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Friday, October 6, 2017

Jamsetji Tata - Biography in Hindi - जमशेदजी टाटा


जमशेदजी टाटा


Jamshed Ji Nasarwan Ji Tata Documentary Hindi

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Goyal Brothers Prakashan


जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 को एक भारतीय पारसी परिवार में हुआ था।


उनका जन्म सन १८३९ में गुजरात के नवसेरी में हुआ था|  उनके पिता जी  नुसीरवानजी  व्यवसायी थे।  जमशेदजी 14 साल की नाज़ुक उम्र में ही उनका साथ देने लगे। जमशेदजी ने एल्फिंस्टन कालेज (Elphinstone College) में प्रवेश लिया|  वे 1858 में स्नातक हुए और अपने पिता के व्यवसाय से पूरी तरह जुड़ गए।


1868 में उन्होने 21000 रुपयों के साथ अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया। सबसे पहले उन्होने एक दिवालिया तेल कारखाना ख़रीदा और उसे एक रुई के कारखाने में तब्दील कर दिया और उसका नाम बदल कर रखा - एलेक्जेंडर मिल (Alexender Mill) ! दो साल बाद उन्होने इसे खासे मुनाफे के साथ बेच दिया। इस पैसे के साथ उन्होंने नागपुर में 1874 में एक रुई का कारखाना लगाया। उस  कारखाने का नाम इम्प्रेस्स मिल (Empress Mill) (Empress का मतलब ‘महारानी’) रखा।

इंग्लैड की प्रथम यात्रा

 इंग्लैड की प्रथम यात्रा से लौटकर इन्होंने चिंचपोकली के एक तेल मिल को कताई बुनाई मिल में परिवर्तित कर औद्योगिक जीवन का सूत्रपात किया। किंतु अपनी इस सफलता से उन्हें पूर्ण संतोष न मिला। पुन: इंग्लैंड की यात्रा की। वहाँ लंकाशायर के से बारीक वस्त्र की उत्पादनविधि और उसके लिए उपयुक्त जलवायु का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने नागपुर को चुना और वहाँ वातानुकूलित सूत मिलों की स्थापना की। इस तरह लंकाशायर का जलवायु कृत्रिम साधनों से नागपुर की मिलों में उपस्थित कर दिया।



जमशेद जी के दिमाग में तीन बडे विचार आये।  एक, अपनी लोहा व स्टील कंपनी खोलना ; दूसरा, एक जगत प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित करना ; व तीसरा, एक जलविद्युत परियोजना (Hydro-electric plant) लगाना।  तीनो कार्य उनके बच्चोने  किया।   होटल ताज महल  दिसंबर 1903 में 4,21,00,000 रुपये के शाही खर्च से तैयार हुआ।

1904 में जर्मनी में उन्होने अपनी अन्तिम सांस ली।








Updated 7 October 2017, 27 February 2016



Thursday, November 10, 2016

Prime Minister Narendra Modi - Speeches and Interviews in Hindi 2016






Narendra Modi seeks blessings from the people to defeat the menace of corruption.

Asking cooperation from people for 50 days to complete the note change process.
13 November 2016
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PM Modi Inaugurates International Conference & Exhibition on Sugarcane Value Chain in Pune
13 November 2016

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FULL SPEECH: Rs 500, Rs 1,000 notes declared illegal from midnight: PM Modi
8 November 2016
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Interview on 2 September 2016 to Network18

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Bharatiya Janata Party



Independence Day 15 August 2016  Speech by Shri Narendra Modi

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India TV


Townhall Meeting - 6 August 2016

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Bharatiya Janata Party

Updated  13 November 2016,  3 September 2016

Saturday, February 27, 2016

Vasundhara Raje - Biography in Hindi - वसुन्धरा राजे सिंधिया



Vasundhara Raje takes oath as Rajasthan Chief Minister
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Zee News 13 Dec 2013


वसुन्धरा राजे का जन्म 8 मार्च 1953 को मुम्बई में हुआ। वो  विजयाराज सिन्धिया की पुत्री  है।


राजे 1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी  की अदस्य बानी थी । इसके बाद 1985-87 के बीच राजे भाजपा युवा मोर्चा राजस्थान की उपाध्यक्ष रहीं। 1987 में वसुंधरा राजे राजस्थान प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष बनीं। 1998-1999 में अटलबिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में राजे को विदेश राज्यमंत्री बनाया गया। वसुंधरा राजे को अक्टूबर 1999 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के तौर पर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। भैरोंसिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें राजस्थान में भाजपा राज्य इकाई का अध्यक्ष बनी।

वसुन्धरा राजे सिंधिया भारत के राज्य राजस्थान की वर्तमान मुख्यमंत्री हैं।




राजस्थान चुनाव 2008 में भाजपा ने 200 सदस्य वाली राजस्थान राज्य विधानसभा में 78 सीटें हासिल की जो कि कांग्रेस पार्टी की 98 सीटों की विजय की तुलना में सिर्फ 18 कम थी। कांग्रेस पार्टी ने गठबंधन सरकार का गठन किया और वसुन्धरा जी को विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया। लेकिन कुछ समय पश्चात् ही भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के रूप में उन्हें कार्यभार सौंपा गया। जहां उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक मामलों का कार्यभार संभाला। मार्च 2013 में राजे जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में भाजपा पार्टी ने फिर से चुना।

2013 विधानसभा में भाजप  हुयी और  राजे जी फिर एक बार मुख्या मंत्री बनी ।

http://vasundhararaje.in/life-and-career

Ghulam Nabi Azad - Biography in Hindi - ग़ुलाम नबी आज़ाद



Shikhar Sammelan: Ghulam Nabi Azad answers various questions
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ABP News  May 2015


Ghulam Nabi Azad in Aap Ki Adalat (Full Episode)
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India TV


ग़ुलाम नबी आज़ाद (जन्म: 7 मार्च 1949) वर्तमान भारत सरकार मेँ राज्य सभा के विपक्ष के नेता है।

जम्मू कश्मीर से कांग्रेस नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद पांचवीं बार राज्यसभा में पहुंचने में कामयाब हुए हैं। आठ फरवरी 2015 को जम्मू कश्मीर में राज्यसभा चुनाव में आजाद दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए।

राज्य जम्मू कश्मीर से राज्यसभा का चुनाव जीते गुलाम नबी आजाद को 16 फरवरी 2015 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता प्रदान की गयी  है।


http://jammu.amarujala.com/news/politics-jammu/azad-back-as-leader-of-opposition-in-rajya-sabha-hindi-news/

Shivraj Singh Chouhan - Biography in Hindi - शिवराज सिंह चौहान


Shivraj Singh Chouhan in Aap Ki Adalat (Full Episode) - India TV

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2015  India TV

Shivraj Singh Chauhan's victory speech

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8 Dec 2013
Aaj Tak


शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च १९५९ को हुआ।  उन्‍होंने भोपाल के बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर  शिक्षा प्राप्‍त की। सन् १९७५ में मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रसंघ अध्यक्ष। आपातकाल का विरोध किया और १९७६-७७ में भोपाल जेल में बंदी  रहे। सन् १९७७ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं।


सन् १९७७-७८ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री बने। सन् १९७५ से १९८० तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मध्य प्रदेश के संयुक्त मंत्री रहे। सन् १९८० से १९८२ तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश महासचिव, १९८२-८३ में परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य बने।
१९८४-८५ में भारतीय जनता युवा मोर्चा, मध्य प्रदेश के संयुक्त सचिव, १९८५ से १९८८ तक महासचिव तथा १९८८ से १९९१ तक युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे।


श्री चौहान १९९० में पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद १९९१ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद बने। श्री चौहान १९९२ में अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बने। सन् १९९२ से १९९४ तक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महासचिव नियुक्त।

श्री चौहान ११ वीं लोक सभा में वर्ष १९९६ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पुन: सांसद चुने गये।श्री चौहान वर्ष १९९८ में विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार १२ वीं लोक सभा के लिए सांसद चुने गये।  श्री चौहान वर्ष १९९९ में विदिशा से चौथी बार १३ वीं लोक सभा के लिये सांसद निर्वाचित हुए।

श्री शिवराज सिंह चौहान पॉचवी बार विदिशा से १४वीं लोक सभा के सदस्य निर्वाचित हुये। वह वर्ष २००४ में  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव, भाजपा संसदीय बोर्ड के सचिव, केन्द्रीय चुनाव समिति के सचिव  रहे।


श्री चौहान को २९ नवम्बर २००५ को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।  श्री चौहान को १० दिसम्बर २००८ को भारतीय जनता पार्टी के १४३ सदस्यीय विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना। श्री चौहान ने १२ दिसम्बर २००८ को भोपाल के जंबूरी मैदान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।

2013 चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फिर बहुमत मिली। श्री चौहान और एक बार मुख्यमंत्री बने। 

Friday, February 26, 2016

Nitish Kumar - Biography in Hindi - नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार

जन्म दिन : 1 मार्च 1951.
जन्म स्थान : बख्तियापुर, जिला - पटना, राज्य - बिहार.

शैक्षिक : बीएससी अभियांत्रिकी ()
योग्यता इंजीनियरिंग, पटना, बिहार की बिहार कॉलेज में पढ़ाई की.
व्यवसाय : राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता, किसान, इंजीनियर.

