍मेवारी नहीं है कि हमारी भारत माता जिसके लिए इतने लोगों ने बलिदान दिये उसे हम स्‍वच्‍छ तो रखे, साफ-सुथरी रखें इस दायित्‍व को हम निभाएं और स्‍वच्‍छ भारत का सपना महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरा होने के अवसर पर हम पूरा करें। हर गांव, हर गली, हर गली, हर परिवार, हर कोई अपने दायित्‍व को निभाएं।

और आज 23 मार्च ! राम मनोहर लोहिया जी का भी जन्‍म जयंती का अवसर है। राम मनोहर लोहिया जी एक ऐसे राजपुरूष थे, जब वो राजनीतिक आंदोलन चलाते थे, तो अपनी विचारधारा के साथ-साथ एक बात का ख्‍याल रखते थे। वे स्‍वच्‍छता का आंदोलन अपनी जवानी में चलाए करते थे। राम मनोहर लोहिया स्‍वच्‍छता का आंदोलन लगातार चलाया करते थे। आज उनकी भी जयंती है, भगत सिंह की शहादत का पर्व है और भारत माता के लिए जीने वाले इन लोगों को जब याद करते हैं तब हमारी भारत माता स्‍वच्‍छ हो, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने वाला हर नागरिक को अवसर हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरे किसान भाईयों-बहनों पंजाब ने देश को भूख से बचाया है। देश को अन्‍न देने का पुण्‍य का काम पंजाब के किसान ने किया है लेकिन आज पंजाब में पानी जमीन में गहरा होता जा रहा है। Danger रेखा से भी नीचे चला गया है। पानी परमात्‍मा का दिया हुआ प्रसाद है। पानी को बचाए बिना, हम न खेती बचा सकते हैं, न जीवन बचा सकते हैं और इसलिए मैं पंजाब के किसान भाईयो-बहनों से आग्रह करूंगा कि हम फसल पैदा करे, आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करें। Per drop more crop, micro irrigation, टपक सिंचाई हो, स्प्रिंक्‍लर हो। बहुत सारी चींजें आज विज्ञान ने स्‍वीकार की है। कभी-कभी जब तक हमारा किसान, खेत पानी से लबालब भरा न हो तब तक उसकी आंखों को चैन नहीं पड़ता। उसको लगता है कि पूरा खेत पानी से पूरी तरह भरा होगा, तभी फसल होगी।

मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं भी गरीब परिवार का.. मैंने इन सारी चीजों को निकट से देखा है और इसलिए मैं आपको कहता हूं कि विज्ञान बदल चुका है और इसलिए मैं आपको एक छोटी सी बात बताऊं। अगर कोई बालक घर में बीमार रहता है, वजन नहीं बढ़ता है, चेहरे पर मुस्‍कान नजर नहीं आती है, दुबला-पतला रहता है और मां-बाप की इच्‍छा रहती है कि बेटा तंदरूस्‍त हो, वजन बढ़े, दौड़े-कूदे। मां-बाप ऐसे में बादाम, केसर, पिस्‍ता यह डालकर के बाल्‍टी भर दूध रोज, बाल्‍टी भर दूध से उस बच्‍चे को अगर नहला दें तो वजन बढ़ेगा क्‍या? चेहरे पर मुस्‍कान आएगी क्‍या? तबियत ठीक होगी क्‍या? आप भी जानते हैं नहीं होगी। केसर, पिस्‍ता, बादाम वाला दूध हो, बाल्‍टी भर दूध हो, रोज दूध से नहलाते हो, लेकिन उसके शरीर में कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां-बाप चम्‍मच से, एक चम्‍मच दूध पिलाएंगे, रोज 10 चम्‍मच, 15 चम्‍मच, 20 चम्‍मच पिलाना शुरू कर देंगे, तो बच्‍चे का वजन बढ़ने लगेगा। शरीर तंदरूस्‍त होगा। जो स्‍वभाव बच्‍चे का होता है, वही स्‍वभाव फसल का होता है और इसलिए फसल को ढेर सारा पानी देने से फसल अच्‍छी होती है, ऐसे पुराने विचारों को छोड़ना पड़ेगा। बूंद-बूंद पानी पिलाना से फसल ज्‍यादा होगी, अच्‍छी होगी, कम जमीन में भी ज्‍यादा पैदावार होगी और तब जाकर के पंजाब में जो पानी नीचे चला जा रहा है, वो पानी ऊपर आएगा। मेरे भाईयों बहनों बरसात का पानी, बूंद-बूंद पानी बचाएंगे, जमीन में उसको वापस डालेंगे, तभी जाकर के पंजाब की पानी की समस्‍या का समाधान कर पाएंगे।

हमारे पास नहरों का इतना बड़ा नेटवर्क है, लेकिन जितनी मात्रा में पानी जाना चाहिए उतना जा नहीं रहा है। शुरू के इलाके में तो पानी पहुंचता है लेकिन नहर का जहां आखिरी इलाका है, वहां पानी नहीं पहुंचता। हमने एक योजना बनाई है-‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’। इस योजना के तहत हमारा सपना है कि हिंदुस्‍तान के हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाए, नदियों को जोड़ा जाए, नहरों को ठीक किया जाए, नई नहरों को बनाया जाए। अगर किसान को पानी पहुंच गया तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत मेरे किसान भाईयों-बहनों में हैं और वो हिंदुस्‍तान के आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उस काम की और हमें जाना है।

