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Monday, October 28, 2024

Narendra Modi - Biography - Hindi - नरेन्द्र मोदी की जीवनी

 Strategic Missteps, Not Modi’s Declining Brand, Behind BJP’s Election Challenges.

SHARAN SETTY,

Aug 22, 2024.

Swarajya Magazine.

Modi Brand After 2024.

https://guide-india.blogspot.com/2024/10/modi-brand-after-2024.html


नरेंद्र मोदी की जीवनी पर नए पुस्तक 

Shri Mohanji Bhagwat, Sar Sanghachalak, RSS on Shri Narendra Modi
Interview at the time releasing the book "Making of the Legend" on 12 July 2017

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People need to read about PM Modi's personality, actions, leadership: Mohan Bhagwat
Zee News
12 July 2017


माननीय अमित शाजी - मोदीजी की जीवनी पर पुस्तक के बारे में.
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Book

Commonman Narendra Modi (Hindi)

Kishore Makvana
Prabhat Prakashan, 2014 - 339 pages
https://books.google.co.in/books?id=JGdnBQAAQBAJ

Narendra Modi - Hindi - 2017 - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


Source: http://pib.nic.in/newsite/pmphoto.aspx?mincode=3

नरेंद्र मोदीके बारे में नरेंद्र मोदी - सुनिये
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Aaj Tak

नरेंद्र दामोदरदास मोदी - मन की बात 

26 June 2016



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नरेंद्र दामोदरदास मोदी की दो साल का पालन

26 May 2016
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Zee News

बदलता भारत बढ़ता भारत  - पूरा कार्यक्रम 

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भारतीय जनता पार्टी
Bharatiya Janata Party


बदलता भारत बढ़ता भारत - मोदीजी का भाषण 

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 नरेन्द्र मोदी की डिग्री
9 May 2016
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IndiaTV  uploaded on 9 May 2016

चुनाव की जीत के बाद मोदीजी का पहला भाषण - वडोदरा में
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अबकी बार मोदी सरकार - सच हो गया
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नरेन्द्र मोदी की जीवनी - 1
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नरेंद्र दामोदरदास मोदी की
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नरेन्द्र मोदी की जीवनी - 2
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उत्तर गुजरात के महेसाणा जिले में स्थित एक छोटे से गांव वडनगर में सितंबर, 1950 को श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म हुआ|

1967 में उन्होंने गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की सेवा की थी।


भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करने वाले संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (आरएसएस) से उन्होंने  1958 में शुरुआत की और निःस्वार्थता, सामाजिक जवाबदारी, समर्पण एवं राष्ट्रवाद की भावना को आत्मसात किया।

आरएसएस में अपने कार्यकाल के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने  19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) की दीर्घावधि तक रहे भयंकर ‘आपातकाल’  के वक्त अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई। इस पूरे समयकाल के दौरान भूमिगत रहते हुए मोदी जी ने गुप्त तरीके से केन्द्र सरकार की फासीवादी नीतियों के खिलाफ जोशीले अंदाज में जंग छेड़ते हुए लोकतंत्र की भावना को जीवित रखा।

1987 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर उन्होंने राजनीति की मुख्य धारा में प्रवेश किया। एक वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महामंत्री नियुक्त किया गया।उन्होंने सच्चे अर्थों में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के चुनौतीपूर्ण कार्य का बीड़ा उठाया, जिसकी वजह से पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलना शुरू हो गया और अप्रैल, 1990 में  केन्द्र में गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई। यह राजनीतिक गठबंधन कुछ महीनों के अंतराल के बाद टूट गया|

श्री मोदी को दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक, श्री लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की लंबी रथयात्रा (1990) और दूसरी, देश के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी से उत्तर में कश्मीर तक मुरली मनोहर जोशी  की यात्रा।

1995 में भाजपा अपने दम पर गुजरात में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने में सफल रही।

1995 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया और देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेवारी सौंपी गई, जो किसी भी युवा नेता के लिए बड़ी उपलब्धि की बात थी। 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) के पद पर पदोन्नत किया गया।

अक्टूबर, 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में  मोदी नियुक्त हुआ|  7 अक्टूबर, 2001 को जब श्री मोदी ने शपथ ग्रहण की, तब गुजरात जनवरी, 2001 में आए विनाशक भूकंप सहित अन्य कई प्राकृतिक आपदाओं के विपरीत प्रभावों से गुजर रहा था। श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिकूल परिस्थितयों को किस तरह सर्वांगी विकास के अवसरों में तब्दील कर दिया, भुज शहर ( भूकंप में  नाश हो गया शहर  ) उसका जीता-जागता सबूत है।

गोध्रा दंगें के ऊपर मोदी की भाषण - गुजराती बाषा में
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श्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वांगीण सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त तरीके से सामाजिक क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रीत कर राज्य के सर्वांगी विकास के लिए पांच सूत्रीय रणनीति- पंचामृत योजना की परिकल्पना की।

अपनी प्रशासनिक सूझबूझ, सपष्ट दूरदर्शिता और चारित्र्य के अखंडता सहित उनकी इन सभी कुशलताओं की वजह से दिसम्बर 2002 के आम चुनावों में भव्य विजय हासिल की और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ चुन ली गई। 2007 के चुनावों में भी फिर से एक बार श्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा को भारी बहुमत मिला।

2012 के विधानसभा चुनाव में फिर से एक बार श्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने भारी बहुमत प्राप्त किया। भाजपा को 115 सीटें मिली और 26 दिसम्बर 2012 को मोदी ने लगातार चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।


मोदीजी की प्रधान मंत्री की रूप में शपध ग्रहण 26 May 2014
http://pib.nic.in/photo//2014/May/l2014052653989.jpg


भारतीय जनता पार्टी ने 2014(२०१४) चुनाव का प्रचार समिति का अध्यक्ष पद मोदीजीको दिय।  कुछ दिन बाद मोदीजीको प्रधान मंत्री प्रत्यासी घोषित किया गय। भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमन्त्री प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत का भ्रमण किया। देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियाँ समेत  कुल 5827 कार्यक्रम किये। एक अद्भुत चुनाव प्रचार कार्यक्रम लाखों कार्यकर्तोंकी मदत लेकर मोदीजीने चलय। नतीजा
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की। चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 336 सीटें जीतकर सबसे बड़े संसदीय दल के रूप में उभरा और  अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों पर विजय प्राप्त की।


20 मई 2014 को संसद भवन में  बैठक में नरेन्द्र भाई मोदी को सर्वसम्मति से  भाजपा संसदीय दल और  राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का नेता चुना गया।  नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति से मिलने राष्ट्रपति भवन गये।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनका स्वागत किया और भारी बहुमत से विजयी होने की बधाई भी दी। राष्ट्रपति ने नरेन्द्र मोदी को भारत का 15वाँ प्रधानमन्त्री नियुक्त किय।


नरेन्द्र  मोदी ने सोमवार 26 मई, 2014 को शाम 6 बजे प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली।

प्रधान मंत्रीजी का भाषण - आजादी दिन का भाषण 15 अगस्त 2014 

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ABP News Upload
स्वतंत्रता दिवस 2014 के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण पढ़ने के लिये।

    picture source: pib.nic.in
भारत का प्रधान मंत्री 15 (१५) अगस्त 2014  के दिन देश को सम्बोधित कर रहें है।


14 November 2014
जब मोदी अमेरिका गए थे, उन्होंने खाद्य सुरक्षा पर भारत की चिंताओं की जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को दी थी| अमेरिका भारत की चिंताओं को माना।  ताजा बदलाव से खाद्य सुरक्षा के मामले में ऐतिहासिक समझौते की जमीन मजबूत हो गई है।
http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/india-rejoices-as-us-takes-a-u-turn-on-wto/articleshow/45137856.cms

16 November 2014
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज के तरीके की प्रशंसा करते हुए केंद्रीय मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने  कहा कि वह न तो खुद सोते हैं और न ही अपनी कैबिनेट के सदस्यों को सोने देते हैं|
http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/hyderabad/pm-neither-sleeps-nor-allows-us-to-sleep-venkaiah-naidu/articleshow/45167808.cms

नरेंद्र मोदी सरकार पहले साल

विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने सरकार के एक साल पूरा होने पर विदेश नीति की दशा, दिशा और उपलब्धियों का ब्योरा  दिया। उन्होंने कहा कि अब विदेश नीति तीन कसौटियों पर परखी जा रही है - संपर्क, संवाद और परिणाम। पिछले एक साल में 101 देशों से संपर्क-संवाद साधा गया है और नया मंत्र है - विकास के लिए कूटनीति का।  पीएम मोदी की सक्रियता पर उन्होंने कहा कि  मोदीजी एक  'अतिसक्रिय' प्रधानमंत्री हैं।
http://khabar.ndtv.com/news/india/proactive-pm-not-a-challenge-but-a-support-says-sushma-swaraj-767473