निम्न पदों पर आसीन हुये
1985-89 : सदस्य, बिहार विधान सभा.
1986-87 : सदस्य, याचिका समिति, बिहार विधान सभा.
1987-88 : अध्यक्ष, युवा लोक दल, बिहार.
1987-89 : सदस्य, सार्वजनिक उपक्रमों, बिहार विधान सभा पर समिति.
1989 : महासचिव, जनता दल, बिहार.
1989 : 9 वीं लोकसभा के लिए चुने गए.
1989-16/7/1990 : सदस्य, सदन समिति (इस्तीफा दे दिया).
4/1990-11/1990 : संघ राज्य, कृषि एवं सहकारिता मंत्री आपरेशन.
1991 : फिर से 10 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
1991-93 : जनरल सचिव, जनता दल.
उप संसद में जनता दल के नेता.
17/12/91-10/5/96 : सदस्य, रेल अभिसमय समिति.
8/4/93-10/5/96 : अध्यक्ष, कृषि पर समिति.
1996 : फिर से 11 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
सदस्य, अनुमानों पर समिति.
सदस्य, जनरल उद्देश्य समिति.
सदस्य, संविधान पर संयुक्त समिति (अस्सी पहले संशोधन विधेयक, 1996).

1996-98 : सदस्य, रक्षा समिति.
1998 : फिर से 12 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
19/3/98-5/8/99 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, रेल.
14/4/98-5/8/99 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, भूतल परिवहन (अतिरिक्त प्रभार).
1999 : फिर से 13 वीं लोकसभा के लिए चुने गए.
13/10/99-22/11/99 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, भूतल परिवहन.
22/11/99-3/3/00 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, कृषि.
3/3/00-10/3/00 : मुख्यमंत्री, बिहार.
27/5/00-20/3/01 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, कृषि.
20/3/01-21/7/01 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, रेल का अतिरिक्त प्रभार के साथ कृषि.
22/7/01-21/5/04 : केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंत्री, रेल.
2004 : फिर से 14 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित
सदस्य, कोयला और स्टील समिति.
सदस्य, जनरल उद्देश्य समिति.
सदस्य, विशेषाधिकार समिति.
नेता जनता दल (यू) संसदीय दल, लोकसभा.
24/11/2005 से मुख्यमंत्री, बिहार.
कुछ दिन के लिए इस्तीफा दिया. वापस 2015  चुनाव जीता और मुख्या मंत्री बना


Nitish Kumar Interview With Arnab Goswami | Bihar Elections 2015 | Full Interview

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11 Oct 2015
Times Now


Bihar Elections 2015: Nitish Kumar's Incredible Rise

कुछ दिन के लिए इस्तीफा दिया. वापस 2015  चुनाव जीता और मुख्या मंत्री बना

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Aaj Tak  8 Nov 2015

Morarji Desai - Biography in Hindi




Pradhanmantri - Episode 9: Split in Congress - Indira Gandhi and Morarji Desai
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ABP News


Pradhanmantri - Episode 13: India after emergency, Janata Party wins general election
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Mint

Itihaas Gawah H: Morarji Desai loses ground to Charan Singh
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Itihaas Gawah Hai






श्री मोरारजी देसाई का जन्म 29 फ़रवरी 1896 को भदेली गाँव में हुआ था। उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे एवं बेहद अनुशासन प्रिय थे। उन्होंने सेंट बुसर हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की एवं अपनी मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्कालीन बंबई प्रांत के विल्सन सिविल सेवा से 1918 में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने बाद उन्होंने बारह वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्य किया।

1930 में जब भारत में महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया आजादी के लिए संघर्ष अपने मध्य में था, श्री देसाई का ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में विश्वास खो चुका था, इसलिए उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में भाग लेने का निश्चय किया।

श्री देसाई को स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तीन बार जेल जाना पड़ा। वे 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य बने और 1937 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे।

जब पहली कांग्रेस सरकार ने 1937 में कार्यभार संभाला, श्री देसाई राजस्व, कृषि, वन एवं सहकारिता मंत्रालय के मंत्री बने।

महात्मा गांधी द्वारा शुरू किये गए व्यक्तिगत सत्याग्रह में श्री देसाई को गिरफ्तार कर लिया गया था। अक्टूबर 1941 उन्हें छोड़ दिया गया एवं अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार उन्हें 1945 में छोड़ दिया गया। 1946 में राज्य विधानसभा के चुनावों के बाद वे मुंबई में गृह एवं राजस्व मंत्री बने।  वर्ष 1952 में वे बंबई के मुख्यमंत्री बने।

वह यह मानते थे कि जब तक गांवों और कस्बों में रहने वाले गरीब लोग सामान्य जीवन जीने में सक्षम नहीं है, तब तक समाजवाद का कोई मतलब नहीं है। श्री देसाई ने किसानों एवं किरायेदारों की कठिनाइयों को सुधारने की दिशा में प्रगतिशील कानून बनाकर अपनी इस सोच को कार्यान्वित करने का ठोस कदम उठाया। इसमें श्री देसाई की सरकार देश के अन्य राज्यों से बहुत आगे थी। इसके अलावा उन्होंने अडिग होकर एवं पूर्ण ईमानदारी से कानून को लागू किया। बंबई में उनकी इस प्रशासन व्यवस्था की सभी ने जमकर तारीफ की।

राज्यों को पुनर्गठित करने के बाद श्री देसाई 14 नवंबर 1956 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। बाद में उन्होंने 22 मार्च 1958 से वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला।
श्री देसाई ने आर्थिक योजना एवं वित्तीय प्रशासन से संबंधित मामलों पर अपनी सोच को कार्यान्वित किया।

1963 में उन्होंने कामराज योजना के अंतर्गत केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। पंडित नेहरू के बाद प्रधानमंत्री बने श्री लाल बहादुर शास्त्री ने प्रशासनिक प्रणाली के पुनर्गठन के लिए उन्हें प्रशासनिक सुधार आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए मनाया। लोक जीवन से संबंधित अपने लंबे एवं अपार अनुभव का उपयोग करते हुए उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

1967 में श्री देसाई श्रीमती इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्रालय के प्रभारी मंत्री के रूप में शामिल हुए। जुलाई 1969 में श्रीमती गांधी ने उनसे वित्त मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया। श्री देसाई ने इस बात को माना कि प्रधानमंत्री के पास सहयोगियों के विभागों को बदलने का विशेषाधिकार है लेकिन उनके आत्म-सम्मान को इस बात से ठेस पहुंची कि श्रीमती गाँधी ने इस बात पर उनसे परामर्श करने का सामान्य शिष्टाचार भी नहीं दिखाया। इसलिए उन्हें यह लगा कि उनके पास भारत के उप-प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

1969 में कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद श्री देसाई कांग्रेस संगठन के साथ ही रहे। वे आगे भी पार्टी में मुख्य भूमिका निभाते रहे। वे 1971 में संसद के लिए चुने गए। 1975 में गुजरात विधानसभा के भंग किये जाने के बाद वहां चुनाव कराने के लिए वे अनिश्चितकालीन उपवास पर चले गए। परिणामस्वरूप जून 1975 में वहां चुनाव हुए। चार विपक्षी दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से गठित जनता दल ने विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा श्रीमती गांधी के लोकसभा चुनाव को निरर्थक घोषित करने के फैसले के बाद श्री देसाई ने माना कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए श्रीमती गांधी को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए था।

आपातकाल घोषित होने के समय 26 जून 1975 को श्री देसाई को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें एकान्त कारावास में रखा गया था और लोकसभा चुनाव कराने के निर्णय की घोषणा से कुछ पहले 18 जनवरी 1977 को उन्हें मुक्त कर दिया गया। उन्होंने देशभर में पूरे जोर-शोर से अभियान चलाया एवं छठी लोकसभा के लिए मार्च 1977 में आयोजित आम चुनाव में जनता पार्टी की जबर्दस्त जीत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। श्री देसाई गुजरात के सूरत निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए थे। बाद में उन्हें सर्वसम्मति से संसद में जनता पार्टी के नेता के रूप में चुना गया एवं 24 मार्च 1977 को उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।




http://pmindia.gov.in/hi/former_pm/shri-morarji-desai/

Thursday, December 17, 2015

Atal Bihari Vajpayee - Biography - Hindi - अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी



भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री
(प्रथम शासनकाल)
१६ मई १९९६ – १ जून १९९६
(द्वितीय शासनकाल)
१९ मार्च १९९८ – २२ मई २००४




Picture Source: http://pib.nic.in/archieve/phtgalry/pgyr2002/pg012002/pg01jan2002/abv.jpg


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Aaj Tak


Poems of Vajpayee
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Aaj Tak


10 Best Poems of Shri Vajpayee
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India TV

२५ दिसम्बर १९२४

उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की रियासत ग्वालियर में अध्यापक थे। वहीं  २५ दिसम्बर १९२४ को उनकी सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी की कोख से अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था।  अटल की बी०ए० की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डी०ए०वी० कालेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी  में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने कानपुर में ही एल०एल०बी० की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये।

वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक हैं|  सन् १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली।  लखनऊ में एक लोकसभा उप चुनाव में वो हार गए थे. 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया. लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो दूसरी लोकसभा में पहुंचे.  सन् १९५७ में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे|

६ अप्रैल १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1996 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। १९ March १९९८ को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली| 13 October 1999  को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।

सन् २००४ चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा०ज०पा० विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई।

श्री वाजपेयी 47 वर्षों तक सांसद रहे, वे 11 बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2 बार राज्‍यसभा सदस्‍य रहे|

सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में रहते हैं।

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श्री अटल बिहारी वाजपेयी 16 से 31 मई, 1996 और दूसरी बार 19 मार्च, 1998 से 13 मई, 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

श्री वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर, 1924 को ग्वालियर (मध्यप्रदेश) में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता का नाम श्रीमती कृष्णा देवी है।