मुझे आज मेरे किसान भाईयों-बहनों को मेरी एक चिंता भी मुझे बतानी है और वो चिंता.. मैं देख रहा हूं कि ज्‍यादा फसल के मोह में आज हम ऐसी-ऐसी गलतियां कर रहे हैं कि जिसके कारण हमारी जमीन बर्बाद हो गई है। जमीन अपनी ताकत खो रही है। अगर धरती माता अपनी ताकत खो देगी तो इस धरती पर पलने वाले बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा। हम जिस प्रकार से Chemical Fertilizer का उपयोग करते हैं.. पंजाब का क्‍या हाल करके रखा है किसान भाईयों-बहनों हमने! कितनी मात्रा में, कौन सा खाद डालना चाहिए.. हम कैसी बड़ी गलती कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, विज्ञान में सिद्ध हुआ है कि जितना पोटाश का उपयोग करते हैं उससे चार गुना से ज्‍यादा नाइट्रोजन का उपयोग फसल भी बर्बाद करता है, जमीन भी बर्बाद करता है। चार गुना से कम नाइट्रोजन उपयोग करना चाहिए लेकिन हमारे पंजाब में कितना उपयोग होता है, आपको मालूम है? 57 गुना! आप कल्‍पना कर सकते हैं जैसे परिवार में दवाई देनी है, लेकिन ज्‍यादा dose दे दें तो मौत भी हो जाती है वैसे नाइट्रोजन इतना गुना डालने के कारण हमारी फसल और हमारी जमीन सबको हम बर्बाद कर देते हैं। मैं पंजाब के किसानों से आग्रह करता हूं कि आप देश को दिशा दीजिए, आप देश का नेतृत्‍व कीजिए और तय कीजिए कि जितने अनुपात में Fertilizer चाहिए उससे ज्‍यादा डालने का पाप हम नहीं करेंगे, हम ऐसी गलती नहीं करेंगे। इतना ही नहीं पोटाश से फास्‍फोरस डब्‍बल से ज्‍यादा उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाती है। लेकिन हम क्‍या करते हैं, पंजाब के अंदर पोटास से फास्‍फोरस का उपयोग 13 गुना करते हैं। जबकि दो गुना से ज्‍यादा नहीं करना चाहिए। मुझे बताइये मेरे किसान बहनों-भाईयों कि पंजाब, पंजाब का गांव, पंजाब का किसान, पंजाब की फसल जिस पर पूरा हिंदुस्‍तान जी रहा है अगर वही बर्बाद हो जाएगा तो पूरा देश भूख मर जाएगा और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि आप विज्ञान, आधुनिक यंत्र.. और जिसमें सरकार पूरी मदद करती है.. आप इसका सही उपयोग करें। इसका दुरूपयोग तत्‍काल तो हमें अच्‍छा लगता है, लेकिन लम्‍बे समय के लिए हमारा बहुत नुकसान करता है और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों इससे बचकर रहना चाहिए यह मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहता हूं।

सरकार ने किसानों के लिए एक महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है। इस योजना को हमने लागू किया है और आप तक हम पहुंचाना चाहते हैं और वो है – Soil Health Card. जैसे नागरिक का Health Card होता है, उसका शरीर कैसा, Blood कैसा, तबियत कैसी है, कमियां क्‍या है, वो सब Health Card से पता चलता है। वैसा ही जैसे इंसान के शरीर का स्‍वभाव है, वैसा ही जमीन का भी स्‍वभाव है। जमीन को भी बीमारियां होती है, जमीन में भी कमियां होती हैं लेकिन हमें पता नहीं होता और उसके कारण हम.. जमीन का किसके लिए उपयोग करना चाहिए, नहीं कर पाते। इस बात को समझाने के लिए गांव-गांव किसानों को Soil Health Card देने की सरकार ने योजना बनाई है। आपकी जमीन कैसी है, आपकी जमीन की तबियत कैसी है, आपकी जमीन में कौन सी कमियां है, आपकी जमीन में कौन सी फसल अच्‍छी हो सकती है, आपको अगर दवाई डालनी है तो कौन सी दवाई की जरूरत है, आपको अगर Fertilizer डालना है तो कौन सा Fertilizer डालना है, कितना डालना है यह सारी बातें Soil Health Card से पता चलती हैं और यदि किसान Soil Health Card से योजना करके चलता है तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे किसान बहनों-भाईयों छोटे किसान को भी साल का 40-50 रुपया, जो ज्ञान के अभाव के रूप में फालतू में खर्चा होता है, वो बच जाएगा। मेरे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। इसलिए यह बहुत बडा काम पूरे देश में हमने चलाया है Soil Health Card का। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे पंजाब के किसान भी इस बात की चिंता करेंगे।