न्यूयार्क टाइम्स ने एक समाचार विश्लेषण में कहा कि ‘‘ विदेश से देखें तो भारत उभरता हुआ सितारा नजर आ रहा है और इस साल इसके चीन से भी आगे निकलकर विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है। लेकिन भारत में रोजगार की वृद्धि सुस्त बनी हुई है, कारोबारी इंतजार करो और देखो का रच्च्ख अपना रहे हैं।’’
http://www.jansatta.com/international/us-media-critical-of-narendra-modi-first-year-in-office/27754/ 

सरकार ने पीएमओ की गरिमा बढ़ाई
विदेशों में देश का सम्मान बढ़ा
एक साल में बीजेपी ने विकासदर को 4.4 से 5.7 तक पहुंचाया
http://khabar.ndtv.com/news/india/modi-government-has-restored-the-pride-of-prime-ministers-office-amit-shah-766052


सीआईआई के अध्यक्ष सुमित मजूमदार ने कहा है कि पिछले एक साल में एनडीए सरकार ने आर्थिक हालात में बड़ा बदलाव कर दिया है। इसके चलते उपभोक्ताओं और निवेशकों में भरोसा बढ़ा है।

श्री नरेन्‍द्र मोदी - शरीर

कद - फुट/इंच 5"7"
वजन - 68 किलो
छाती - 38
कमर - 34



देश के 70वें स्वतंत्रता दिवस (15 August 2016) 


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्‍ली में लाल किले की प्राचीर से देश के 70वें स्वतंत्रता दिवस (15 August 2016) के अवसर पर संबोधित किया। उनके भाषण के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

• आजादी के इस पावन पर्व पर सवा सौ करोड़ देशवासियों को, विश्‍व में फैले हुए सभी भारतीयों को लाल किले की प्राचीर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
• आजादी का यह पर्व, 70वां वर्ष एक नया संकल्‍प, नई उमंग, नई ऊर्जा, राष्‍ट्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्‍प पर्व है।
• आज हम जो आजादी की सांस ले रहे हैं, उसके पीछे लक्ष्याव्धि महापुरुषों का बलिदान है, त्‍याग और तपस्‍या की गाथा है।
• वेद से विवेकानंद तक, उपनिषद् से उपग्रह तक, सुदर्शन चक्रधारी मोहन से ले करके चरखाधारी मोहन तक, महाभारत के भीम से ले करके भीमराव तक, एक हमारी लम्‍बी इतिहास की यात्रा है, विरासत है।
• भारत की उम्र 70 साल नहीं है, यह यात्रा 70 साल की है।
• अब स्वराज्य (Self-Governance) को सुराज्य (Good-Governance) में बदलना, ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प है।
• पंचायत हो या Parliament हो, ग्राम प्रधान हो या प्रधानमंत्री हो, हर किसी को, हर Democratic Institution को सुराज्य (Good-Governance) की ओर आगे बढ़ने के लिए अपनी जिम्मेवारियों को निभाना होगा, अपनी जिम्मेवारियों को परिपूर्ण करना होगा।
• भारत के पास अगर लाखों समस्याएं हैं तो सवा सौ करोड़ मस्तिष्क भी हैं जो समस्याओं का समाधान करने का सामर्थ्य भी रखते हैं।
• शासन संवेदनशील होना चाहिए, शासन उत्‍तरदायी होना चाहिए।
• शासन में सुराज के लिए पारदर्शिता पर बल देना उतना ही महत्‍वपूर्ण है।

• Group ‘C’ और Group ‘D’ 9,000 पदों पर कोई इंटरव्‍यू प्रक्रिया नहीं होगी।
• हमें अपने काम की रफ्तार को तेज करना होगा। गति को और आगे बढ़ाना होगा।
• Renewable Energy पर हमारा बल है। • wind energy में पिछले एक साल के भीतर-भीतर करीब-करीब 40 प्रतिशत हमने वृद्धि की।

• हमने 60 सप्ताह में चार करोड़ नए लोगों को रसोई गैस के connections दिए।
• सामान्य व्यक्ति देश की अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा का हिस्सा नहीं था। हमने 21 करोड़ लोगों को जनधन से जोड़कर असंभव को संभव किया।
• हिन्दुस्तान के गांवों में दो करोड़ से ज्यादा शौचालय बन चुके हैं। 70 हजार से अधिक गांव आज खुले में शौच जाने की परम्परा से मुक्त हो चुके हैं।
• उन 18 हजार गांवों में जहां बिजली नहीं पहुंची है 18 हजार गांवों में से दस हजार गांवों में आज बिजली पहुंच गई है।
• साढ़े तीन सौ रुपये में बिकने वाला बल्‍ब, सरकारी intervention का परिणाम यह हुआ कि आज हम 50 रुपये में वो बल्‍ब बांट रहे हैं।
• 13 करोड़ एलईडी बल्‍ब बंट चुके हैं। 77 करोड़ बल्‍ब बांटने का संकल्‍प है। इससे 20 हजार मेगावाट बिजली बचेगी, मतलब करीब-करीब सवा लाख करोड़ रुपया बच जाएगा।
• हमारे लगातार कदमों के कारण Inflation rate हमने 6 percent से ऊपर जाने नहीं दिया है।
• महंगाई रोकने में हमने भरपूर कोशिश की है। गरीब की थाली को महंगी नहीं होने दूंगा।
• हमने जमीन की सेहत पर ध्यान दिया। हमने स्वाइल हेल्थ कार्ड और जल प्रबंधन पर बल दिया है।
• जब नीति साफ हो, नीयत स्पष्ट हो, तब निर्णय करने का जज्बा भी कुछ और होता है।
• हमने जल प्रबंधन, जल सींचन और जल संरक्षण पर बल दिया है। per drop-more crop, Micro-irrigation इसको हम बल दे रहे हैं। 90 से ज्‍यादा सिंचाई की योजनाएं आधी-अधूरी ठप्‍प पड़ी थीं, हमने बीड़ा उठाया है सबसे पहले उन योजनाओं को पूरा करेंगे।

• हमारे देश के वैज्ञानिकों ने 131 से ज्‍यादा नए कृषि के योग्‍य बीज तैयार किए हैं।
• हम खाद की कमी दूर करने और सबसे ज्‍यादा खाद उत्‍पादन करने में सफल हुए हैं।
• प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना- पहली बार कम से कम प्रीमियम से अधिक से अधिक वो भी गारंटी के साथ फसल बीमा योजना देने का काम।
• फसल के उत्‍पादन को 15 लाख टन अन्‍न के संरक्षण के लिए नए गोदामों का निर्माण। •
• हम isolated development की जगह पर integrated development की ओर बल दे रहे हैं। हम entitlement से छोड़कर के empowerment पर ध्‍यान दे रहे हैं।
• साढ़े सात लाख करोड़ रुपए के करीब-करीब 118 project, वो किसी न किसी सरकार ने प्रारंभ किए थे, लटके पड़े थे, पूरा करने की शुरुआत की।
• योजनाओं का अटकाना, योजनाओं का delayed होना, रुपयों की बर्बादी होना एक प्रकार से criminal negligence है और उससे हमने पार करने का प्रयास किया है।

• गन्‍ना किसान का हजारों करोड़ रुपयों का बकाया था, करीब-करीब 95% किसानों को गन्‍ने का दाम चुका दिया गया।
• 5 करोड़ गरीब परिवारों को गैस का चूल्‍हा तीन साल में पहुंचाने का बीड़ा।
• post offices को payment bank में convert करने की दिशा में कदम उठाया गया। एक साथ देश के गांवों तक बैंकों का जाल बिछेगा, जन-धन account का लाभ मिलेगा और सामान्‍य मानव के लिए MNREGA का पैसा भी अब आधार के द्वारा उसके खाते में जा रहा है।
• Air India को Operational Profit में लाने सफल हुए हैं। पहली बार BSNL को Operational Profit में लाने में हमें सफलता मिली है। आज Shipping Corporation of India फायदे में आया है।

• Foreign Direct Iinvestment के मामले में हमारा देश आज पंसदीदा देश बना।
• विकास दर में देश की बड़ी-बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था को भी हमने Growth rate की दुनिया में GDP में हमने पीछे छोड़ दिया है।
• GST का जो कानून पास हुआ, वो भी उसमें एक ताकत देने वाला काम हुआ है।
• मुद्रा योजना का लाभ साढ़े तीन करोड़ से ज्‍यादा परिवारों ने लिया। उसमें अधिकतम नये लोग थे जो बैंक के दरवाजें पर पहुंचे। उसमें भी 80% करीब-करीब SC, ST, OBC के थे और उसमें भी बैंक में, मुद्रा बैंक में लोन लेने वाली 80% महिलाएं हैं।
• माताएं-बहनें प्रसूति के बाद छुट्टी 26 हफ्ते की कर दी है, ताकि मां अपने बच्‍चे का लालन- पालन कर सके।
• हमने एक किसानों के लिए मंडी e-NAM की योजना की है। आज किसान अपना माल online हिंदुस्तान की किसी भी मंडी में बेच सकता है।