श्री वाजपेयी के पास 50 वर्षों से अधिक का एक लम्बा संसदीय अनुभव है। वे 1957 से सांसद रहे हैं। वे पांचवी, छठी और सातवीं लोकसभा तथा फिर दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं तेरहवीं और चौदहवीं लोकसभा के लिए चुने गए और सन् 1962 तथा 1986 में राज्यसभा के सदस्य रहे। वे लखनऊ (उत्तरप्रदेश) से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए। वे ऐसे अकेले सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर चार विभिन्न राज्यों-उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा दिल्ली से निर्वाचित हुए हैं।

वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (जो देश के विभिन्न क्षेत्रों की विभिन्न पार्टियों का एक चुनाव-पूर्व गठबन्धन है और जिसे तेरहवीं लोकसभा के निर्वाचित सदस्यों का पूर्ण समर्थन और सहयोग हासिल है) के नेता चुने गए। श्री वाजपेयी भाजपा संसदीय पार्टी (जो बारहवीं लोकसभा की तरह तेरहवीं लोकसभा में भी अकेली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है) के निर्वाचित नेता रहे हैं।

उन्होंने विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज, ग्वालियर और डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर (उत्तरप्रदेश) से शिक्षा प्राप्त की। श्री वाजपेयी ने एम.ए. (राजनीति विज्ञान) की डिग्री हासिल की है तथा उन्होंने अनेक साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां अर्जित की हैं। उन्होंने राष्ट्रधर्म (हिन्दी मासिक), पांचजन्य (हिन्दी साप्ताहिक) और स्वदेश तथा वीर अर्जुन दैनिक समाचार-पत्रों का संपादन किया। उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं-''मेरी संसदीय यात्रा''(चार भागों में); ''मेरी इक्यावन कविताएं''; ''संकल्प काल''; ''शक्ति से शांति'' और ''संसद में चार दशक'' (तीन भागों में भाषण), 1957-95; ''लोकसभा में अटलजी'' (भाषणों का एक संग्रह); ''मृत्यु या हत्या''; ''अमर बलिदान''; ''कैदी कविराज की कुंडलियां''(आपातकाल के दौरान जेल में लिखीं कविताओं का एक संग्रह); ''भारत की विदेश नीति के नये आयाम''(वर्ष 1977 से 1979 के दौरान विदेश मंत्री के रूप में दिए गए भाषणों का एक संग्रह); ''जनसंघ और मुसलमान''; ''संसद में तीन दशक''(हिन्दी) (संसद में दिए गए भाषण 1957-1992-तीन भाग); और ''अमर आग है'' (कविताओं का संग्रह),1994।

श्री वाजपेयी ने विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया है। वे सन् 1961 से राष्ट्रीय एकता परिषद् के सदस्य रहे हैं। वे कुछ अन्य संगठनों से भी सम्बध्द रहे हैं जैसे-(1) अध्यक्ष, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एंड असिस्टेंट मास्टर्स एसोसिएशन (1965-70);(2) पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति (1968-84); (3) दीनदयाल धाम, फराह, मथुरा (उत्तर प्रदेश); और (4) जन्मभूमि स्मारक समिति, (1969 से)

पूर्ववर्ती जनसंघ के संस्थापक-सदस्य (1951), अध्यक्ष, भारतीय जनसंघ (1968-73), जनसंघ संसदीय दल के नेता (1955-77) तथा जनता पार्टी के संस्थापक-सदस्य (1977-80), श्री वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष (1980-86) और भाजपा संसदीय दल के नेता (1980-1984,1986 तथा 1993-1996) रहे। वे ग्यारहवीं लोकसभा के पूरे कार्यकाल तक प्रतिपक्ष के नेता रहे। इससे पहले वे 24 मार्च 1977 से लेकर 28 जुलाई, 1979 तक मोरारजी देसाई सरकार में भारत के विदेश मंत्री रहे।

पंडित जवाहरलाल नेहरु की शैली के राजनेता के रुप में देश और विदेश में अत्यंत सम्मानित श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री के रुप में 1998-99 के कार्यकाल को ''साहस और दृढ़-विश्वास का एक वर्ष'' के रुप में बताया गया है। इसी अवधि के दौरान भारत ने मई 1998 में पोखरण में कई सफल परमाणु परीक्षण करके चुनिन्दा राष्ट्रों के समूह में स्थान हासिल किया। फरवरी 1999 में पाकिस्तान की बस यात्रा का उपमहाद्वीप की बाकी समस्याओं के समाधान हेतु बातचीत के एक नये युग की शुरुआत करने के लिए व्यापक स्वागत हुआ। भारत की निष्ठा और ईमानदारी ने विश्व समुदाय पर गहरा प्रभाव डाला। बाद में जब मित्रता के इस प्रयास को कारगिल में विश्वासघात में बदल दिया गया, तो भारत भूमि से दुश्मनों को वापिस खदेड़ने में स्थिति को सफलतापूर्वक सम्भालने के लिए भी श्री वाजपेयी की सराहना हुई। श्री वाजपेयी के 1998-99 के कार्यकाल के दौरान ही वैश्विक मन्दी के बाबजूद भारत ने 5.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृध्दि दर हासिल की जो पिछले वर्ष से अधिक थी। इसी अवधि के दौरान उच्च कृषि उत्पादन और विदेशी मुद्रा भण्डार जनता की जरुरतों के अनुकूल अग्रगामी अर्थव्यवस्था की सूचक थी। ''हमें तेजी से विकास करना होगा। हमारे पास और कोई दूसरा विकल्प नहीं है'' वाजपेयीजी का नारा रहा है जिसमें विशेषकर गरीब ग्रामीण लोगों को आर्थिक रुप से मजबूत बनाने पर बल दिया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, सुदृढ़ आधारभूत-ढांचा तैयार करने और मानव विकास कार्यक्रमों को पुनर्जीवित करने हेतु उनकी सरकार द्वारा लिए गये साहसिक निर्णय ने भारत को 21वीं सदी में एक आर्थिक शक्ति बनाने के लिए अगली शताब्दी की चुनौतियों से निपटने हेतु एक मजबूत और आत्म-निर्भर राष्ट्र बनाने के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबध्दता को प्रदर्शित किया। 52वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से बोलते हुए उन्होंने कहा था, ''मेरे पास भारत का एक सपना है: एक ऐसा भारत जो भूखमरी और भय से मुक्त हो, एक ऐसा भारत जो निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।''
श्री वाजपेयी ने संसद की कई महत्वपूर्ण समितियों में कार्य किया है। वे सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष (1966-67); लोक लेखा समिति के अध्यक्ष (1967-70); सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य (1986); सदन समिति के सदस्य और कार्य-संचालन परामर्शदायी समिति, राज्य सभा के सदस्य (1988-90); याचिका समिति, राज्य सभा के अध्यक्ष (1990-91); लोक लेखा समिति, लोक सभा के अध्यक्ष (1991-93); विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष (1993-96) रहे।

श्री वाजपेयी ने स्वतंत्रता संघर्ष में हिस्सा लिया और वे 1942 में जेल गये। उन्हें 1975-77 में आपातकाल के दौरान बन्दी बनाया गया था।

व्यापक यात्रा कर चुके श्री वाजपेयी अंतर्राष्ट्रीय मामलों, अनुसूचित जातियों के उत्थान, महिलाओं और बच्चों के कल्याण में गहरी रुचि लेते रहे हैं। उनकी कुछ विदेश यात्राओं में ये शामिल हैं- संसदीय सद्भावना मिशन के सदस्य के रुप में पूर्वी अफ्रीका की यात्रा, 1965; आस्ट्रेलिया के लिए संसदीय प्रतिनिधिमंडल 1967; यूरोपियन पार्लियामेंट, 1983; कनाडा 1987; कनाडा में हुई राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की बैठकों में भाग लेने हेतु भारतीय प्रतिनिधिमंडल 1966 और 1984; जाम्बिया, 1980; इस्ले आफ मैन, 1984; अंतर-संसदीय संघ सम्मेलन, जापान में भाग लेने हेतु भारतीय प्रतिनिधिमंडल, 1974; श्रीलंका, 1975; स्वीट्जरलैंड 1984; संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल, 1988, 1990, 1991, 1992, 1993 और 1994; मानवाधिकार आयोग सम्मेलन, जेनेवा में भाग लेने हेतु भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता, 1993।

श्री वाजपेयी को उनकी राष्ट्र की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 1992 में पद्म विभूषण दिया गया। उन्हें 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार तथा सर्वोत्तम सांसद के लिए भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत पुरस्कार भी प्रदान किया गया। इससे पहले, वर्ष 1993 में उन्हें कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा फिलॉस्फी की मानद डाक्टरेट उपाधि प्रदान की गई। भारत सरकार 2014 में  उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से  अलंकृत किया|

श्री वाजपेयी काव्य के प्रति लगाव और वाक्पटुता के लिए जाने जाते हैं और उनका व्यापक सम्मान किया जाता है। श्री वाजपेयीजी पुस्तकें पढ़ने के बहुत शौकीन हैं। वे भारतीय संगीत और नृत्य में भी काफी रुचि लेते हैं।

श्री वाजपेयी निम्नलिखित पदों पर आसीन रहे:

श्री वाजपेयी से संभाले  पद   


1951 - भारतीय जनसंघ के संस्थापक-सदस्य
1957 - दूसरी लोकसभा के लिए निर्वाचित
1957-77 - भारतीय जनसंघ संसदीय दल के नेता
1962 - राज्यसभा के सदस्य
1966-67 - सरकारी आश्वासन समिति के अध्यक्ष
1967 - चौथी लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (दूसरी बार)
1967-70 - लोक लेखा समिति के अध्यक्ष
1968-73 - भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष
1971 - पांचवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (तीसरी बार)
1977 - छठी लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (चौथी बार)
1977-79 - केन्द्रीय विदेश मंत्री
1977-80 - जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य
1980 - सातवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (पांचवीं बार)
1980-86 - भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष
1980-84, 1986 और 1993-96 - भाजपा संसदीय दल के नेता
1986 - राज्यसभा के सदस्य; सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य
1988-90 - आवास समिति के सदस्य; कार्य-संचालन सलाहकार समिति के सदस्य
1990-91 - याचिका समिति के अध्यक्ष
1991 - दसवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (छठी बार)
1991-93 - लोकलेखा समिति के अध्यक्ष
1993-96 - विदेश मामलों सम्बन्धी समिति के अध्यक्ष; लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता
1996 - ग्यारहवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (सातवीं बार)
16 मई 1996 - 31 मई 1996 - तक-भारत के प्रधानमंत्री; विदेश मंत्री और इन मंत्रालयों/विभागों के प्रभारी मंत्री-रसायन तथा उर्वरक; नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण; कोयला; वाणिज्य; संचार; पर्यावरण और वन; खाद्य प्रसंस्करण उद्योग; मानव संसाधन विकास; श्रम; खान; गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत; लोक शिकायत एवं पेंशन; पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस; योजना तथा कार्यक्रम कार्यान्वयन; विद्युत; रेलवे, ग्रामीण क्षेत्र और रोजगार; विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी; इस्पात; भूतल परिवहन; कपड़ा; जल संसाधन; परमाणु ऊर्जा; इलेक्ट्रॉनिक्स; जम्मू व कश्मीर मामले; समुन्द्री विकास; अंतरिक्ष और किसी अन्य केबिनेट मंत्री को आबंटित न किए गए अन्य विषय।
1996-97 - प्रतिपक्ष के नेता, लोकसभा
1997-98 - अध्यक्ष, विदेश मामलों सम्बन्धी समिति
1998 - बारहवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (आठवीं बार)
1998-99 - भारत के प्रधानमंत्री; विदेश मंत्री; किसी मंत्री को विशिष्ट रूप से आबंटित न किए गए मंत्रालयों/विभागों का भी प्रभार
1999 - तेरहवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (नौवीं बार)
13 अक्तूबर 1999 से 13 मई 2004 - तक-भारत के प्रधानमंत्री और किसी मंत्री को विशिष्ट रूप से आबंटित न किए गए मंत्रालयों/विभागों का भी प्रभार
2004 - चौदहवीं लोकसभा के लिए पुन: निर्वाचित (दसवीं बार)

MP BJP IT Cell
http://www.itcellmpbjp.org/2358238123522368-230923352354234823672361236623522368-2357236623322346237523512368.html
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Films on Atal Behari Vajpayee by Films Division and Door Darshan
http://pib.nic.in/goodgov/filmpage.aspx


अटल बिहारी वाजपेयी की कहानी तस्‍वीरों की जुबानी
अटल बिहारी वाजपेयी - एक परिचय - BBC

http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=32825
http://www.achhikhabar.com/2013/12/17/atal-bihari-vajpayee-life-essay-in-hindi/


Atal Bihari Vajpayee - Biography

Thursday, October 15, 2015

Dr. Suri Bhagavantam in Telugu

డా!సూరి భగవంతం (14  అక్టోబర్ 1909 - 6 ఫిబ్రవరి 1989)


సూరి భగవంతం కృష్ణాజిల్ల ఆకిరిపల్లి గ్రామంలో ఒక సంప్రదాయ కుటుంబంలో జన్మించారు.వీరి పాఠశాల కళాశాల విద్య అంతా నిజాం రాష్ట్రంలో జరిగింది.మెట్రిక్యులేషన్,బి.ఎస్సీలలో ప్రధమ శ్రేణిలో ప్రధమ స్థానం సంపాదించారు.మద్రాస్ విశ్వవిద్యాలయం నుంచి ఎం.ఎస్సీ డిగ్రీ పొందారు.తరువాత కలకత్తాలో ప్రఖ్యాత వైజ్ఞానికుడు సి.వి.రామన్ గారి దగ్గర శిష్యరికం చేశారు.

1932లో ఆంధ్ర విశ్వవిద్యాలయంలొ అధ్యాపకునిగా చేరారు.అప్పటికి ఆయన వయస్సు 22 సంవత్సరాలు మాత్రమే.1938 నాటికి ఆయన ప్రోఫెసర్ అయ్యారు. అంటే వారి 28వ సంవత్సరంలో ప్రొఫెసర్ పదవిని చేపాట్టారు.ఆయన పరిశోధనా పటిమకు గాని ఆంధ్రవిశ్వవిద్యాలయము ఆయనకు డాక్టరేట్ ప్రదానం చేసింది.1948-50ల మధ్య లండన్ లో ఇండియన్ సైంటిఫిక్ లైజాన్ ఆఫీసర్ గా పనిచేశారు.

1952-57ల మధ్య ఊస్మానియా యూనివర్సిటి వైస్-చాన్సలర్ గా పనిచేశారు.అంటే 42 సంవత్సరాల పిన్న వయస్సులో ఆపదవిని చేపట్టారు.అది ఆయన ప్రతిభకు తార్కాణం. 1957లో ఇండియన్ ఇన్స్టిట్యూట్ ఆఫ్ సైన్సెస్(బెంగుళూరు) కు డైరెక్టర్ గా నియమితులయ్యారు. 1961 వరకు ఆ పదవిలో వున్నారు.ఆ తర్వాత కేంద్ర రక్షణ మంత్రిత్వ శాఖకు సైంటిఫిక్ అడ్వైజర్ గా నియమితులయ్యారు.డిఫెన్స్ రిసర్చ్ అండ్ డెవలప్మెంట్ ఆర్గనైజేషన్ (డి.ఆర్.డి.ఓ) కు కూడా డైరక్టర్ గా వ్యవహరించి దానిని అత్యుత్తమ సంస్థగా తీర్చిదిద్దారు.మిస్సైల్స్,ఏరో ఇంజన్స్,ఎలక్ట్రానిక్ యుద్ద పరికరాల నిర్మాణ వంటి రంగాలలో పరిశోధనలకు ఆయన నేత్రుత్వం వహించారు.1961లో 'క్రిస్టల్ సిమెట్రి అండ్ ఫిసికల్ ప్రోపర్టీస్" అనే గొప్ప గ్రంధాన్ని వెలువరించారు. రామన్ ఎఫెక్ట్ పై విస్త్రుతమైన పరిశొధనలు చేశారు.పలు విశ్వవిద్యాలయాలు ఆయనకు గౌరవ డాక్టరేట్ లు ప్రధానం చేశాయి.

ఆయన 1989 ఫిబ్రవరి 6న కన్నుమూశారు.

Friday, September 25, 2015

Pandit Deen Dayal Upadhyaya - Biography Hindi - पंडित दीन दयाल उपाध्याय - सोच विचार




पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को  मथुरा ज़िले के छोटे से गांव  “नगला चंद्रभान”  में हुआ था|  दीनदयाल के पिता का नाम ‘भगवती प्रसाद उपाध्याय’ था| इनकी माता का नाम ‘रामप्यारी’ था|. जब बालक दीनदयाल सिर्फ तीन साल के थे तो उनके पिता का देहांत हो गया| 7 वर्ष की कोमल अवस्था में नदयाल माता की मृत्यु भी देख लिया ।

सन 1937 में दीनदयाल  , इण्टरमीडिएट की परीक्षा दी।  इस परीक्षा में दीनदयाल जी ने सर्वाधिक अंक प्राप्त कर एक कीर्तिमान स्थापित किया. एस.डी. कॉलेज, कानपुर  से उन्होंने बी.ए. की पढ़ाई पूरी की।  यही उनकी मुलाकात श्री सुन्दरसिंह भण्डारी, बलवंत महासिंघे जैसे कई लोगों से हुई।  इन लोगोंका परिचय से  उनमें राष्ट्र की सेवा करने का ख्याल आया. सन 1939 में दीनदयाल प्रथम श्रेणी में बी.ए. की परीक्षा पास की। पंडित जी एम.ए. करने के लिए आगरा चले गये।

वे यहां पर श्री नानाजी देशमुख और श्री भाऊ जुगाडे के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। इसी बीच दीनदयाल जी की चचेरी बहन रमा देवी बीमार पड़ गयीं और  उनकी मृत्यु हो गयी। दीनदयालजी इस घटना से बहुत उदास रहने लगे और एम.ए. की परीक्षा नहीं दे सके।

उन्होंने अपनी चाची के कहने पर  सरकार द्वारा संचालित प्रतियोगी परीक्षा दी।  इस परीक्षा में वे चयनित म्मीदवारों में सबसे ऊपर रहे। वे  बेसिक ट्रेनिंग (बी.टी.) करने के लिए प्रयाग चले गए और प्रयाग में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियाें में भाग लेना जारी रखा। बेसिक ट्रेनिंग (बी.टी.) पूरी करने के बाद वे पूरी तरह से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों में जुट गए और प्रचारक के रूप में जिला लखीमपुर (उत्तर प्रदेश) चले गए। सन् 1955 में वे उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय प्रचारक बन गए।


प. दीनदयाल  साहित्य से भी जुड़े थे और उनके हिंदी और अंग्रेजी के लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित ते रहते थे।  दीनदयाल ने लखनऊ में राष्ट्र धर्म प्रकाशन नामक प्रकाशन संस्थान की स्थापना की और अपने विचारों को प्रस्तुत करने के लिए एक मासिक पत्रिका राष्ट्र धर्म शुरू की. बाद में उन्होंने ‘पांचजन्य’ (साप्ताहिक) तथा ‘स्वदेश’ (दैनिक) की शुरुआत की.