मेरे किसान भाईयों बहनों एक तो पिछले साल बारिश कम हुई। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों में कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान हुआ, कहीं पर सूखा पड़ा गया और ऊपर से अभी-अभी ओले गिरे। मैं जानता हूं कि किसानों पर कितनी बड़ी आपत्ति आई होगी। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों को, मंत्रियों को आदेश दिए हैं, सर्वे का काम शुरू हुआ है, राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर के आपके इस संकट की घड़ी में आपके साथ हैं। आपको जो नुकसान हुआ है.. हमारा किसान टिक सके.. जितनी भी मदद सरकार कर सकती है उसमें सरकार किसी भी हालत में पीछे नहीं रहेगी। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

मेरे भाईयों-बहनों आज जब मैं सरदार भगत सिंह जी की शाहदत के इस पावन पर्व पर, इस पवित्र धरती पर आया हूं, तब मैं.. सरकार ने बजट में घोषणा की है.. क्‍योंकि पंजाब और किसान का अटूट नाता है और इसलिए अमृतसर में किसानों के लिए उपयोगी हो ऐसी Institute for Horticulture Education इसका आरंभ किया जाएगा और आज मैं जब यहां आया हूं तब इस नये Institute को हम सरदार भगत सिंह Post Graduate Institute for Horticulture Research and Education इस रूप में निर्माण करेंगे ताकि पंजाब किसान की जो नई पीढ़ी है उसके कारण उसको लाभ मिलेगा।

भाईयों बहनों भारत सरकार की यह सोच है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। अगर हमारे राज्‍य मजबूत नहीं होंगे तो देश मजबूत नहीं होगा। अगर राज्‍य आगे नहीं बढ़ेंगें तो देश आगे नहीं बढ़ेगा और इसलिए हमारी सरकार की हर योजना राज्‍यों को मजबूत बनाने के लिए है। अभी इस बार 14th Finance Commission की रिपोर्ट के आधार पर अकेले पंजाब को कितना बड़ा लाभ होने वाला है। पंजाब इन रुपयों का सही इस्‍तेमाल करके कितना आगे बढ़ सकता है इसका मैं भली-भांति अंदाज कर सकता हूं और मुझे विश्‍वास है कि बादल साहब के नेतृत्‍व में प्रगतिशील निर्णयों के द्वारा पंजाब के जीवन को बदलने में यह रकम बहुत काम आने वाली है। पहले पिछली पंचवर्षीय योजना में भारत सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना के तहत पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। भाईयों-बहनों आने वाले पांच साल के लिए यह रकम बढा़कर के 54 हजार करोड़ रुपये कर दी जाएगी, डबल से भी ज्‍यादा। इतना ही नहीं पंचायत और नगरपालिकाओं के लिए भारत सरकार ने पहले चार हजार करोड़ रुपया दिया था, इस बार हमने वो रकम बढा़कर के छह हजार करोड़ रुपये कर दी। जिसके कारण गांव के व्‍यक्ति को भी इसका फायदा पहुंचाने में काम आ जाएगी। इस बार भी पहले की तुलना में करीब-करीब चार हजार करोड़ रुपया ज्‍यादा, अतिरिक्‍त चार हजार रुपया पंजाब के विकास के लिए भारत सरकार की तिजोरी से आने वाला है।

स्थिति ऐसी हो गई है.. एक जमाना था कि दिल्‍ली के खजाने में देश की सभी तिजौरियों का करीब 60-65 प्रतिशत पैसा रहता था। राज्‍यों के पास 35-40 प्रतिशत रहता था। हमारे आने के बाद चित्र हमने बदल दिया है। अब राज्‍यों के पास करीब-करीब 60-62 प्रतिशत राशि रहेगी और केंद्र के पास सिर्फ 38% राशि रहेगी और राज्‍य मजबूत होंगे। राज्‍य विकास की नई ऊंचाईयों को पार करेंगे। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

यहां पर रास्‍ते बनाने के लिए भारत सरकार की जो योजनाएं हैं.. रेल को बढ़ाने के लिए.. आज मेरे लिए खुशी की बात है कि अमृतसर से आनंदपुर साहब रेलवे की योजना का साकार रूप हमारे सामने खड़ा हुआ है। यह गर्व की बात है। आनंदपुर साहब यात्रियों के लिए एक मुख्‍य धाम है और किसी को भी हिमाचल में भी किसी जगह जाना है तो आनंदपुर साहब से ही जाते हैं। चिंतपुरणी जाना है, ज्‍वालाजी जाना है तो यहीं से जाते हैं। इस पूरे इलाके को इसका लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने की दिशा में हम लगातार प्रयासरत है।

..और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मेरे पंजाब के किसान भाईयों-बहनों, आपने कभी सोचा था.. किसान 60 साल के बाद.. उसको कभी पेंशन मिल सकता है। सरकारी मुलाजिम को तो पेंशन मिल जाता है। किसान को पेंशन मिल सकता है क्‍या? 60 साल के बाद हर महीना उसको चैक मिल सकता है क्‍या? मेरे किसान भाईयों-बहनों इस बार भारत सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें Public Private Partnership के modal पर.. किसान को.. 60 साल के बाद अगर वो इस योजना से जुड़ जाता है, तो उसको हर महीना पांच हजार रुपया पेंशन की राशि मिल सकती है। हमारे देश के किसान का बुढ़ापा भी सुख, शांति और गौरव से बीते उस दिशा में काम करने का एक अहम कदम इस बार हमने बजट में उठाया है।