• भारत को जोड़ने की दिशा में रामानुजाचार्य जी कहते थे भगवान के सभी भक्‍तों को, भेदभाव और ऊंच-नीच का ख्‍याल किए बिना सेवा करो। उम्र-जाति के कारणों की वजह से किसी का भी अनादर मत करो, हर किसी का सम्‍मान करो।
• देश में सबसे ज्‍यादा Software निर्यात हो रहा है, देश में 50 से ज्‍यादा नई मोबाइल की फैक्ट्रियां लगी हैं, ये सारी बातें नौजवानों के लिए अवसर देती हैं।

• विविधता में एकता, ये हमारी सबसे बड़ी ताकत है, एकता का मंत्र हमारी जड़ों से जुड़ा हुआ है।
• हम सम्मान देना जानते हैं, हम सत्कार करना जानते हैं, हम समावेश करना जानते हैं इस महान परंपरा को लेकर के हम चले हैं और इसलिए हिंसा और अत्याचार का हमारे देश में कोई स्थान नहीं है।
• ये देश हिंसा को कभी सहन नहीं करेगा, ये देश आतंकवाद को कभी सहन नहीं करेगा, ये देश आतंकवाद के सामने कभी झुकेगा नहीं, माओवाद के सामने कभी झुका नहीं।
• गरीबी से लड़ेंगे तो हम तबाही से निकलकर के समृद्धि की ओर चल पड़ेंगे और इसलिए मैं सभी पड़ोसियों को गरीबी से लड़ने के लिए निमंत्रण देता हूं।

• किसी गरीब परिवार को आरोग्‍य की सेवाओं का लाभ लेना है, तो वर्ष में एक लाख रुपये तक का खर्च भारत सरकार उठाएगी।
• एक समाज, एक सपना, एक संकल्‍प, एक दिशा, एक मंजिल इस बात को ले करके हम आगे बढ़े।
भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय हिंद।


Biblography

http://www.narendramodi.in/hi/the-cm/

http://www.narendramodi.in/hi/practical-dreamer/

http://www.narendramodi.in/hi/international/

दूरद्रष्टा नरेन्द्र मोदी
http://pustak.org/bs/home.php?bookid=6922

Excerpts from Various Articles


नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे. 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी. मोदी आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे. लेकिन जब मोदी ने चाय की दुकान खोली तो शाखाओं में उनका आना जाना कम हो गया. बाद में  मोदीको प्रचारकों के लिए चाय-नाश्ता बनाने का काम मिला|

 गुजरात आरएसएस के दफ्तर हेडगेवार भवन में सुबह नरेंद्र मोदी प्रचारकों के लिए चाय नाश्ता बनाते थे. इसके बाद हेडगेवार भवन के सारे कमरों की सफाई में जुट जाते थे. आठ नौ कमरों की सफाई के बाद अपने और वकील साहब के कपड़े धोने की बारी आती थी.

नरेंद्र मोदी बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे. आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे. आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था. इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में आने वाली हर चिट्ठी को खोलने का काम भी नरेंद्र मोदी को ही करना होता था.

नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया.

आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में ट्रेनिंग लेकर नरेंद्र मोदी गुजरात आरएसएस प्रचारक बनकर लौटे.
http://aajtak.intoday.in/story/modi-did-service-of-indian-soldiers-during-indo-pak-war.-1-716386.html

राजनीतिक जीवन

1974 में देश के प्रसिद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस) के स्वयं सेवक के रूप में उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की। यहीं उन्हें निस्वार्थता, सामाजिक दायित्वबोध, समर्पण और देशभक्‍ति के विचारों को आत्म सात करने का अवसर मिला। अपने संघ कार्य के दौरान नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर महत्त्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिर चाहे वह 1974 में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ चलाया गया आंदोलन हो, या 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) चला अत्यंत प्रताडि़त करने वाला ‘आपात काल’ हो।

भाजपा में प्रवेश

1987 में भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) में प्रवेश कर उन्होंने राजनीति की मुख्यधारा में क़दम रखा। सिर्फ़ एक साल के भीतर ही उनको गुजरात इकाई के प्रदेश महामंत्री (जनरल सेक्रेटरी) के रूप में पदोन्नत कर दिया गया। तब तक उन्होंने एक अत्यंत ही कार्यक्षम व्यवस्थापक के रूप में प्रतिष्ठा हासिल कर ली थी। पार्टी को संगठित कर उसमें नई शक्ति का संचार करने का चुनौतीपूर्ण काम भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। इस दौरान पार्टी को राजनीतिक गति प्राप्त होती गई और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में साझा सरकार का गठन हुआ। हालांकि यह गठबंधन कुछ ही महीनो तक चला, लेकिन 1995 में भाजपा अपने ही बलबूते पर गुजरात में दो तिहाई बहुमत हासिल कर सत्ता में आई।

व्यक्तित्व नरेन्द्र मोदी

नरेन्द्र मोदी की छवि एक कठोर प्रशासक और कड़े अनुशासन के आग्रही की मानी जाती है, लेकिन साथ ही अपने भीतर वे मृदुता एवं सामर्थ्य की अपार क्षमता भी संजोये हुए हैं। नरेन्द्र मोदी को शिक्षा-व्यवस्था में पूरा विश्वास है। एक ऐसी शिक्षा-व्यवस्था जो मनुष्य के आंतरिक विकास और उन्नति का माध्यम बने एवं समाज को अँधेरे, मायूसी और ग़रीबी के विषचक्र से मुक्ति दिलाये। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नरेन्द्र मोदी की गहरी दिलचस्पी है। उन्होंने गुजरात को ई-गवर्न्ड राज्य बना दिया है और प्रौद्योगिकी के कई नवोन्मेषी प्रयोग सुनिश्चित किये हैं। ‘स्वागत ऑनलाइन’ और ‘टेलि फरियाद’ जैसे नवीनतम प्रयासों से ई-पारदर्शिता आई है, जिसमें आम नागरिक सीधा प्रशासन के उच्चतम कार्यालय का संपर्क कर सकता है। जनशक्ति में अखण्ड विश्वास रखने वाले नरेन्द्र मोदी ने बखूबी क़रीब पाँच लाख कर्मचारियों की मज़बूत टीम की रचना की है। नरेन्द्र मोदी यथार्थवादी होने के साथ ही आदर्शवादी भी हैं। उनमें आशावाद कूटकूट कर भरा है। उनकी हमेशा एक उदात्त धारणा रही है कि असफलता नहीं, बल्कि उदेश्य का अनुदात्त होना अपराध है। वे मानते हैं कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के लिए स्पष्ट दृष्टि, उद्देश्य या लक्ष्य का परिज्ञान और कठोर अध्यवसाय अत्यंत ही आवश्यक गुण हैं।
http://imib.in/namo-narendra-modis-biography/         )

नरेंद्र मोदी के बारे में चेतन भगत का व्याख्यान
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पार्ट
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पार्ट ३
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2015 में नरेंद्र मोदी की जीवनी



28 February 2015
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी बजट की सराहना करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के बजट में राजकोषीय जिम्मेदारी के साथ आर्थिक वृद्धि के लिए सार्वजनिक निवेश की बात कही गई है।
http://hindi.webdunia.com/budget-2015-16/general-budget-115022800108_1.html

 22 March 2015
मन की बात में किसानों से क्या बोले मोदी
http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/narendra-modi-address-farmers-in-mann-ki-baat-115032200004_1.html


वारणाशी में मोदीजी का काम
http://www.narendramodi.in/varanasi/hi/



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Saturday, October 17, 2020

Durga SaptaShati - Chapter 1 - Sanskrit - Hindi - दुर्गा सप्तशती with English Translation



Durga Saptashati - Video - Full

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Durga Saptashati starts from 16.15 Before that Durga Kavacham etc. are there.