1953 में अखिल भारतीय जनसंघ की स्थापना होने पर उन्हें यूपी का सचिव बनाया गया। . पं. दीनदयाल जी की कुशल संगठन क्षमता के लिए डा. श्यामप्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि अगर भारत के पास दो दीनदयाल होते तो भारत का राजनैतिक परिदृश्य ही अलग होता.

11 फरवरी, 1968 को भारतीय जनसंघ को गहरा आघात सहना पड़ा था, जब उसके नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या कर दी गई थी.



Shri K.N. Govindacharya on Pandit Deendayalji
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पंडित दीन दयाल उपाध्याय - सोच विचार
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Friday, April 3, 2015

PM Narendra Modi - M.P. of Varanasi - Hindi Article वाराणसी सांसद - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


http://www.narendramodi.in/varanasi/hi/


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - 2014 के ऐतिहासिक चुनाव


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के ऐतिहासिक चुनावों से पहले इस प्राचीन नगर की यात्रा के दौरान वाराणसी को भारत की गौरवशाली संस्कृति का उद्गम तथा परंपराओं, इतिहास, संस्कृति और समरसता का संगम स्थल कहा था। वाराणसी से मतदाताओं ने उन्हें रिकॉर्ड अंतर से विजयी बनाया।

उनके लोकसभा क्षेत्र के रूप में वाराणसी एक ऐसे परिवर्तन से रूबरू है, जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी। इस शहर को विश्व विरासत स्थल बनाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2014 में अपना नामांकन दाखिल करने के साथ किया था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ-सफाई को लेकर विशेष जोर देने के साथ ही उत्कृष्ट पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपनी भागीदारी तथा नियमित निगरानी के साथ स्वच्छता अभियान को शुरू किया और इसके नतीजे दिखने लगे हैं।


स्वच्छता, संपर्क और संरक्षण

वाराणसी, जो भारत की विरासत में पहले ही विशेष स्थान बना चुका है, अब एक नया इतिहास रचने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इस प्राचीन शहर को दुनिया के समक्ष धरती के सर्वाधिक स्वच्छ, कनेक्टेड और संरक्षित स्थलों में एक के रूप में प्रस्तुत करने लिए विशेष प्रयास किए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक बड़े अभियान के परिणाम पहले ही दिखने लगे हैं। प्रमुख घाटों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी आज एक हकीकत है और जापानी शहर क्योटो के साथ एक विशेष साझेदारी समझौते से वाराणसी को भारत-जापान संबंधों की विविधता और गहराई तथा इसके मानवीय आयामों को दर्शाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने भारतीय रेल की मदद से और कपड़ा तथा पावरलूम उद्योग का पुनरोद्धार कर इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर भी खास जोर दिया है।

नरेंद्र मोदी और जयापुर: एक अटूट रिश्ता

संकट के समय में बना रिश्ता अटूट होता है और यही बात नरेंद्र मोदी और जयापुर पर लागू होती है। वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उनके नाम की घोषणा होने के बाद नरेंद्र मोदी को गांव में लगी आग के बारे में पता चला और उन्होंने तत्काल अधिकारियों के साथ बात कर उन्हें राहत कार्य में जुटने के लिए कहा।


सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए जयापुर

सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए जयापुर को चुनने के बाद नरेंद्र मोदी का मानना था कि गांव के समग्र विकास के लिए लोगों और उनके प्रतिनिधि को मिलकर काम करना होगा। नरेंद्र मोदी ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसद गांव को गोद नहीं ले रहे बल्कि इस योजना के जरिए गाँव के लोग सांसदों को अपनी छांव में ले रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अच्छा जन प्रतिनिधि को ग्रामीणों के विशाल अनुभवों और समस्याएं सुलझाने की उनकी अंतर्दृष्टि से बहुत कुछ सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना का मतलब गांव में अतिरिक्त धनराशि सुलभ कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चिंत करना है कि योजनाएं सही ढंग से लागू की जाएं और समूचा गांव समस्याएं सुलझाने और विकास सुनिश्चित करने में भागीदारी करे। नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो उन कमियों को दूर करना चाहते हैं, जिनके चलते पिछले 60 वर्षों से गांवों की प्रगति रुकी हुई है।

सामूहिक चेतना की शक्ति का उपयोग

जयापुर में नरेंद्र मोदी ने जनशक्ति और इसके जरिए मिल सकने वाले जबरदस्त परिणामों पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने सामाजिक चेतना पैदा करने और लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति के माध्यम से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने पर अत्यधिक जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक गांव को अपना जन्मदिन या अपना स्थापना दिवस मनाना चाहिए और सभी को इस उत्सव में भाग लेना चाहिए। यह जातिवाद को समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है।


प्रधानमंत्री ने एक बड़ी जनसभा में लोगों से पूछा कि क्या हम यह तय कर सकते हैं कि हम जयापुर को गंदा नहीं होने देंगे? क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भोजन करने से पहले बच्चें अपने हाथ अवश्या धोएंगे? उन्होंने कहा कि इन बातों के लिए सरकार के हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सकारात्मक सामाजिक ऊर्जा से एक आदर्श गांव बनाने में मदद मिलेगी।

नरेंद्र मोदी ने जयापुर गांव के प्रत्येक परिवार से यह भी कहा कि वे बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में मनाएं। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास वाराणसी के लिए कई योजनाएं हैं, जिन्हें वो जनता की ताकत यानी जनशक्ति के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा जयापुर के लोगों से मिलने और उन्हें संबोधित करने के बाद वहां के लोगों ने उनके विचार पर अमल करते हुए बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया और वृक्षारोपण किया। परिवारों ने बताया कि जयापुर में प्रधानमंत्री को सुनने के बाद उन्होंने बेटी के जन्म का उत्सव मनाने के बारे में सोचा।

अपने गांवों को आदर्श बनाना

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर एक गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया गया तो इससे अन्य गांव भी प्रेरित होंगे और अधिकारियों को भी यह पता चलेगा कि कैसे योजनाओं को अच्छी तरह लागू किया जा सकता है। ग्रामीण विकास के अपने विजन पर जोर देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें बड़े शहरों की आपूर्ति संचालित प्रणाली से हटकर गांवों की जरूरतों के अनुसार मांग संचालित प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आकांक्षाएं शहरी क्षेत्रों के लोगों से कम नहीं हैं और उन्हें पूरा करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने सफाई के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि नागरिकों के जीवन में सुधार लाने के लिए इसे एक लंबा सफर तय करना होगा।


“वाराणसी इतिहास से भी पुरातन है, परम्पराओं से भी पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और अगर इन सभी को एक साथ रख दिया जाए तो उनसे भी कहीं अधिक पुराना है।”  ये वाराणसी के लिए मार्क ट्वेन के शब्द हैं।


वाराणसी भारत की गौरवशाली संस्कृति का उद्गम तथा परंपराओं, इतिहास, संस्कृति और समरसता का संगम स्थल है। यह संकट मोचन मंदिर की मंगल भूमि है। यह धरा दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है, जो यहां शांति और मोक्ष की तलाश में आते हैं। सारनाथ में ही गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना प्रथम धर्मोपदेश दिया था। वाराणसी पूजनीय संत रविदास की जन्मस्थली है। बनारस में ही महात्मा कबीर का भी जन्म हुआ, परवरिश हुई और यहीं से उन्होंने अपने ज्ञान का उजियारा दुनिया भर में फैलाया। मिर्जा ग़ालिब ने बनारस को ‘काबा-ए-हिन्दुस्तान’ और ‘चिराग-ए-दैर’ यानि दुनिया की रोशनी कहा था। जब पंडित मदन मोहन मालवीय को शिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए स्थान का चयन करना था, उन्होंने बनारस को ही चुना। गंगा-जमुनी तहज़ीब के महान दूत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जिक्र किये बिना वाराणसी का परिचय अधूरा सा लगता है। वाराणसी के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का प्यार अतुलनीय और अविस्मरणीय है। मुझे बेहद खुशी हुई जब अटल जी की सरकार ने वर्ष 2001 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को भारत रत्न से नवाज़ा।

सच में वाराणसी और यहां के लोगों में कुछ तो ख़ास है। इस देवभूमि का हर निवासी अपने अन्दर कहीं न कहीं देवत्व लिए हुए है। वाराणसी हजारों वर्षों से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का प्रतीक रही है। यह शिव की नगरी है। शिव जो विभिन्न संस्कृतियों के बीच समन्वय सेतु हैं। शिव जो संसार को बुराइयों से बचाने के लिए खुद विष पीकर नीलकंठ कहलाते हैं।

यह माना जाता है कि ये वाराणसी ही है जहां गंगा माँ का सौंदर्य और महत्व उस उच्चतम स्तर को प्राप्त कर लेता है जहाँ गंगा का दर्शन मात्र ही मुक्ति का माध्यम बन जाता है। पर आज यही मोक्षदायिनी गंगा स्वयं अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। हम गंगा नदी में नये प्राण भरने के प्रयास कर रहे हैं और हमने इस पवित्र नदी के पुनरोद्धार के लिए बहुआयामी से तरीके से कार्रवाई शुरू की है।

वाराणसी गंगा-जमुनी संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। हिंदू धर्म में तो ये सर्वाधिक पवित्र शहर माना ही जाता है, लेकिन ये शहर जैन और बौद्ध धर्म में भी काफी महत्व रखता है। गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन पास ही सारनाथ में दिया था। भारत रत्न बिस्मिल्ला खान की शहनाई की गूंज भी हिंदू- मुस्लिम एकता का ऐलान यहीं पर करती रही है। परिणामतः वाराणसी आज आध्यात्मिक ज्ञान का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है।