भाईयों-बहनों इन दिनों किसान को गुमराह करने के लिए भांति-भांति के प्रयास हुए हैं। कल मैंने रेडियो पर मेरी “मन की बात” में, किसानों ने जितने सवाल पूछे थे, सारे सवालों के मैंने जवाब दिये और मैं किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि अगर इस देश को आगे बढ़ना है तो किसान की रक्षा करनी होगी, गांव का भला करना होगा, लेकिन साथ-साथ किसान के बेटों के लिए भी चिंता करनी होगी। किसान के बेटे को रोजगार चाहिए। आज सेना में जितने जवान हैं वो कौन है? 80% से ज्‍यादा जवान किसान मां-बाप के बेटे हैं। किसान अपने बेटे को सेना में भर्ती करता है, युद्ध के लिए भेजता है। उसे मालूम है कि अगर परिवार में तीन बच्‍चे हैं तो तीनों का जीवन आज खेती से गुजरता नहीं है। हर किसान को पूछो कि भई आपके तीन बेटे हैं क्‍या चाहते हो? हर किसान कहता है – एक बेटा तो खेती करेगा लेकिन दो को तो कहीं भेजना चाहता हूं, कहीं नौकरी कर ले, रोजी-रोटी कमा ले, पढ़-लिख करके अपना करोबार चला ले। हर किसान की यह चिंता है। अगर विकास नहीं होगा तो किसान के बच्‍चों का क्‍या होगा? क्‍या मेरे किसान के बच्‍चे दिल्‍ली और मुंबई की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होने चाहिए?

किसान के बच्‍चों को भी रोजगार चाहिए, किसान के बेटों का भी भला होना चाहिए और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हमारी सरकार किसान का तो भला चाहती है, गांव का भी भला चाहती है, किसान के बच्‍चों का भी भला चाहती है। इस तरह एक लम्‍बी सोच के साथ, देश के विकास की ओर आगे बढ़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। आज वीर सरदार भगत सिंह जी के आशीर्वाद मिले, सुखदेव-राजगुरू के आशीर्वाद मिले, भगत‍ सिंह जी की माता जी के आशीर्वाद मिले, हमारा देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे और नई ऊंचाईयों को पार करते-करते हम आगे बढ़े।

भाईयों बहनों हमारे देश को भ्रष्‍टाचार ने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया। कैसा-कैसा भ्रष्‍टाचार हुआ है! मैं आपको बताना चाहता हूं.. कोयला.. जब मैं यहां चुनाव में आया था और कोयले की चोरी की बात कर रहा था तो हमारे पुराने लोग जो सरकार में बैठे थे, वे गुस्‍सा हो जाते थे। सीएजी ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ रुपया, अकेले कोयले में घोटाला हुआ है। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि लोगों के गले नहीं उतरता था। लोगों को यह तो लगता था कि भ्रष्‍टाचार तो किया होगा इनकी आदत है, लेकिन इतना नहीं हो सकता। ऐसा लोग सोचते थे। कुछ लोग तो ऐसे थे जो कहते थे - जीरो थ्‍योरी, जीरो थ्‍योरी। एक नये पैसे का घोटाला नहीं हुआ यह कहते थे। भाईयों बहनों 204 कोयले की खदान भ्रष्‍टाचार के कारण गुस्‍से में आकर के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। अब हमारे आते ही यह हुआ।

पाप उन्‍होंने किया था.. बिजली कारखाने बंद हो जाने की नौबत आ गई। कारखानों में कोयला नहीं जाएगा तो कारखाने बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति पैदा हो गई। लेकिन हमने ईमानदारी की, पारदर्शिता की, नीतियों की योजना की और हमने तय किया कि हम सार्वजनिक रूप से Auction करेंगे, नीलामी करेंगे। और जो भी लेना चाहता है वो नीलामी में बोले पैसा, जो ज्‍यादा पैसा देगा, उसको मिलेगा। भाईयों बहनों क्‍या हुआ! 204 में से अब तक सिर्फ 20 खदानों की नीलामी हुई है, अभी तो 180 खदानों की नीलामी बाकी है। 204 खदानों में एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले की बात थी। लेकिन यह घोटाला तो उससे भी बड़ा निकला। 204 में से सिर्फ 20 की नीलामी हुई है और आपको जानकर के आनंद होगा कि दिल्‍ली में आपने ईमानदार सरकार बिठाई है। उसका परिणाम यह हुआ है कि अब तक करीब-करीब दो लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में आना तय हो चुका है। 180 खदान बाकी हैं। सब खदाने जाएंगी तो कितना बड़ा भंडार मिलेगा, यह रुपया किसके काम आएगा? गांव के काम आएगा, गरीब के काम आएगा, किसान के काम आएगा। देश विकास की नई ऊंचाईयों पर जाएगा।