दुर्गा सप्ता शती

ॐ नमश्चण्डिकायै
ॐ ऐं मार्कण्डेय उवाच ।। १।।

सावर्णिः सूर्यतनयो यो मनुः कथ्यतेऽष्टमः ।
निशामय तदुत्पत्तिं विस्तराद्गदतो मम ।। २।।

महामायानुभावेन यथा मन्वन्तराधिपः ।
स बभूव महाभागः सावर्णिस्तनयो रवेः ।। ३।।

स्वारोचिषेऽन्तरे पूर्वं चैत्रवंशसमुद्भवः ।
सुरथो नाम राजाभूत्समस्ते क्षितिमण्डले ।। ४।।

तस्य पालयतः सम्यक् प्रजाः पुत्रानिवौरसान् ।
बभूवुः शत्रवो भूपाः कोलाविध्वंसिनस्तदा ।। ५।।

तस्य तैरभवद् युद्धमतिप्रबलदण्डिनः ।
न्यूनैरपि स तैर्युद्धे कोलाविध्वंसिभिर्जितः ।। ६।।

ततः स्वपुरमायातो निजदेशाधिपोऽभवत् ।
आक्रान्तः स महाभागस्तैस्तदा प्रबलारिभिः ।। ७।।

अमात्यैर्बलिभिर्दुष्टैर्दुर्बलस्य दुरात्मभिः ।
कोशो बलं चापहृतं तत्रापि स्वपुरे ततः ।। ८।।

ततो मृगयाव्याजेन हृतस्वाम्यः स भूपतिः ।
एकाकी हयमारुह्य जगाम गहनं वनम् ।। ९।।

स तत्राश्रममद्राक्षीद् द्विजवर्यस्य मेधसः ।
प्रशान्तः श्वापदाकीर्णं मुनिशिष्योपशोभितम् ।। १०।।

तस्थौ कंचित्स कालं च मुनिना तेन सत्कृतः ।
इतश्चेतश्च विचरंस्तस्मिन्मुनिवराश्रमे ।। ११।।

सोऽचिन्तयत्तदा तत्र ममत्वाकृष्टमानसः (ममत्वाकृष्टचेतनः)।
मत्पूर्वैः पालितं पूर्वं मया हीनं पुरं हि तत् ।।१२।।

मद्धृत्तैस्तैरसद्वृत्तैर्धर्मतः पाल्यते न वा ।
न जाने स प्रधानो मे शूरहस्ती सदामदः ।।१३।।

मम वैरिवशं यातः कान् भोगानुपलप्स्यते ।
ये ममानुगता नित्यं प्रसादधनभोजनैः ।।१४।।

अनुवृत्तिं ध्रुवं तेऽद्य कुर्वन्त्यन्यमहीभृताम् ।
असम्यग्व्ययशीलैस्तैः कुर्वद्भिः सततं व्ययम् ।।१५।।

सञ्चितः सोऽतिदुःखेन क्षयं कोशो गमिष्यति ।
एतच्चान्यच्च सततं चिन्तयामास पार्थिवः ।।१६।।

तत्र विप्राश्रमाभ्याशो वैश्यमेकं ददर्श सः ।
स पृष्टस्तेन कस्त्वं भो हेतुश्चागमनेऽत्र कः ।।१७।।

सशोक इव कस्मात्त्वं दुर्मना इव लक्ष्यसे ।
इत्याकर्ण्य वचस्तस्य भूपतेः प्रणयोदितम् ।।१८।।
प्रत्युवाच स तं वैश्यः प्रश्रयावनतो नृपम् ।। १९।।

वैश्य उवाच ।। २०।।

समाधिर्नाम वैश्योऽहमुत्पन्नो धनिनां कुले ।
पुत्रदारैर्निरस्तश्च धनलोभादसाधुभिः ।। २१।।

विहीनश्च धनैर्दारैः पुत्रैरादाय मे धनम् ।
वनमभ्यागतो दुःखी निरस्तश्चाप्तबन्धुभिः ।। २२।।

सोऽहं न वेद्मि पुत्राणां कुशलाकुशलात्मिकाम् ।
प्रवृत्तिं स्वजनानां च दाराणां चात्र संस्थितः ।। २३।।

किं नु तेषां गृहे क्षेममक्षेमं किं नु साम्प्रतम् ।। २४।।
कथं ते किं नु सद्वृत्ता दुर्वृताः किं नु मे सुताः ।। २५।।

राजोवाच ।। २६।।

यैर्निरस्तो भवाँल्लुब्धैः पुत्रदारादिभिर्धनैः ।। २७।।
तेषु किं भवतः स्नेहमनुबध्नाति मानसम् ।। २८।।

वैश्य उवाच ।। २९।।

एवमेतद्यथा प्राह भवानस्मद्गतं वचः ।
किं करोमे न बध्नाति मम निष्ठुरतां मनः ।। ३०।।

यैः सन्त्यज्य पितृस्नेहं धनलुभ्धैर्निराकृतः ।
पतिः स्वजनहार्दं च हार्दि तेष्वेव मे मनः ।। ३१।।

किमेतन्नाभिजानामि जानन्नपि महामते ।
यत्प्रेमप्रवणं चित्तं विगुणेष्वपि बन्धुषु ।। ३२।।

तेषां कृते मे निःश्वासो दौर्मनस्यं च जायते ।। ३३।।

करोमि किं यन्न मनस्तेष्वप्रीतिषु निष्ठुरम् ।। ३४।।

मार्कण्डेय उवाच ।। ३५।।

ततस्तौ सहितौ विप्र तं मुनिं समुपस्थितौ ।। ३६।।

समाधिर्नाम वैश्योऽसौ स च पार्थिवसत्तमः ।। ३७।।

कृत्वा तु तौ यथान्यायं यथार्हं तेन संविदम् ।
उपविष्टौ कथाः काश्चिच्चक्रतुर्वैश्यपार्थिवौ ।। ३८।।

राजोवाच ।। ३९।।

भगवंस्त्वामहं प्रष्टुमिच्छाम्येकं वदस्व तत् ।। ४०।।
दुःखाय यन्मे मनसः स्वचित्तायत्ततां विना ।। ४१।।

ममत्वं गतराज्यस्य राज्याङ्गेष्वखिलेष्वपि ।
जानतोऽपि यथाज्ञस्य किमेतन्मुनिसत्तम ।। ४२।।

अयं च निकृतः पुत्रैर्दारैर्भृत्यैस्तथोज्झितः ।
स्वजनेन च सन्त्यक्तस्तेषु हार्दी तथाप्यति ।। ४३।।

एवमेष तथाहं च द्वावप्यत्यन्तदुःखितौ ।
दृष्टदोषेऽपि विषये ममत्वाकृष्टमानसौ ।। ४४।।

तत्किमेतन्महाभाग यन्मोहो ज्ञानिनोरपि ।
ममास्य च भवत्येषा विवेकान्धस्य मूढता ।। ४५।।

ऋषिरुवाच ।। ४६।।

ज्ञानमस्ति समस्तस्य जन्तोर्विषयगोचरे ।
विषयाश्च महाभाग यान्ति चैवं पृथक्पृथक् ।। ४७।।

दिवान्धाः प्राणिनः केचिद्रात्रावन्धास्तथापरे ।
केचिद्दिवा तथा रात्रौ प्राणिनस्तुल्यदृष्टयः ।। ४८।।

ज्ञानिनो मनुजाः सत्यं किन्तु ते न हि केवलम् ।
यतो हि ज्ञानिनः सर्वे पशुपक्षिमृगादयः ।। ४९।।

ज्ञानं च तन्मनुष्याणां यत्तेषां मृगपक्षिणाम् ।
मनुष्याणां च यत्तेषां तुल्यमन्यत्तथोभयोः ।। ५०।।

ज्ञानेऽपि सति पश्यैतान् पतङ्गाञ्छावचञ्चुषु ।
कणमोक्षादृतान् मोहात्पीडयमानानपि क्षुधा ।। ५१।।

मानुषा मनुजव्याघ्र साभिलाषाः सुतान् प्रति ।
लोभात् प्रत्युपकाराय नन्वेतान् किं न पश्यसि ।। ५२।।

तथापि ममतावर्ते मोहगर्ते निपातिताः ।
महामायाप्रभावेण संसारस्थितिकारिणा ।। ५३।।

तन्नात्र विस्मयः कार्यो योगनिद्रा जगत्पतेः ।
महामाया हरेश्चैषा तया सम्मोह्यते जगत् ।। ५४।।

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ।। ५५।।

तया विसृज्यते विश्वं जगदेतच्चराचरम् ।
सैषा प्रसन्ना वरदा नृणां भवति मुक्तये ।। ५६।।

सा विद्या परमा मुक्तेर्हेतुभूता सनातनी ।। ५७।।

संसारबन्धहेतुश्च सैव सर्वेश्वरेश्वरी ।। ५८।।

राजोवाच ।। ५९।।

भगवन् का हि सा देवी महामायेति यां भवान् ।
ब्रवीति कथमुत्पन्ना सा कर्मास्याश्च किं द्विज ।। ६०।।