भगवान विश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ शानदार विरासत से प्रेरणा लेकर हम वाराणसी के वैभवशाली भविष्य के निर्माण के लिए निकल पड़े हैं।

हमारी सोच है कि वाराणसी विश्व विरासत स्थल के तौर पर उभरे जो उपासकों के साथ साथ भारत की संस्कृति को समझने और आत्मसात करने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करे। इसका अर्थ है कि हमें वाराणसी के लिए अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण करना होगा। मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक बार अगर हम पर्यटन को आवश्यक प्रोत्साहन देने में सक्षम हो जाते हैं, तो इससे न केवल अधिक से अधिक पर्यटक यहाँ आयेंगे बल्कि गरीब से गरीब व्यक्ति अपनी आजीविका में इज़ाफ़ा कर सकेगा। ज्यादा सैलानी आएंगे तो यह उन लोगों के लिए लाभप्रद होगा जो मंदिरों से जुड़े हैं, घाटों पर रह रहे हैं और जो गंगा के घाटों से सवारियों का परिवहन करते हैं। समूचा शहर और उससे जुड़े क्षेत्र की काया ही पलट जायेगी।

मैं चाहता हूं कि वाराणसी भारत की बौद्धिक राजधानी बने।


नई दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी है। मुंबई को वित्तीय राजधानी कहा जाता है। इसी कड़ी में मैं चाहता हूं कि वाराणसी भारत की बौद्धिक राजधानी बने। हम काशी को ऐसे शहर के रूप में विकसित करना चाहेंगे जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र हो और जहां ज्ञान का निरंतर प्रवाह हो।
यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जैसे विश्व-स्तरीय शिक्षा संस्थान हैं जिनके संवर्धन और सतत विकास की जरूरत है क्योंकि ये संस्थान न केवल बनारस की पहचान हैं बल्कि भोजपुरी क्षेत्रों सहित पूरे पूर्वांचल में ज्ञान की अलख जलाए रखने के लिए भी ये अपरिहार्य हैं।

वाराणसी अपने हस्त-शिल्प और कारीगरी के लिए विश्व-विख्यात है।

बनारस पर्यटन का बहुत बड़ा केंद्र है और साथ ही अपने हस्त-शिल्प और कारीगरी के लिए विश्व-विख्यात है। आज आवश्यकता है कि हम वाराणसी की समृद्ध विरासत का पुनरुद्धार करें। यहां के कुटीर उद्योगों के साथ ही हस्तशिल्प और हथकरघा व्यवसाय को पुनर्जीवित करें। यहीं पर रोज़गार का सृजन करें। ऐसा करके हम हजारों लोगों को न केवल उनके घर के नज़दीक ही रोजगार दे सकेंगे बल्कि वाराणसी को उसका पुराना गौरव भी लौटा सकेंगे।

वैसे भी वाराणसी ही ऐसी जगह है जहां गंगा उत्तर वाहिनी हैं। शक्तिशाली गंगा की धारा भी यहाँ आकर अपनी दिशा बदल कर मुड़ जाती है। इसलिए अब वाराणसी से ही बड़े परिवर्तन की शुरुआत होगी। देश सुशासन के पथ पर बढ़ रहा है और वाराणसी से निकला यह सन्देश पूरे देश में अलख जगाएगा।


प्रधानमंत्री की यात्राएं


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही 2014 में दो बार वाराणसी आ चुके हैं और भविष्य में अपनी यात्राओं के लिए उत्सुक हैं। आप सभी से मिलने और आपका फीडबैक जानने के लिए अपनी यात्राओं का उपयोग करते हुए वो पहले ही यहां रहने वाले सभी लोगों के लिए कुछ प्रमुख पहलों की शुरुआत कर चुके हैं। नीचे दिए गए लेखों को पढ़कर आप पिछली यात्राओं के बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं और जान सकते हैं कि भविष्य में क्या होने वाला है।


मदन मोहन मालवीय की स्तुति


जब भी मानवता ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है, तब भारत ने विश्व गुरु की भूमिका निभाई है और इसलिए 21वीं सदी भारत के लिए अत्यधिक जिम्मेदारी का समय है क्योंकि विश्व एक बार फिर ज्ञान युग में प्रवेश कर रहा है।

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन की शुरुआत की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी की धरती ने हमें शिक्षा की संस्कृति दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ ही समग्र मानवतावादी दृष्टिकोण विकसित करने के लिए है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर में और समाज के सभी वर्गों में “अच्छी शिक्षा” की बहुत मांग है। यदि भारत के युवाओं को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाए, तो वो दुनिया भर में शिक्षकों की इस मांग को पूरा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा,“यदि एक शिक्षक बाहर जाता है तो उसे फायदा मिलता है और वो पूरी एक पीढ़ी की सोच को प्रभावित करता है।” साथ ही उन्होंने कहा कि मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन इस दिशा में एक कदम है।

नरेंद्र मोदी ने एक इंटर-यूनीवर्सिटी सेंटर की आधारशिला रखी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस कनेक्ट वाई-फाई को लांच किया। प्रधानमंत्री ने युक्ति पहल के तहत छह शिल्पकारों को पुरस्कार दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से उपयुक्त तकनीक के उपयोग के जरिए हमारे शिल्पकारों के कौशल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने युक्ति पहल के तहत छह शिल्पकारों को पुरस्कार दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से उपयुक्त तकनीक के उपयोग के जरिए हमारे शिल्पकारों के कौशल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वाराणसी महोत्सव

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी महोत्सव की शुरुआत की और कहा कि ऐसे आयोजनों से पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने वाराणसी के स्कूलों और शिक्षा संस्थानों से आह्वान किया कि वो वाराणसी की संमृद्ध संस्कृति के विभिन्न पहलुओं में विशेषज्ञता अर्जित करें। इस तरह वो वाराणसी आने वाले पर्यटकों का ध्यान खींचने में अपनी तरफ से योगदान कर सकेंगे।


स्वच्छ भारत के लिए स्वच्छ वाराणसी


“2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि दे सकता है”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में राजपथ से स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के अवसर भारत के नागरिकों का आह्वान करते हुए ये शब्द कहे। एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की दो अक्टूबर को देश के कोने-कोने में शुरुआत हुई। इस अभियान का उद्देश्य दो अक्टूबर 2019 तक एक ‘स्वच्छ भारत’ के स्वप्न को साकार करना है।

वाराणसी एक ऐसा शहर है जिसे उसके ऐतिहासिक घाटों और धार्मिक पूजा स्थलों के लिए जाना जाता है। लेकिन साफ-सफाई का अभाव अक्सर इन स्थानों के रूप और सौंदर्य को बिगाड़ देता है। नरेंद्र मोदी ने नवंबर में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की यात्रा के दौरान स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने वाराणसी में गंगा नदी के किनारे अस्सी घाट पर गंदगी को दूर करने के लिए श्रमदान में हिस्सा लेकर इस अभियान की शुरुआत की।

उन्होंने इस अभियान में शामिल होने और एक स्वच्छ भारत बनाने में योगदान देने के लिए नौ जानेमाने लोगों को नामित भी किया। विकास परियोजनाओं के उद्घाटन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री अगली बार सुशासन दिवस के अवसर पर वाराणसी आए। उन्होंने एक बार फिर झाडू थामी और अस्सी घाट के नजदीक जगन्नाथ मंदिर पर सफाई अभियान में हिस्सा लिया। उनकी पिछली यात्रा के बाद से आम लोगों और संगठनों ने जिस तरह स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाया, उस पर उन्होंने खुशी जताई। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने नौ सुविख्यात लोगों को नामित भी किया।

स्वच्छता अभियान में लोगों की भागीदारी का आह्वान करने से ये अभियान एक राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो गया। स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से लोगों में जिम्मेदारी की भावना पैदा हुई। प्रधानमंत्री ने अपनी बातों और कार्यों से लोगों को प्रेरित कर स्वच्छ भारत के संदेश को फैलने में मदद की। इसके साथ ही साफ-सफाई के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया, जिनका सामना घरों में समुचित शौचालय की कमी के चलते करीब आधे भारतीय परिवारों को करना पड़ता है।

स्वच्छता के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोग साथ आए और इस अभियान में शामिल हुए। खिलाड़ियों से लेकर आध्यात्मिक नेताओं तक, सेना के जवानों से लेकर फिल्मी कलाकारों तक, कारोबारी समुदाय के सदस्यों से लेकर सरकारी अधिकारियों तक, भारत को स्वच्छ बनाने के लिए सभी साथ आ गए। भारत को स्वच्छ बनाने के लिए देश भर में लाखों लोग दिन प्रति दिन सरकारी विभागों, एनजीओ और स्थानीय सामुदायिक केंद्रों के स्वच्छता अभियानों में शामिल हो रहे हैं।
लोगों का जोरदार समर्थन पाकर स्वच्छ भारत अभियान एक जन आंदोलन बन गया है। बड़ी संख्या में नागरिक भी आगे आए हैं और उन्होंने एक साफ और स्वच्छ भारत के लिए प्रतिज्ञा की है। स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत के बाद सड़क साफ करने के लिए झाडू उठाना, कचड़े को साफ करना, सफाई पर ध्यान देना और एक स्वच्छ वातावरण को बनाए रखना आदत बन गई है। लोग जुड़ने लगे हैं और वो इस संदेश को फैलाने में मदद कर रहे हैं कि ‘स्वच्छता ईश्वर की भक्ति के सबसे समीप है।’



वाराणसी और रेल के साथ अनूठा रिश्ता

कल से मैं यहीं, DLW के परिसर में ठहरा हूँ।
चारों तरफ रेल्वे के माहौल ने मुझे मेरे बचपन से जोड़ दिया।