कोयला छोडि़ए, इन्‍होंने कोई जगह पाप करने के लिए छोड़ी नहीं भाईयों। सरदार भगत‍ सिंह जी आत्‍मा दुखी होती होगी इन लोगों के कारण। LED Bulb! बिजली बचाने के लिए LED Bulb लगाने की बात है। आपको मालूम है 2014 में सरकार ने LED Bulb कितने रुपये में खरीदे। करीब-करीब 300 रुपयों में एक बल्‍ब खरीदा। हमने उसमें गहराई से काम किया, Department को लगाया, व्‍यापक रूप से काम किया। कंपनियों को भी दबाया। कोई रुपया-पैसा देने की बात बंद करो, गरीब का भला करो और आपको जानकर के खुशी होगी कि जो LED का Bulb एक साल पहले कुछ सरकारों ने 300 रुपये में खरीदा था आज उसकी कीमत 80 रुपये में हमने लाकर के रख दी। एक बल्‍ब पर दो सौ-सवा दौ सौ रुपये, चोरी होते थे। करोड़ा बल्‍ब जाएंगे तो कितने रुपये जाते होंगे। भाईयों बहनों आपने हमें ईमानदारी के लिए बिठाया है, ईमानदारी से काम करने के लिए बिठाया है और उसका परिणाम है कि आज 300 रुपये में बिकने वाला बल्‍ब.. जो भ्रष्‍टाचार के कारण रुपये खाए जाते थे, हमने उसकी कीमत 80-85 रुपया लाकर के रख दी है। सरकार 80-85 रुपये में खरीदेगी और LED का Bulb पहुंचेगा और उसके कारण गरीब से गरीब के घर में बिजली की बचत होगी। किसी का 200 रुपये बचेगा, किसी का 400 रुपये बचेगा। गरीब का हमें आशीर्वाद मिलेगा।

भाईयों बहनों ईमानदारी, देशभक्ति, अगर काम करने का जज्‍बा लेकर के.. सिर्फ देश के लिए जीना, सिर्फ देश के लिए मरना इस संकल्‍प को लेकर के चलते हैं तो कितने उत्‍तम परिणाम आते हैं यह आपके सामने मौजूद है। मैं फिर एक बार.. बादल साहब ने जितने विषय रखे हैं उन सभी बातों पर भारत सरकार गंभीरता से सोचेगी, उनके साथ भी मैं विस्‍तार से बातें करूंगा और भारत सरकार पंजाब के लिए जितना ज्‍यादा कर सकती है करने में कभी पीछे नहीं रहेगी।

मेरा तो पंजाब से अनेक रूप से नाता है। एक तो मैं यहां कई वर्षों तक रहा हूं। एक प्रकार से मेरी शिक्षा-दीक्षा, राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा का अवसर मुझे बादल साहब की उंगली पकड़कर के सीखने का मुझे अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्‍य रहा है। दूसरी बात, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ है और जो पहले पंच प्‍यारे थे, उन पहले पंच प्‍यारों में एक गुजरात के द्वारका का था और इसलिए मेरा तो आपके साथ खून का नाता है। इसलिए पंजाब के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मुझे करने में खुशी होगी। यह कर्ज चुकाने का अवसर मुझे मिला है। मैं उसे चुकाकर रहूंगा।

इसी एक बात के साथ फिर एक बार मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! धन्यवाद।

Friday, February 27, 2015

28 February - National Science Day



28 February 1928 - C.V. Raman discovered Raman Effect.

28 February 1930 - C.V. Raman became Nobel Luareate in Physics.

28 February is Indian's National Science Day.



What India has given to the World of Science, Engineering and Technology?

Discoveries, Inventions, Development, Designs, Commercial Products, and Product Improvements



We need to remember many scientists along with Bharata Ratna on the occasion of National Science Day.


INSA Medals for Scientists of India


The Chandrasekhara Venkata Raman Medal


1979 Salim Ali
1982 GN Ramachandran
1985 MGK Menon
1988 C Gopalan
1991 AP Mitra
1993 G Swarup
1995 AS Paintal
1997 PN Tandon
1999 SK Joshi
2001 S Varadarajan
2003 G Mehta
2005 MS Bamji
2007 GS Khush
2010 S Dattagupta
2013 R Chidambaram

The Shanti Swarup Bhatnagar Medal


1959 Atma Ram
1962 No Award
1964 TR Seshadri
1966 DS Kothari
1968 P Ray
1970 S Bhagavantam
1972 No Award
1974 AN Khosla
1976 No Award
1979 Braham Prakash
1982 TR Anantharaman
1985 R Narasimha
1988 Dinesh Mohan
1991 BK Bachhawat
1993 MA Viswamitra
1995 CS Seshadri
1997 R Kumar
1999 G Padmanaban
2001 RA Mashelkar
2003 NH Wadia
2005 P Ramachandra Rao
2007 NK Ganguly
2010 Anupam Varma
2013 Indira Nath

The Meghnad Saha Medal


1958 SN Bose
1961 HN Bhabha
1963 DN Wadia
1965 DM Bose
1967 No Award
1969 CR Rao
1971 TR Seshadri
1973 No Award
1975 TR Govindachari
1978 DS Kothari
1981 MS Swaminathan
1984 R Ramanna
1987 Sukh Dev
1990 CNR Rao
1992 S Chandrasekhar
1994 MM Sharma
1996 SV Kessar
1998 AK Sharma
2000 N Kumar
2002 R Chidambaram
2004 P Rama Rao
2006 Yash Pal
2009 VS Ramamurthy
2012 T Ramasami
2015 Bikash C Sinha