यत्प्रभावा च सा देवी यत्स्वरूपा यदुद्भवा ।। ६१।।

तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि त्वत्तो ब्रह्मविदां वर ।। ६२।।

ऋषिरुवाच ।। ६३।।

नित्यैव सा जगन्मूर्तिस्तया सर्वमिदं ततम् ।। ६४।।

तथापि तत्समुत्पत्तिर्बहुधा श्रूयतां मम ।। ६५।।

देवानां कार्यसिद्ध्यर्थमाविर्भवति सा यदा ।
उत्पन्नेति तदा लोके सा नित्याप्यभिधीयते ।। ६६।।

योगनिद्रां यदा विष्णुर्जगत्येकार्णवीकृते ।
आस्तीर्य शेषमभजत् कल्पान्ते भगवान् प्रभुः ।। ६७।।

तदा द्वावसुरौ घोरौ विख्यातौ मधुकैटभौ ।
विष्णुकर्णमलोद्भूतौ हन्तुं ब्रह्माणमुद्यतौ ।। ६८।।

स नाभिकमले विष्णोः स्थितो ब्रह्मा प्रजापतिः ।
दृष्ट्वा तावसुरौ चोग्रौ प्रसुप्तं च जनार्दनम् ।। ६९।।

तुष्टाव योगनिद्रां तामेकाग्रहृदयः स्थितः ।
विबोधनार्थाय हरेर्हरिनेत्रकृतालयाम् ।। ७०।।

विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थितिसंहारकारिणीम् ।
निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजसः प्रभुः ।। ७१।।

ब्रह्मोवाच ।। ७२।।

त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका ।
सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिताः ।। ७३।।

अर्धमात्रा स्थिता नित्या यानुच्चार्या विशेषतः ।
त्वमेव सा त्वं सावित्री त्वं देवि जननी परा ।। ७४।।

त्वयैतद्धार्यते विश्वं त्वयैतत् सृज्यते जगत् ।
त्वयैतत् पाल्यते देवि त्वमत्स्यन्ते च सर्वदा ।। ७५।।

विसृष्टौ सृष्टिरूपा त्वं स्थितिरूपा च पालने ।
तथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये ।। ७६।।

महाविद्या महामाया महामेधा महास्मृतिः ।
महामोहा च भवती महादेवी महासुरी ।। ७७।।



प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी ।
कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहरात्रिश्च दारुणा ।। ७८।।

त्वं श्रीस्त्वमीश्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा ।
लज्जा पुष्टिस्तथा तुष्टिस्त्वं शान्तिः क्षान्तिरेव च ।। ७९।।

खड्गिनी शूलिनी घोर गदिनी चक्रिणी तथा ।
शङ्खिनी चापिनी बाणभुशुण्डीपरिघायुधा ।। ८०।।

सौम्या सौम्यतराशेषसौम्येभ्यस्त्वतिसुन्दरी ।
परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी ।। ८१।।

यच्च किञ्चित्क्वचिद्वस्तु सदसद्वाखिलात्मिके ।
तस्य सर्वस्य या शक्त्तिः सा त्वं किं स्तूयसे मया ।। ८२।।

यया त्वया जगत्स्रष्टा जगत्पात्यत्ति यो जगत् ।
सोऽपि निद्रावशं नीतः कस्त्वां स्तोतुमिहेश्वरः ।। ८३।।

विष्णुः शरीरग्रहणमहमीशान एव च ।
कारितास्ते यतोऽतस्त्वां कः स्तोतुं शक्तिमान् भवेत् ।। ८४।।

सा त्वमित्थं प्रभावैः स्वैरुदारैर्देवि संस्तुता ।
मोहयैतौ दुराधर्षावसुरौ मधुकैटभौ ।। ८५।।

प्रबोधं च जगत्स्वामी नीयतामच्युतो लघु ।। ८६।।

बोधश्च क्रियतामस्य हन्तुमेतौ महासुरौ ।। ८७।।

ऋषिरुवाच ।। ८८।।

एवं स्तुता तदा देवी तामसी तत्र वेधसा ।
विष्णोः प्रबोधनार्थाय निहन्तुं मधुकैटभौ ।। ८९।।

नेत्रास्यनासिकाबाहुहृदयेभ्यस्तथोरसः ।
निर्गम्य दर्शने तस्थौ ब्रह्मणोऽव्यक्तजन्मनः ।। ९०।।

उत्तस्थौ च जगन्नाथस्तया मुक्तो जनार्दनः ।
एकार्णवेऽहिशयनात्ततः स ददृशे च तौ ।। ९१।।

मधुकैटभौ दुरात्मानावतिवीर्यपराक्रमौ ।
क्रोधरक्तेक्षणावत्तुं ब्रह्माणं जनितोद्यमौ ।। ९२।।

समुत्थाय ततस्ताभ्यां युयुधे भगवान् हरिः ।
पञ्चवर्षसहस्राणि बाहुप्रहरणो विभुः ।। ९३।।

तावप्यतिबलोन्मत्तौ महामायाविमोहितौ ।। ९४।।
उक्तवन्तौ वरोऽस्मत्तो व्रियतामिति केशवम् ।। ९५।।

श्रीभगवानुवाच ।। ९६।।

भवेतामद्य मे तुष्टौ मम वध्यावुभावपि ।। ९७।।

किमन्येन वरेणात्र एतावद्धि वृतं मम ।। ९८।।

ऋषिरुवाच ।। ९९।।

वञ्चिताभ्यामिति तदा सर्वमापोमयं जगत् ।
विलोक्य ताभ्यां गदितो भगवान् कमलेक्षणः ।। १००।।

आवां जहि न यत्रोर्वी सलिलेन परिप्लुता ।। १०१।।

ऋषिरुवाच ।। १०२।।

तथेत्युक्त्वा भगवता शङ्खचक्रगदाभृता ।
कृत्वा चक्रेण वै छिन्ने जघने शिरसी तयोः ।। १०३।।

एवमेषा समुत्पन्ना ब्रह्मणा संस्तुता स्वयम् ।
प्रभावमस्या देव्यास्तु भूयः श्रृणु वदामि ते ।।ऐं ॐ।। १०४।।

।। इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे सावर्णिके मन्वन्तरे देवीमाहात्म्ये मधुकैटभवधो नाम प्रथमोऽध्यायः ।।


Durga Saptashati Reading in Good Clear Voice - All Chapters
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https://www.youtube.com/watch?v=9y0b17sZa8M
Uploaded by Sriram Sankaranarayanan

Durga Sapta Shati Explained Hindi by Anuradha Paudwal
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T-Series Bhakti Sagar upload

One time reading schedule of Durga Sapta Shati during Nav Ratri


Chapter 1 (Madhu kaitabha samhaara) is to be read for 1st day,
Chapter 2, 3 and 4 (Mahishhasura samhaara) to be read on 2nd day,
Chapter 5 and 6 (Dhuumralochana vadha) on the 3rd day,
Chapter 7 (Chanda Munda vadha) on 4th day,
Chapter 8 (Rakta biija samhaara) on 5th day,
Chapter 9 and 10 (Shumbha Nishumbha vadha) on 6th day,
Chapter 11 (Praise of Narayani) on 7th day,
Chapter 12 (Phalastuti) on 8th day,
Chapter 13 (Blessings to Suratha and the Merchant)on 9th day
Chapter 14 (Aparadha Kshamaprarthana) on 10th day

Durga Sapta Shati -2 - Hindi- दुर्गा सप्त शती


Durga Saptashati Parayana - Some Procedures
http://www.kamakotimandali.com/stotra/SaptashatiTathya.pdf


There are various schemes of sampuṭa in caṇḍī vidhi (Saptashati parayana or reciting). "Sampuṭa" here means uttering the specific mantra before and after every verse of saptaśatī for all the 700 verses.

Some are sampuṭas for the entire hymn while some others are for each individual verse of saptaśatī. The most common scheme is one where the navākṣarī mahāmantra is recited 108 times at the
beginning and end of saptaśatī. Such use of sampuṭa is generally for sakāma pakṣa . Those reciting the hymn mainly for ātmalābha need not follow the saṃpuṭīkaraṇa scheme using navārṇa mantra.

  There are four recognized ways of saṃpuṭīkaraṇa of saptaśatī
using navārṇa mahāmantra. They are:

1. Reciting 108 navārṇa mantras at the beginning and end of the
entire saptaśatī hymn.
2. Reciting 108 navārṇa mantras at the beginning and end of
each of the three charitras.
3. Reciting 108 navārṇā mantras at the beginning and end of
each of the thirteen chapters of saptaśatī.
4. Reciting navārṇa mantra at the beginning and end of every
śloka of saptaśatī.