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी की अपनी यात्रा के दौरान डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के विस्तार समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री वाराणसी की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) में रुके थे। वाराणसी की रेलवे इकाई में रुकने से नरेंद्र मोदी के मन में एक रोचक संबंध बना, जिसने उन्हें बचपन की याद दिला दी।

अपनी यात्रा पूरी करने पर उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि डीएलडब्ल्यू में रुकने से उनके मन में अपने बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं जब वह रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशनों के साथ करीब से जुड़े थे।प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह उन्हें यात्रियों और रेलगाड़ियों की याद आई और किस तरह यह उनके लिए एक तरह का भावनात्मक अनुभव था। भविष्य को लेकर नरेंद्र मोदी ने कहा कि बचपन की ये यादें नए संकल्प और नई संभावनाओं को बढ़ावा देंगी।

“बचपन से ही मेरा नाता रेल्वे से रहा,
रेल्वे स्टेशन से रहा, रेल के डिब्बे से रहा।
कल से मैं यहीं DLW के परिसर में ठहरा हूँ। चारों तरफ रेल्वे के माहौल ने मुझे मेरे बचपन से जोड़ दिया। शायद पहली बार
पूरा समय बचपन, वो रेल के डिब्बे, वो यात्री, सबकुछ मेरी आँखों के सामने ज़िंदा हो गया।
वे यादें बहुत ही भावुक थी।
यहां सबका अपनापन बहुत भाया।
सभी कर्मयोगी भाइयों को धन्यवाद।
अब तो मुझे बार बार यहां आना होगा।
फिर बचपन की स्मृतियों के साथ नए संकल्प, संभावनाएं बनेंगी।
माँ गंगा का प्यार और आशीर्वाद हमारे देश को निर्मल बनाये, हमारी सोच को निर्मल बनाये यही प्रार्थना।”

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान नए हाई हार्सपावर डीजल लोकोमोटिव को झंडी दिखाकर रवाना किया और उसे भारत की स्वदेशी क्षमताओं तथा ‘मेक इन इंडिया’ के उनके विजन का उदाहरण बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे “जय जवान, जय किसान” को याद करते हुए कहा इस नारे ने खाद्य उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने यह आशा जताई कि “मेक इन इंडिया” हमें अपनी सभी जरूरतों में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण और इसे सेवा उन्मुख बनाने का वादा किया, ताकि यह देश के विकास का इंजन बन सके। नरेंद्र मोदी ने कहा कि रेलवे के लिए सही एवं सुप्रशिक्षित मानव संसाधन सुनिश्चित करने के लिए चार रेल विश्वविद्यालय स्थापित किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे को सिर्फ़ परिवहन के माध्यम के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे आर्थिक विकास का आधार बनना चाहिए। उन्होंने रेलवे कर्मचारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि भारत में भारतीय रेल सबसे अच्छी सेवा प्रदान करे।


Sunday, March 22, 2015

Smt. Smriti Irani - Biography in Hindi - स्मृति ईरानी - जीवनी






मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्‍मृति ईरानी 23 मार्च, 2015 को नई दिल्‍ली में विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के शिकायत पोर्टल का उद्घाटन करती हुईं।
Picture Source: http://pib.nic.in/photo//2015/Mar/l2015032363386.jpg


स्मृति ईरानी - जीवनी


मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का जन्म 23 मार्च, 1976 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने एक्टिंग के बाद राजनीति में कदम रखा|  उनके दादाजी आरएसएस स्वयंसेवक और मां जन संघ की सद्स्य थी| स्मृति खुद बचपन से आरएसएस का हिस्सा रही हैं।

स्मृति  1998 में मिस इंडिया कॉम्पीटिशन में फाइनलिस्ट रही हैं। स्मृति ने टीवी सीरियल "आतिश" से अपने करियर की शुरूआत की। 2000 में उन्हें एकता कपूर के सीरियल "क्योंकि सास भी कभी बहु थी" में "तुलसी" का लीड किरदार मिला। स्मृति ने अब तक बेस्ट एक्ट्रेस (पॉप्यूलर) के 5 इंडियन टेलीविजन एकेडमी अवॉर्ड्स, 4 आईटीए अवॉर्ड्स जीते हैं। उन्होंने कई सीरियल्स भी प्रोड्यूस किए। 2003 में स्मृति ने भाजपा ज्वाइन की। महाराष्ट्र का युवा उपाध्यक्ष बनॆ। 2004 में दिल्ली से लोक सभा के लिए चुनाव लडी। 2011 में गुजरात से राज्य सभा सदस्य बनी। 2014 में राहुल गाधीको अमेठी में टक्कर दिया।

फिलहाल वे केंद्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाल रही हैं।

इण्डिया टी वी आप की अदालत में स्मृति ईरानी - जीवनी
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India TV

http://www.patrika.com/news/political/happy-birthday-smriti-irani-1012211/

http://www.bhaskar.com/news/CEL-smriti-irani-from-model-to-cabinet-minister-4940207-PHO.html

Sunday, February 15, 2015

Arvind Kejriwal - Hindi Biography






Vyakti Vishesh - Arvind Kejriwal
Delhi Assembly Elections Exit Poll

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ABP News

Tuesday, January 27, 2015

Lala Lajpat Rai - Biography in Hindi - लाला लाजपत राय

28 जनवरी, 1865 को लाला लाजपत राय का जन्म पंजाब के मोगा ज़िले में हुआ था.

उन्होंने हिसार और लाहौर में वकालत शुरू की. बाद में कांग्रेस में भर्ती हुआ और आजादी की लड़ाई में भाग  लिया।



सन् 1914-20 तक लाला लालजपत राय को भारत आने की इजाजत नहीं दी गई.

वे अमेरिका चले गए. वहां ‘यंग इंडिया’ पत्रिका का उन्होंने संपादन-प्रकाशन किया.न्यूयार्क में इंडियन इनफार्मेशन ब्यूरो की स्थापना की.


30 अक्टूबर, 1928 को इंग्लैंड के वकील सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में एक सात सदस्यीय आयोग लाहौर आया.

साइमन कमीशन का विरोध करते हुए उन्होंने ‘अंग्रेजों वापस जाओ’ का नारा दिया तथा कमीशन का डटकर विरोध जताया. इसके जवाब में अंग्रेजों ने उन पर लाठी चार्ज किया.

पुलिस की लाठियों और चोट की वजह से 17 नवम्बर, 1928 को उनका देहान्त हो गया.


http://days.jagranjunction.com/2011/11/17/lala-lajpat-rai-biography-in-hindi/

Web Duniya - Article

Book Details

Video - Kiran Bedi garlanding Lala Lajpat Rai

Bal Sanskar on Lala

Thursday, January 15, 2015

BSP Leader Mayawati in Hindi - मायावती


कुमारी मायावती
जीवन परिचय

जन्म तिथि व स्थान
१५ जनवरी, १९५६ नई दिल्ली
पिता का नाम
श्री प्रभुदास
माता का नाम
श्रीमती रामरती
शिक्षा

बी०ए०, बी०एड०, एलएल०बी०, कालिन्दी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय (दिल्ली) और मेरठ विश्वविद्यालय ( उत्तर प्रदेश) से शिक्षा ग्रहण की ।

व्यवसाय
राजनीति और सामाजिक कार्यकर्त्ता तथा अधिवक्ता ।

जिन पदों पर कार्य किया

·              लोक सभा के लिए पहली बार १९८९ में निर्वाचित ।
·              लोक सभा के लिए दूसरी बार १९९८ में निर्वाचित ।
·              लोक सभा के लिए तीसरी बार १९९९ में निर्वाचित तथा नेता, बहुजन समाज पार्टी संसदीय दल भी बनीं ।
·              लोकसभा के लिए चौथी बार मई, २००४ में निर्वाचित (इस्तीफा-२६ जून २००४) ।
·              राज्यसभा के लिए पहली बार अप्रैल १९९४ (इस्तीफा- 25 अक्टूबर, 1996)।
·              राज्यसभा के लिए दूसरी बार जुलाई २००४ में निर्वाचित तथा नेता, बहुजन समाज पार्टी संसदीय दल,  राज्य सभा भी बनीं (इस्तीफा- 5 जुलाई, 2007) ।
·              सदस्य, निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान सभा प्रथम बार १९९६ ।
·              सदस्य, निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान सभा दूसरी बार २००२ (इस्तीफा-२8 अगस्त, २००3)  ।
·              मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश प्रथम बार ३ जून, १९९५ से १८ अक्टूबर, १९९५ ।
·              मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश दूसरी बार २१ मार्च, १९९७ से २० सितम्बर, १९९७ ।
·              मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश तीसरी बार ३ मई, २००२ से २९ अगस्त, २००३ ।
·              मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश चौथी बार १३ मई, २००७ से १५ मार्च, २०१२
·              सदस्य निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान परिषद् प्रथम बार, २९ जून, २००७ तथा दूसरी बार ७ जुलाई २०१० ।
·              बहुजन समाज पार्टी की उपाध्यक्ष रहीं और अब अध्यक्ष हैं ।
सामाजिक और सांस्कृतिक कार्य कलाप
दलितों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए समाज सेवा।
विशेष अभिरूचि
समाज के कमजोर वर्गों को संगठित करना।