The Aryabhata Medal


1977 KR Ramanathan
1980 BP Pal
1983 S Dhawan
1986 S Ramaseshan
1989 PN Srivastava
1992 Obaid Siddiqi
1994 V Ramalingaswami
1996 MVS Valiathan
1998 RP Bambah
2000 K Kasturirangan
2002 VL Chopra
2004 KL Chopra
2006 MS Raghunathan
2009 HY Mohanram
2012 KK Talwar
2015 Alok Bhattacharya

http://www.insaindia.org/recipients.php#jn


Concepts Contributed by Indian Scientists, Engineers, Technologists (to be compiled)

Narayana Rao - Industrial Engineering is Human Effort Engineering and System Efficiency Engineering.
C.N.R. Rao - Nano Technology Research


1928 - Bharata Ratna C.V. Raman
1918 - Srinivasa Ramanujan
Jagadish Chandra Bose


Ancient India had 64 educational branches and 64 practical skill branches. Indians certainly observed nature and discovered the way nature works and used it for the benefit of mankind.
Panini - Grammar
Aryabhata
Dhanvantari
Ashwini Devata - Ayurveda
Kanada - Theory of Kana (small units of material)
Ancient Time Vedas


Young Scientist Awardees for the Year 2014 - 2015



Name of Sections                                                    Name of Awardees
Agriculture and Forestry Sciences                            Dibyendu Chatterjee,  ICAR Research Complex, Nagaland.
Animal, Veterinary& Fishery Sciences Bodhisattwa Banerjee, Dept. of Zoology, NEHU, Shillong
Anthropological and Behavioural Sciences (including Archaeology and Psychology & Educational Sciences and Military Sciences) Monika Saini, Department of Anthropology, Delhi University, Delhi
Chemical Sciences Prabhat K. Singh, Radiation & Photochemistry Division, BARC, Mumbai
Earth System Sciences Ishya Devi, Department of Geology, University of Jammu, J & K
Engineering Sciences Debarghya Chakraborty, Department of Civil Engineering, IIT, Kharagpur.
Environmental Sciences Debanjana Sengupta, P.G. Department of Microbiology, St. Xavier’s College, Kolkata.
Information & Communication Science & Technology (Including Computer Sciences) Boopathy D, Bharathiar University, Tamilnadu
Materials Science Aditya Chauhan, IIT Mandi, Himachal Pradesh
Mathematical Sciences (Including Statistics) Namita, Department of Mathematics, University of Delhi, Delhi
Medical Sciences (Including Physiology) Medha Kapoor, DRDO, New Delhi.
New Biology (Including Biochemistry,Biophysics & Molecular Biology and Biotechnology) C. Sathishkumar, Madras Diabetes Research Foundation, Chennai.
Physical Sciences Swarniv Chandra, Department of Physics, Jadavpur University, Kolkata
Plant Sciences Rajkumari jashmi Devi, Department of Botany, NEHU, Shillong.

http://www.sciencecongress.nic.in/html/young_scientists_awards.php

Young Scientist Awardees for the year 2013-14
Young Scientist Awardees for the year 2012-13
Young Scientist Awardees for the year 2011-12
Young Scientist Awardees for the year 2010-11
Young Scientist Awardees for the year 2009-10



Wednesday, December 17, 2014

18 December - India National Minorities Day




18 December - Minorities Rights Day in India.

http://ncm.nic.in/


It is important to discuss the rights and responsibilities of minority communities and the majority community in India on this day. India has a peculiar characteristic. The government in Delhi is in minority religion people's hands for a long period of time in History. That naturally leads to the feeling of exploitation and neglect by the majority community. Was neglect and exploitation of the majority community a historical fact? Historians have to answer the question.


The National Commission for Minorities Act, 1992.
Act XIX of 1992, passed on 17.5.1992, enforced w.e.f 17.5.1993; amended by National Commission for Minorities (Amendment) Act 1995 [Act XLI of 1995 passed on 8.9.1995] for creating the post of a Vice-Chairman out of the originally six Members.
http://ncm.nic.in/NCM_Act.html



2010 Seminar by Naya Zamana
2010 Seminar by Naya Zamana - A report by Suraji Dasgupta





2002

MINORITIES RIGHTS DAY CELEBRATED

The National Commission for Minorities celebrated the Minority Rights Day here today. Speaking on the occasion, the Chairman, National Commission for Minorities, Justice Mohammed Shamim highlighted the importance of the day and the role of the Commission in protecting the rights of the minority communities and in bringing about better understanding among the various religious minority communities in India. Sardar Tarlochan Singh, Vice Chairman and other Members of the Commission also participated in the function.

It was on 18th December, 1992 that the United Nations adopted and promulgated the Declaration on the Rights of Persons belonging to National or Ethnic, Religious and Linguistic Minorities declaring that :

"States shall protect the existence of the national or ethnic, cultural,

religious and linguistic identity of minorities within their respective

territories and encourage conditions for the promotion of that identity"

Accordingly, the National Commission for Minorities has been observing the 18th December as the Minorities Rights Day every year.

A special issue of the Commission's publication, namely "MINORITIES INDIA" was released by the Chairman on this occasion which highlighted the activities of the Third Statutory Commission of the National Commission for Minorities.

http://pib.nic.in/archieve/lreleng/lyr2002/rdec2002/18122002/r1812200237.html

Sunday, September 14, 2014

About Hindi Divas in Hindi - हिन्‍दी दिवस - 14 सितम्‍बर

14 September - 14 सितम्‍बर


संविधान ने 14 सितंबर, 1949 को हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया था. भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में यह वर्णित है कि “संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय होगा.