There are various prayogas which are detailed in tantras such as kātyāyanī, vārāhī and ḍāmara, as also by authorities such as nīlakaṇṭha and nāgojībhaṭṭā some of which are listed below.
sampuṭa here means uttering the specific mantra before and after every verse of saptaśatī for all the 700 verses. One example of sampuṭa is reading is sloka with praṇava or Omkāra: "OM + śloka + OM"


Samputa Schemes

1. By sampuṭa of sapraṇava vyāhṛtitraya a hundred times, one attains mantra siddhi (OM bhūḥ bhuvaḥ svaḥ + śloka + svaḥ bhuvaḥ bhūḥ OM)

2. By reciting sapraṇava vyāhṛtitraya at the beginning of every śloka, one attains mantra siddhi.

3. By sampuṭa of sapta vyāhṛti (OM bhūḥ bhuvaḥ svaḥ maḥ janaḥ manaḥ tapaḥ satyaṃ), one attains mantra siddhi.

4. By sampuṭa of gāyatrī mantra along with sapta vyāhṛti or vyāhṛtitraya, one attains immense merit.

5. By sampuṭa of the mantra jātavedase from the durgā sūkta, one attains all desired fruits.

6. By sampuṭa of śatākṣara tryambaka mantra, one is protected from death and disease. This mantra is formed by combining gāyatrī, jātavedase and tryambaka mantras.

7. By sampuṭa of the śloka śaraṇāgatadīnārta paritrāṇa
parāyaṇe, one achieves success in all endeavors.
8. By sampuṭa of the śloka karotu sā naḥ śubhaheturīśvarī, one
attains all desired fruits.
9. By sampuṭa of the śloka evaṃ devyā varaṃ labdhvā, one
attains all desired boons.
10. By sampuṭa of the śloka durge smṛtā harati, one is protected
from dangers of all kind.
11. By sampuṭa of the śloka sarvābādhāpraśamanaṃ, one is
freed from afflictions of all kinds. One can also recite this śloka
alone for the same purpose.
12. By reciting the śloka itthaṃ yadā yadā a lakh times, one is
freed from epidemics such as mahāmārī.
13. By reciting the śloka tato vavre nṛpo rājyaṃ a lakh times,
one gains back lost wealth and position.
14. By offering sadīpa balidāna reciting the śloka, hinasti
daityatejāṃsi, one is cured of bālagraha.
15. By a combined recitation of the śloka durge smṛtā harasi
along with the ṛk yadanti yacca dūrake, one is speedily freed
from all dangers and misery.
16. By sampuṭa of the śloka jnānināmapi cetāṃsi, one attains
the power of infatuation.
17. By sampuṭa of the śloka rogānaśeṣān, one is freed from all
diseases.
17. By sampuṭa of the śloka ityuktvā sā tadā devī, one is blessed
with knowledge.
18. The verse bhagavtyā kṛtaṃ sarvaṃ is very potent and
confers sarvasiddhi. It can be recited individually as a 112-
lettered mahāmantra to accomplish all desires.
16. By sampuṭa of the śloka devi prapannārtihare prasīda, one
is speedily liberated from dangers and misery of all kinds.
Performing the above prayogas in front of a lamp (durgā
dīpanamaskāra) grants very fast results.




Short Version
http://www.gita-society.com/pdf/durga-saptasati-eng.pdf


Meaning


Chapter 1 The Slaying of Madhu and Kaitabha

Markandeya said (to his disciple Krasustuki Bhaguri):

There was a king by the name of Suratha who ruled the kingdom of Kola. He was a good king.  Some ministers of Kola plotted against him and deposed him. King Suratha rode alone on horseback into a dense forest. There he came to the hermitage of sage Medhas. The sage received king Suratha with due hospitality.

While on a walkabout near the hermitage, king Suratha reflected in his own mind. Overcome with attachment, he thought:

'I do not know whether the capital (which was) well guarded by my ancestors and recently deserted by me is being guarded righteously or not by my servants of evil conduct. I do not know what enjoyments (care) my chief elephant, heroic and always elated, and now fallen into the hands of my foes, will get. Those who were my constant followers and received favour, riches and food from me, now certainly pay homage to other kings. The treasures which I gathered with great care will be squandered by those constant spendthrifts, who are addicted to improper expenditures.'

The king was continually thinking of these and other things.

Near the hermitage of the sage the king saw a merchant, and asked him:

‘Who are you? What is the reason for your coming here? Wherefore do you appear as if afflicted with grief and depressed in mind?'

Hearing this speech of the king, uttered in a friendly spirit, the merchant bowed respectfully and replied to the king.

The merchant said: 'I am a merchant named Samadhi, born in a wealthy family. I have been cast out by my sons and wife, who are wicked through greed of wealth. My wife and sons have misappropriated my riches, and made me devoid of wealth.  I have come to the forest grief-stricken. Dwelling here, I do not know anything about the welfare of my sons, kinsmen and wife. How are they? Are my sons living good or evil lives?'

The king said: 'Why is your mind affectionately attached to those covetous folks, your sons, wife and others, who have deprived you of your wealth?'

The merchant said: 'This very thought has occurred to me, just as you have uttered it. What can I do? My mind does not leave attachment; it bears deep affection to those very persons who have driven me out in their greed for wealth, abandoning love for a father and attachment to one's master and kinsmen. I do not comprehend although, I know it. O noble hearted king, how is it that the mind is prone to love even towards worthless kinsmen?

Markandeya said: . Then the merchant Samadhi and the noble king Suratha together approached the sage (Medhas);  conversed with him.

The king said: 'Sir, I wish to ask you one thing. Be pleased to reply to it. Without the control of my intellect, my mind is afflicted with sorrow. Though I have lost the kingdom, like an ignorant man- though I know it- I have an attachment to all the paraphernalia of my kingdom. How is this, O best of sages? And this merchant has been disowned by his children, wife and servants, and forsaken by his own people; still he is inordinately affectionate towards them. Thus both he and I, drawn by attachment towards objects whose defects we do know, are exceedingly unhappy. How does this happen, then, sir, that though we are aware of it, this delusion persists? This delusion besets me as well as him, blinded as we are in respect of discrimination?'

The Rishi said: ‘Sir, every being has the knowledge of objects perceivable by the senses. And object of sense reaches it in various ways. Some beings are blind by day, and others are blind by night; some beings have equal sight both by day and night.

The knowledge that men have, birds and beasts too have; and what they have men also possess; and the rest (like eating and sleeping) is common to both of them. Look at these birds, which though they possess knowledge, and are themselves distressed by hunger are yet, because of the delusion, engaged in feeding grains into the beaks of their young ones. See with what devotion they put the food grains into the beaks of their young ones?  Men, O king, are full of desires. Human beings are, O tiger among men, attached to their children because of greed, expecting rewards in return.

Men are hurled into the whirlpool of attachment, the pit of delusion, through the power of Mahamaya (the Great deusion), who makes the existence of the world possible. Marvel not at this. This Mahamaya is the Yoganidra, of Vishnu, the Lord of the world. It is by her the world is deluded. Verily she, the Bhagavati, the Mahamaya forcibly drawing the minds of even the wise, entangles them into delusion. She creates this entire universe, both moving and unmoving. It is she who, when propitious, becomes a boon-giver to human beings for their final liberation. She is the supreme knowledge, the cause of final liberation, and eternal; she is the cause of the bondage of transmigration and the sovereign over all lords.’

The king said: . 'Venerable sir, who is that Devi whom you call Mahamaya? How did she come into being, and what is her sphere of action, O sage? What constitutes her nature? What is her form? Wherefrom did she originate? All that I wish to hear from you.

The Rishi said:

She is eternal, embodied as the universe. By her all this is pervaded. Nevertheless she incarnates in manifold ways; hear it from me. When she manifests herself in order to accomplish the purposes of the devas, she is said to be born in the world, though she is eternal. At the end of a kalpa when the universe was one ocean ( with the waters of the deluge) and the adorable Lord Vishnu stretched out on Sesa and took the mystic slumber, the terrible asuras (demons) the well-known Madhu and Kaitabha, sprung into being from the dirt of Vishnu's ears, and sought to slay Brahma.

Brahma, the father of beings, was sitting in the lotus (that came out) from Vishnu's navel. Seeing these two fierce asuras and Janardhana (Vishnu) asleep, and with a view to awakening Hari (Vishnu), Brahma with concentrated mind extolled Yoganidra, dwelling in Hari's eyes (appeared as Sleep in the eyes of Vishnu). The resplendent Lord Brahma extolled the incomparable Goddess of Vishnu, Yoganidra, the queen of cosmos, the supporter of the worlds, the cause of the sustenance and dissolution alike (of the universe).