विदेश यात्राएं

कनाडा (टोरण्टो), डेनमार्क, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया,  स्विटजरलैण्ड (ज्यूरिच), ताइवान, यू०के० (लंदन और वाँल्वर हैम्पटन), यू0एस0ए0 (आरलैण्डो, वाशिंगटन और न्यूयार्क) ।
प्रकाशित पुस्तक
"बहुजन समाज और उसकी राजनीति"  नामक पुस्तक अक्टूबर २००० में (हिन्दी में) तथा इसका अंग्रेजी संस्करण अक्टूबर २००1 में प्रकाशित।
"मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट का सफरनामा"  भाग-1 व भाग-2 जनवरी, २००6 में प्रकाशित (अब तक 4 खण्ड प्रकाशित)।
“A Travelogue of My Struggle-Ridden Life And BSP Movement, English, (अब तक 4 खण्ड प्रकाशित)।
अन्य जानकारी
अध्यापक, दिल्ली प्रशासन, १९७७-८४
स्थायी पता
सी-57, इन्द्रपुरी, नई दिल्ली- 110012
 http://uplegisassembly.gov.in/mayawatibiodatahindi.htm



मायावती का जन्म १५ जनवरी १९५६ को नयी दिल्ली में एक सरकारी कर्मचारी प्रभु दयाल की पत्नी रामरती की कोख से हुआ। बाद में उनके पिता प्रभु दयाल जी भारतीय डाक-तार विभाग के वरिष्ठ लिपिक के पद से सेवा निवृत्त हुए।  इनका पैतृक गाँव बादलपुर है जो उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में स्थित है। बी०ए० करने के बाद उन्होंने दिल्ली के कालिन्दी कॉलेज से एल०एल०बी० की उपाधि प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त उन्होंने बी०एड० भी किया हुआ है। राजनीति में आने से पूर्व वे दिल्ली के एक स्कूल में एक शिक्षिका के रूप में कार्य करती थीं। सन् १९७७ में कांशीराम के सम्पर्क में आने के बाद उन्होंने  कांशीराम के संरक्षण के अन्तर्गत  उनकी कोर टीम का हिस्सा रहीं, जब सन् १९८४ में बसपा की स्थापना हुई थी।

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ABP News

Ek Bura Admi - A Film based on the Story of Mayawati

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Rajshri


Ek Bura Aadmi Trailer
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hscentertainment








2015

लोकसभा चुनाव में एक भी सीट न जीतने वाली बीएसपी इसके बाद हुए महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में भी हाथी नहीं दौड़ा सकी.
इससे निबटने के लिए मायावती ने एक बार फिर पार्टी की मरम्मत का रास्ता अख्तियार किया
3 जनवरी को मायावती ने अपने बागी सांसद शुमार जुगल किशोर से सभी संगठनात्मक दायित्व वापस ले लिए.  इसी क्रम में 2  जनवरी को कानपुर में बीएसपी की मंडलीय बैठक में प्रभावशाली जोनल कोऑर्डिनेटर रहे आसकरन शंखवार को पार्टी निर्देशों का पालन न करने के आरोप में बाहर कर दिया गया. इतना ही नहीं, जोनल कोऑर्डिनेटर पी.सी.गौतम, कानपुर के जिलाध्यक्ष जयनारायण कुरील, पूर्व एमएलसी श्रीनाथ एडवोकेट जैसे प्रभावशाली दलित नेताओं से भी मायावती किनारा कर चुकी हैं.

http://aajtak.intoday.in/story/mayawati-is-trying-to-make-big-changes-in-bsp-1-795139.html


http://www.dalitmat.com/index.php?option=com_content&view=article&id=1202:dalit-face-to-bahen-ji&catid=167:shakhsiyat&Itemid=630

Articles on Management Knowledge

http://nraomtr.blogspot.com/2015/01/mba-core-management-knowledge-one-year.html

http://nraomtr.blogspot.com/2015/01/zuckerberg-narayana-rao-reading.html

Thursday, December 25, 2014

Bharat Ratna Pandit Madan Mohan Malaviya - Hindi - भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी




मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयाग (भारती भवन, इलाहाबाद) में  हुआ था।
मदन की आरंभिक शिक्षा इलाहाबाद में पूरी हुई। उन्होंने 1878 में प्रयाग सरकारी हाई स्कूल से मैट्रिक पास की।

कुछ दिन वे अध्यापक बने। 1885 में उन्होंने इंडियन यूनियन वीकली का संपादन किया। 1887 में, उन्होंने सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए भारत धर्म महामंडल की स्थापना की। उन्होंनेे हिंदुस्तान का संपादन भी किया। 1889 में, उन्होंने इंडियन ओपिनियन का संपादन किया। 1891 में, वह बैरिस्टर बन गए और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत आरंभ कर दी। उनका  वकालत  का काम अच्छा   चल रहा था । लेकिन  समाज  सेवा के  लिए 1913 में उन्होंने वकालत छोड़ दी।

मालवीय जी 1916 तक इलाहाबाद में नगर पालिका के सदस्य रहे और कई वर्षों तक इंडियन नेशनल कांग्रेस के सम्मानित सदस्य भी रहे।

28 नवंबर, 1911 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के लिए कार्य आरंभ करने के लिए सोसायटी बनाई गई। पहली अक्तूबर, 1915 को बी एच यू एक्ट पारित हो गया। वो कई साल यूनिवर्सिटी की कुलपति का काम निभाया। 

4 फरवरी, 1916  को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी गई। वो कई साल यूनिवर्सिटी की कुलपति का काम निभाया।

मालवीय जी का निधन 1946 में हुआ




भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी के जीवन का मुख्य संघठन



25.12.1861

इलाहाबाद में जन्म

1878

मिर्जापुर में कुंदन देवी के साथ विवाह

1884

कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक

जुलाई 1884

इलाहाबाद जिला स्कूल में शिक्षण

दिसंबर 1886

दादाभाई नारौजी की अध्यक्षता में कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन में परिषदों में प्रतिनिधित्व के मामले पर भाषण

जुलाई 1887

कालकंकड में हिंदोस्तान का संपादन। भारत धर्म मंडल का स्थापना सम्मेलन

जुलाई 1889

संपादन छोड़कर इलाहाबाद में एलएलबी  पढ़ाई  शुरू किया।

1891

एलएलबी पास कर इलाहाबाद जिला न्यायालय में वकालत शुरू की

दिसंबर 1893

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत

मार्च 1898

यू.पी के गवर्नर को हिंदी के बारे में ज्ञापन सौंपा

1902-1903

इलाहाबाद में हिंदू बोर्डिंग हाउस का निर्माण

1903-1912

प्रांतीय परिषद में सदस्य के रूप में सेवा

1904

काशी नरेश की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव

जनवरी 1906

इलाहाबाद के कुंभ मेले में सनातन धर्म महासभा का संचालन किया। उदार सनातन धर्म का प्रचार किया। बनारस में विश्वविद्यालय खोलने का फैसला

1907

अभ्युदय का संपादन। सनातन धर्म व लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रचार

1909

अंग्रेजी दैनिक लीडर का संपादन। लाहौर कांग्रेस की अध्यक्षता

लाहौर  हिन्दू सभा की अध्यक्षता


अक्टूबर 1910

पहले हिंदी साहित्य सम्मेलन में अध्यक्षीय संबोधन

22.11.1911

हिंदू विश्वविद्यालय सोसाइटी का गठन

दिसंबर 1911

50 साल की उम्र में वकालत छोड़ दी। देशसेवा और विश्वविद्यालय स्थापना के लिए कार्य करने का फैसला

फरवरी 1915

अपनी अध्यक्षता में प्रयाग सेवा समिति का गठन

अक्टूबर 1915

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय विधेयक पास हुआ

04 फरवरी 1916

विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई

मार्च 1916

परिषद में ठेका मजदूरी व्यवस्था के खिलाफ प्रस्ताव

1916-18

सदस्य, औद्योगिक आयोग

1918

सेवा समिति द्वारा स्काउट एसोसिएशन का गठन

दिसंबर 1918

दिल्ली में वार्षिक कांग्रेस सम्मेलन की अध्यक्षता

फरवरी 1919

परिषद में रौलेट बिल पर बहस। परिषद से इस्तीफा

नवम्‍बर 1919-सितंबर1939

बीएचयू के वाइस चांसलर

19 अप्रैल 1919

बम्‍बई में हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता

जनवरी 1922

सर्वदलीय सम्‍मेलन का संचालन

16 दिसम्‍बर 1922

लाहौर में हिंदू मुस्लिम सद्भाव पर भाषण

1924

जिला और विधानसभा में स्वतंत्र पार्टी का गठन। इलाहाबाद में संगम पर सत्याग्रह। स्टील संरक्षण बिल पर बहस।

अगस्त 1926

लाला लाजपत राय के साथ कांग्रेस स्वतंत्र पार्टी का गठन

फरवरी 1927

कृषि आयोग के समक्ष बयान

दिसंबर 1929

बीएचयू में दीक्षांत भाषण। छात्रों से देशसेवा व देशभक्ति का आह्वान

1930

विधानसभा से इस्तीफा। दिल्ली में गिरफ्तारी। 6 महीने की सजा।

5 अप्रैल 1931

कानपुर में हिंदू मुस्लिम एकता पर भाषण

1931

लंदन में गांधी जी के साथ गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया

मार्च 1932

बनारस में अखिल भारतीय स्वदेशी संघ का गठन

20 अप्रैल 1932

दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष नामित। गिरफ्तारी।

अप्रैल 1932

कलकत्ता कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में आसनसोल में गिरफ्तारी

जनवरी 1936

इलाहाबाद में सनातन धर्म महासभा का संचालन।


नवंबर 1939

जीवनपर्यंत बीएचयू के रेक्टर नियुक्त

1941

गोरक्षा मंडल की स्थापना

जनवरी 1942

बीएचयू के रजत जयंती समारोह में गांधी जी का दीक्षांत

12 नवंबर 1946

मृत्यु

http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=32831

Friday, September 5, 2014

Dr. Homi Jahangir Bhabha - Biography in Hindi




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