इसके बाद साल 1953 में हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है.


हिंदी दिवस पर हिट हिंदी फिल्म देखिए - आप  लिये हिट हिंदी फिल्में यूट्यूब विडियों का  बड़ा  समूह 



हिंदी के समबन्ध में कुछ  महानुभावों के विचार

१. हिंदी के द्वारा सरे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है.  -  स्वामी दयानंद सरस्वती

२. राष्ट्रीय मेल और राजनीतिक एकता के लिये सारे देश में हिंदी और  नागरी का प्रचार आवश्यक है -
लाला लाजपत राय

३.राष्ट्र की एकता को यदि बना कर रखा जा सकता है तो उसका माध्यम हिंदी ही हो सकती है -
सुब्रहमणयम भारती

४ प्रान्तीय ईर्ष्या द्वेष दूर करने में इतनी सहायता हिंदी प्रचार से मिलेगी,उतनी दूसरी चीज से नहीं -
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

५. राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है -
महात्मा गाँधी

‘भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी’। - गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर


2014
_________________________



                 Picture Source: http://pib.nic.in/photo//2014/Sep/l2014091456735.jpg

राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी 14 सितम्‍बर, 2014 को नई दिल्‍ली में हिन्‍दी दिवस समारोह के दौरान। साथ में हैं, केन्‍द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्रालय में आधिकारिक भाषा की सचिव श्रीमती नीता चौधरी।




राष्‍ट्रपति


देवियो और सज्जनो, 

मैं, हिंदी दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। हिंदी में सराहनीय कार्य के लिए मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को विशेष बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि वे राजभाषा को और अधिक बढ़ावा देंगे। 

भारत के संविधान में हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही, संविधान के भाग सत्रह, अनुच्छेद तीन सौ इक्यावन में कहा गया है कि राजभाषा हिंदी को इस तरह विकसित किया जाए कि वह भारत की विविध संस्कृति को व्यक्त करने में सक्षम हो। इस प्रकार राजभाषा के रूप में हिंदी को एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ शासित क्षेत्रों की प्रमुख राजभाषा है। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल अन्य इक्कीस भाषाओं के साथ हिंदी का एक विशेष स्थान है। हिंदी के महत्त्व को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने बड़े सुंदर रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा था, ‘भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी’। 

देवियो और सज्जनो, 

लोकतंत्र में सरकार और जनता के बीच प्रशासनिक संपर्क को सशक्त बनाने में भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सरकारी नीतियों और योजनाओं को जनता तक उनकी अपनी बोली में पहुंचाने में भाषा सहायक है। यदि हम चाहते हैं कि हमारा लोकतंत्र प्रगतिशील हो तथा विकास योजनाएं जनता तक सुचारु रूप से पहुंचें तो हमें संघ के कामकाज में हिंदी का तथा राज्यों के कामकाज में उनकी प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाना होगा। परंतु इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि सरकारी कामकाज की भाषा सरल हो। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि राजभाषा विभाग ने हाल ही में सरल हिंदी शब्दावली तैयार की है। मुझे उम्मीद है कि यह शब्दावली हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देगी। 

मैं, समय-समय पर देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को अपने भाषण द्वारा भारत में उच्च शिक्षा के स्तर पर चिंता व्यक्त करता रहा हूं। ईसा पूर्व तीसरी सदी से बारहवीं ईस्वी सदी के पंद्रह सौ वर्षों के दौरान भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्वभर में प्रसिद्ध था। परंतु आज भारत का कोई भी उच्च शिक्षा संस्थान विश्व के दो सौ सर्वोत्तम संस्थानों में शामिल नहीं है। जरूरत इस बात की है कि बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी पुस्तकें विद्यार्थियों को अपनी भाषाओं में पढ़ने के लिए मिलें। मुझे खुशी है कि राजभाषा विभाग द्वारा राजीव गांधी राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान मौलिक पुस्तक लेखन योजना के द्वारा हिंदी में ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकों के लेखन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे हमारे विद्यार्थियों को ज्ञान-विज्ञान संबंधी पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध होंगी। 

देवियो और सज्जनो, 

आधुनिक युग में आज इंटरनेट, मोबाइल आदि में हिंदी का प्रयोग काफी आगे बढ़ चुका है। इंटरनेट तथा मोबाइल सेवाओं के माध्यम से हम जनता को कुशल प्रशासन दे सकते हैं तथा जन-सेवाओं को स्थानीय भाषा के द्वारा गांव-गांव तक पहुंचा सकते हैं। मुझे बताया गया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों ने अपनी वेबसाइटें हिंदी में भी तैयार कर ली हैं। सभी सरकारी कार्यालयों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इन वेबसाइटों पर नवीनतम् सूचनाएं उपलब्ध हों जिससे जनता को तुरंत उपयोगी जानकारी उपलब्ध हो सके। 