Brahma said: ‘O great Mother! 'You are Svaha (the energy of Devas). You are Svadha (the energy of Pitris). You are verily the Vasat (the emblem of sacrifice). You are the embodiment of Svara (Vedic accent). You are Sudha (the nectar). O eternal and imperishable One, you are the embodiment of the threefold mantra. You are Savitri and the supreme Mother of the devas. You are the goddess of good fortune, the ruler, modesty, intelligence characterized by knowledge, bashfulness, nourishment, contentment, tranquillity and forbearance. Armed with sword, spear, club, discus, conch, bow, arrows, slings and iron mace, you are terrible (and at the same time) you are pleasing,  more pleasing than all the pleasing things and exceedingly beautiful. You are indeed the supreme Isvari, beyond the high and low.  Let Vishnu, the Master of the world, be quickly awakened from sleep and rouse up his nature to slay these two great asuras.'

The Rishi said: There, the Devi of delusion extolled thus by Brahma, the creator, in order to awaken Vishnu for the destruction of Madhu and Kaitabha, drew herself out from every part of Vishnu’s body, and appeared before Brahma. Janardana (Vishnu), Lord of the universe, rose up from His couch on the universal ocean, and saw those two evil (asuras), Madhu and Kaitabha, of exceeding heroism and power, with eyes red in anger, endeavouring to devour Brahma. Thereupon the all-pervading Lord Vishnu got up and fought with the asuras for five thousand years, using his own arms as weapons. And they, frenzied with their exceeding power, and deluded by Mahamaya, exclaimed to Vishnu, ' Ask a boon from us.'

Lord Vishnu said: 'If you are satisfied with me, you must both be slain by me now. What need is there of any other boon here? My choice is this much indeed.'

The Rishi said: Those two (asuras), thus bewitched (by Mahamaya), gazing then at the entire world turned into water, told Lord Vishnu the lotus eyed One, 'Slay us at the spot where the earth is not flooded with water.' The Rishi said: Saying 'Be it so', Lord Vishnu, the great wielder of conch, discus and mace, took them on His loins and there severed their heads with His discus.


Thus she (Mahamaya) herself appeared when praised by Brahma.

Here ends the first chapter called 'The slaying of Madhu and Kaitabha' of Devi Mahatmya Sri Durga Saptashati in Markandeya Purana, during the period of Savarni, the Manu.


Durga Sapta Shati -2 - Hindi- दुर्गा सप्त शती


Updated  8 October 2016,  29 September 2014




Sunday, March 3, 2019

4 March - National Safety Day in Hindi - राष्‍ट्रीया सुरक्षा दिवस 4 मार्च


2017 वत्सर का उद्देश


सुरक्षा एवं स्वास्थ्य में नेतृत्वसे व्यवसाय में स्थिरता बढ़ती है। 



From Mahanagar Gas Limited web site
http://hindi.mahanagargas.com/Content.aspx?Mkey=NjU=&lKey=Mw==


सुरक्षा नेतृत्व चार्टर

इसका आशय यह है कि जो सतर्क है और सुरक्षा अपनाते हैं, उन्हें नेतृत्व करने की सुविधा मिलती है और जो नहीं करते हैं, उन्हे नेतृत्व की सुविधा नहीं मिलती है। हमारी अपेक्षाएँ स्पष्ट है क्योंकि हम अपेक्षा करते हैं कि व्यापार में प्रत्येक नेता अपनी वरिष्ठता के बावजूद व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करे कि वे: 


  • व्यक्तिगत सुरक्षा का प्रदर्शन करेंगे
  • दूसरों के सुरक्षित व्यवहार को सक्रियता से प्रोत्साहित करेंगे और असुरक्षित व्यवहार को निरुत्साहित करेंगे।
  • सुरक्षा प्रदर्शन हेतु जब आवश्यक हो दूसरों को प्रशिक्षित और प्रेरित करेंगे।
  • ज्ञान साझा कर व आवश्यक संसाधनों को उपलब्ध करवाकर सुरक्षित कार्य प्रणाली सक्षम करेंगे
  • नवोन्मेष के माध्यम से बेहतरीन सुरक्षा प्रदर्शन विकसित करने के लिए उपाय खोजेंगे।



यह पाँच अपेक्षाएँ व्यापार में सभी नेतृत्वकर्ताओं के मूल कर्तव्य हैं ताकि साथ में मिलकर हम अपने लोग, अपने समाज को बचा सकें जिसमें हम व्यापार संचालित करते हैं। 

मुख्य मूल्य के रूप में सुरक्षा

एमजीएल शून्य चोटों को प्राप्त करने के लिए कटिबद्ध है, और इस दिशा में वह अपने बिज़िनस संचालनों का प्रबंधन करता है। इसके लिये एमजीएल ने सुरक्षा को अपना मूल आधार बनाया है।  

एमजीएल को चोट मुक्त संस्थान बनाने के हमारे सपने का अभिप्राय यह है:

भरोसा – अच्छे व्यवहार से विश्वास का विकास
विश्वास – लोगों को कार्य करने में विश्वास सुनिश्चित करे
शक्तिकरण  - सुरक्षा पर लोगों को शक्ति प्रदान करें
शून्य सहिष्णुता  -  सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं



‘हम सुरक्षा में समझौता नहीं करते’ 











2016 वत्सर का उद्देश

सुरक्षा अभियान मजबूत बनाएं, शून्य क्षति हासिल करे

2016 THEME : STRENGTHEN SAFETY MOVEMENT TO ACHIEVE ZERO HARM -

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2015 वत्सर का उद्देश 

सप्लय चैन कायम रखने हेतु सुरक्षा संस्कृति बनाये रखें 
http://www.nsc.org.in/images/stories/kudos/1422943336img3.pdf

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२०१४ वत्सर का उद्देश 

कार्यस्थल पर तनावोंका प्रबंधन करें - ख़तरोंको को नियंत्रण में रखें

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राष्‍ट्रीया सुरक्षा दिवस 4 मार्च



कार्यस्थलों पर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 4 मार्च को पूरे देश में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है. इसी दिन से ही एक सप्ताह तक चलने वाला सुरक्षा अभियान भी शुरू हो जाता है| 

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस 1972 से आयोजित किया जा रहा है।

ज्यादा विवरण के लिए निचे दिए लिंक क्लिक करें 
http://www.nsc.org.in/images/stories/kudos/1384365095.pdf



Videos

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Updated 4 March 2019,  3 March 2017, 23 Feb 2016, 4 March 2015

Saturday, March 2, 2019

महाशिवरात्रि - Mahashivaratri - Hindi

4 March 2019

                                                Vishwanath Ling - Kashi Varanashi
                                                Picture Source: http://shrikashivishwanath.org/ShivGallary.aspx

                                Have Live Darshan of Kashi Vishwanath

                                                http://shrikashivishwanath.org/live.aspx

                                Have Live Darshan of Ujjain Mahakal

                                                di.mp.nic.in/ujjain/mahakal                             





अमृत मंथन किया देवतावों और राक्षस मिलके| अमृत मंथन में बहुत तकलीफ आयें| मंदर पर्वत डूबने लगा| विष्णुजीने कूर्म बनकर उसे सही स्थान पर रखखे कार्य आगे बढाने में मदत किया| बाद में गरल निकला| वो गरल समस्त दुनिया को मारने वाली सक्तिसंपन्न गरल था| पूरे दुनिया संकट में| देव और दानव कुछ करने का काबिल नहीं रहा| सभी लोग ब्रह्मा, विष्णु, शिव, परा शक्ति के पास जानी लगा| रक्षा करो, रक्षा करो मांगके|
शिवजीने तैयार हुआ गरल को पीने के लिए| वो गरल को मूह का अन्दर लिया लेकिन पेट में जाने नहीं दिया| कंठ में रखा गरल को| गरल भी बहुत  शक्तिशाली थी| भगवान को वो तकलीफ देने लगी| भगवान शिव एक रात्री पूरा उससे परेशान थे| पार्वती माताने शिवजीको स्वस्थ करने के लिया पूरा रात बिताया| सुबह होते ही भगवान शिव गरल के ऊपर पूरा काबू पाया| गरल कंठ में रखकर भी शिवजी अपने यथा स्थिथि में आगए| दुनिया को संकट आयी पर वो संकट पर विजय मिल गया|

शिवरात्री का त्यौहार संकट पे विजय का प्रतीक है|


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महाशिवरात्रि - प्रचलित मान्यताएँ अथवा कथाएँ

महाशिवरात्रि

कैसे करें शिव की पूजा 

महाशिवरात्रि  में उपवास का बड़ा महत्व होता है. इस दिन शिव भक्त शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करते हैं और रात्रि जागरण करते हैं. भक्तगणों द्वारा लिंग पूजा में बेल-पत्र चढ़ाते हैं।
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T-Series Bhakti Sagar