अंत में, मैं राजभाषा विभाग को हिंदी दिवस के आयोजन के लिए बधाई देता हूं। मैं यहां उपस्थित हिंदी सेवियों तथा देश-विदेश के सभी हिंदी प्रेमियों से आग्रह करना चाहूंगा कि वे हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए पूरी निष्ठा के साथ प्रयास करें। 

धन्यवाद, 

जय हिंद! 
http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=65732




________________________
________________________





References

Jagran Junction Article








Friday, August 15, 2014

Independence Day of India - 15 August

India Knol Day - 15 August - Independence Day of India

15 August - Independence Day of India




_______________________________________________________________________________


2014

    Prime Minister Narendra Modi Addressing the Nation

    Picture source: http://pib.nic.in/photo//2014/Aug/l2014081555810.jpg



Google Doodle

2014 - 15 August - Independence Day Function at Red Fort, Delhi - Prime Minister's Address to Nation

____________________

_____________________
Video uploaded by PMO India YouTube Channel





2011
_____________

______

Vande Mataram - Lata Mangeshkar

http://www.youtube.com/watch?v=yvOcDMwUQC0

__________

Ae Mere Watan Ke Logon - Lata Mangeshkar


http://www.youtube.com/watch?v=LyAhYbwUr2U
__________

Mere Watan Hindu Sita - Song

http://www.youtube.com/watch?v=g-1AeUCCVJ4
__________


Bharat Humko Janse Pyara Hai

 

_____________

______________________________________________

2010

 

Successful Organization of a Knol Day


We organized Knol Day of Industrial Engineering. It is successful and still attracting visitors.
Number of new articles were published Industrial Engineer Magazine Article Summaries by 2010 IE Students NITIE, Mumbai, India  .

The event was promoted in orkut, linkedin, and through various mails and blogs. There was good response from all forums and platforms.


_______________________________________________________________________________


________________________________________________________________________________


 







____________________________________________________________________________



______________

1947 News Video

USA News about India and Pakistan Formation and Handing over Power


http://www.youtube.com/watch?v=hYRY6hmcOns
______________

Celebration on 15th August 1947 in Pune
http://timesofindia.indiatimes.com/city/pune/There-was-a-spirit-of-festivity-in-the-air/articleshow/9607547.cms

__________________________________________________________________________________

India  - Knols

 Knol Sub-Directory - India - Interesting Knols
                          (83 Knols)



                       India Knol Directory



   
                  Interesting Hindi Knols
                       (116 Knols)
                

     Knol Directory of Knols by Indian Authors





The India Knol Day campaign is supported by
India Knol Month 16th July to 15th August  Updated 16.7.2010

India a Holiday Destination
Travel Tips for India
India Travel: All About It

Ancient India

Music of India
Indian Classical Music - Carnatic and Hindustani - Introduction and Appreciation


___________________________________________________________________________________________

India - Knol Authors


Knol Authors from India - List
Indian Knol Authors - Knol Authors From India - Top 200 - Profiles
Indian Knol Authors - Page Views Statistics



Knol authors can add more knols
___________________________________________________________________________________________


Knol authors can add more knols
_______________________________________________________________________________
______________________________________________________________________________
--------------------------------------------------------------------------------------------------------


Comments

Short urls

http://knol.google.com/k/-/-/2utb2lsm2k7a/2708
Narayana Rao - 14 Aug 2011

Untitled

sir u asked me to become a coauthor and join event promotion team but i dont know how to do that .i would be intrested to do so.
Vineet Shukla - 18 Jul 2010
Thank you for becoming a coauthor.

Please comment on the India Knol Month knol also and become a coauthor there also. We are presently updating that knol every day with some additional knols from existing knols. You can include some Hindi knols you like whenever time permits.
Narayana Rao - 18 Jul 2010
Dear Vineet Shukla

Thank you for writing the comment. I sent the invitation for becoming the coauthor. It will come in your gmail. When you click on the link given in the mail, this knol will open and on the right handside blocks, in one block there is a message, that will say you were invited to be a coauthor, do you accept? You click on the accept button and you will become a coauthor immediately.

We can discuss what can be done through these comments.
I started a India Knol Month campaign through the knol
http://knol.google.com/k/narayana-rao-k-v-s-s/india-knol-month-16th-july-to-15th/2utb2lsm2k7a/2717#
For that knol also, you and others will become coauthors. We are trying to highlight some knols and some Indian knol authors in that knol. The idea is to increase readers for Indian knols. Also to increase knol authors. If readers increase more authors will be attracted to write. If more authors write more readers will come. Both happen in cycles.

Everyday, I am writing comments on some Indian authors' page and informing them of this campaign. There is good response during the last two days. India knol month is getting 100 page views per day which is difficult to get. Around 100 articles only get 100 page views per day on knol. So our campaign is popular at the moment. We can increase its reach.

Awaiting your joining the team.
Narayana Rao - 17 Jul 2010

Yes.. it is a good attempt.. let us make it happen.. count on me as CO AUTHOR

nitieprasad prasad - 14 Jul 2010
Thank you for joinng as the coauthor.
Narayana Rao - 14 Jul 2010

Coauthors invited

Coauthors are invited for this knol to make the initiative very successful. Write a comment and I shall invite.
Narayana Rao - 11 Jul 2010

Wednesday, January 25, 2012

Republic Day Greetings to All Indians - 2012

                                               Google Doodle of 26 January 2012