सम्पूर्ण रुद्राभिषेक विधि 

Sampoorna Rudrabhishek Ashtadhyayee
By Pandit Rambhau Bhatta, Pandit Radheyshyam Shashtri
T-Series Bhakti Sagar
1 hour 11 minutes
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Shivratri Aarti
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Children of MahaKali upload

Om Jai Shiv Omkara Aarti by SP Balasubramaniam - Shiva Aarti - With Lyrics - Sing Along
Tips Devotional
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Full Mangla Aarti at Maha Kal Temple Ujjain
Uploaded by vaibhav nath sharma
46 minutes
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Bhasma Aarti - Shri Mahakal Jyotirling Temple, Ujjain
One hour 26 minutes
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T-Series Bhakti Sagar


शिवरात्रि जागरण भजन और स्तोत्र

Shiv Sahasranaam
1 hour
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T-Series Bhakti Sagar


Top Shivratri Bhajans By Hariharan, Anuradha Paudwal, Suresh Wadkar Full Audio Songs Juke Box
T-Series Bhakti Sagar
1 hr.09.24
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Shivratri Bhajans By Anuradha Paudwal, Lakhbir Singh Lakkha I Audio Song Juke Box
T-Series Bhakti Sagar
Songs on Shivratri
56 minutes
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शिव भजन Audio Songs T Series Bhakti Sagar
46 minutes
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Mahima Kashi Vishwanath Ki - Film


महिमा काशी विस्वनाध की -  फिल्म 

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T-Series Bhakti Sagar
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6.18 minutes
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6 .30 minutes
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महाशिवरात्रि पूजाविधि एवं संकल्प

http://www.riiti.com/2009-02-mahashivratri-puja-vrat-vidhi-sankalp.html 

महाशिवरात्रि की व्रत-कथा (Mahashivratri)
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Links to English Articles on Shivratri
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First posted on Knol (Number 2299)


Updated 2019 - 3 March 2019
2018 - 13 Feb 2018
 4 March 2016, 17 Feb 2015

Saturday, September 1, 2018

श्री कृष्ण जन्माष्टमी - Sri - Shri Krishna Janmashtami


श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन  - श्री कृष्ण अष्टॊत्तर शतनाम स्तोत्रं

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Spiritual Mantra


जिस स्थान पर ईश्वर या देवता  अपनी दिव्य  शक्ति के रूप में विराजमान होते हैं वह तीर्थ कहलाता है  व उस स्थान को तीर्थ स्थान कहते हैं | इसी प्रकार जिस दिन परमेश्वर स्वयं अवतरित होते हैं वह दिन पूज्य, पवित्रता देने वाला व पर्वमय हो जाता है | श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हम सभी व्रत रखकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं व पूज्य भावों से उपासना करते हैं | इस दिन केवल फल आहार किया जाता है | व्रत का अर्थ है की विश्राम की मुद्रा में न रहें | इस दिन लेटना नहीं है | बैठते हुए कुर्सी से पीठ लगाकर नहीं बैठना है | इस प्रकार शरीर की साधना की जाती है | शरीर को साधने से मन में दृढ़ता आती है व ईश्वर के प्रति आस्था के भाव दृढ होते हैं | मंदिरों में जाकर भजन कीर्तन में सम्मिलित होने से मन बुद्धि में पवित्रता आती है |

                ॐ वन्दे प्रभु पादार्विन्देभ्यो: दुर्लभं |  
                    योगी कुल वंदितं, कर्मसु कौशलम ||

ईश्वर का ध्यान सदा ही कल्याणकारी है | श्री कृष्ण कर्म मार्ग पर आचरण करने के लिए कहते हैं | अपने अपने धर्म में रहते हुए कर्म करते हुए मोक्ष प्राप्त करने के लिए कहते हैं | ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य (व्यापारी) व  शूद्र  (कृषक) इन चारों वर्णों में अपने अपने स्वाभाविक कर्मों को करना चाहिए | कर्म करने में सभी की स्वतः ही रूचि होती है | ईश्वर ने हमें कर्म करने का अत्याज्य   स्वभाव दिया है |

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जैसा श्रेष्ठ पुरुष आचरण करता है, वैसा ही अन्य भी करते हैं इसलिए मैं भी कर्मों में ही आचरण करता हूँ | यह साधारण सी उक्ति नहीं है | इसका गहन अर्थ है | इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यदि श्रेष्ठ व्यक्ति गलत कार्य करेगा तो क्या समझदार व्यक्ति भी गलत कार्य करने लगेगा | आप सोचेंगे कि नहीं | मैं तो कभी गलत कार्य नहीं करूंगा | किन्तु यह नियम कहता है कि सभी श्रेष्ठ पुरुष का अनुकरण करते हैं | चाहे वह अच्छा कार्य हो या बुरा | अब आप भारत मैं पाश्चात्य वस्त्रों के अनुकरण को ही ले लीजिये | पहिले सभी स्त्री पुरुष आधे अधूरे वस्त्रों को पहननें में संकोच करते थे | ऐसे वस्त्रों को पहिनने की शुरुवात संभ्रांत वर्ग ने की | जिनका समाज में मान  सम्मान व प्रभुत्व था | अर्थात जो श्रेष्ठ्वत थे | फिर समाज के अन्य लोगों ने उनका अनुकरण आरंभ किया | और आज सभी ने संकोच का त्याग कर पाश्चात्य वस्त्रों को अपना लिया है | इसके विपरीत यदि आज भी उच्च वर्ग के व्यक्ति धोती कुरता का परिधान आरंभ कर दें तो इस नियम की ऐसी प्रबलता है कि बाकी लोग भी प्रभावित होकर धोती कुरता पहिनना आरंभ कर देंगे |

ईश्वर जब भी अवतरित होते हैं, कर्मशील इस संसार में जीवन पर्यंत कर्मों में आचरण की ही लीला करते हैं | भगवान शेष कर्माधार  है व भगवान विष्णु स्वयं कर्म स्वरुप हैं | आइये इस दिन हम व्रत व उपासना करें तथा योगेश्वर श्री कृष्ण के श्रेष्ठ जीवन का अनुकरण करें |

योगेश्वर श्री कृष्ण कहते हैं कि मैं आत्माओं में उत्तम (परमात्मा) हूँ | इसलिए पुरुषोतम हूँ | मैं अविद्या (अज्ञान का वह अंधकार जो है ही नहीं) से अत्यंत परे सच्चिदानंदघन परब्रह्म परमात्मा हूँ | अर्थात जो स्वयं ज्ञानस्वरूप हैं और जिनके समक्ष अज्ञान उत्पन्न नहीं हो सकता है |
                        मन ने सोचा, आज व्रत है |
                        आज क्यों हरि में मन रत है |
                        कुछ भी करूँ शुद्ध भाव बना रहता है |
                        क्यों मन में दुर्विचारों का आना मना रहता है |
                        क्यों श्रद्धा मन को मना लेती है |
                        मैं व्रती हूँ, क्षुधा प्रतिपल ऐसा भाव बना देती है |


Source Article by Diwakar Sharma on Knol
http://knol.google.com/k/diwakar-sharma/--/3f0ibblitj66a/55  
Under Creative Commons 3.0    



कृष्ण जन्मकथा

श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्र रूप में हुआ था. कंस ने अपनी मृत्यु के भय से अपनी बहन देवकी और वसुदेव को कारागार में कैद किया हुआ था. भगवान के निर्देशानुसार कुष्ण जी को रात में ही मथुरा के कारागार से गोकुल में नंद बाबा के घर ले जाया गया.

नन्द की पत्नी यशोदा को एक कन्या हुई थी. वासुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को अपने साथ ले गए. कंस ने उस कन्या को वासुदेव और देवकी की संतान समझ पटककर मार डालना चाहा लेकिन वह इस कार्य में असफल ही रहा. इसके बाद श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया. जब श्रीकृष्ण जी बड़े हुए तो उन्होंने कंस का वध कर अपने माता-पिता को उसकी कैद से मुक्त कराया.

जन्माष्टमी में हांडी फोड़
श्रीकृष्ण जी का जन्म एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस उत्सव में भगवान के श्रीविग्रह पर कपूर, हल्दी, दही, घी, तेल, केसर तथा जल आदि चढ़ाने के बाद लोग बडे हर्षोल्लास के साथ इन वस्तुओं का परस्पर विलेपन और सेवन करते हैं. कई स्थानों पर हांडी में दूध-दही भरकर, उसे काफी ऊंचाई पर टांगा जाता है. युवकों की टोलियां उसे फोडकर इनाम लूटने की होड़ में बहुत बढ-चढकर इस उत्सव में भाग लेती हैं.


श्री कृष्णा जन्माष्टमी पूजा विधि

Shri Krishna Janmashtami Puja Procedure - English

श्री कृष्ण जन्मभूमि मधुरा दर्शन - वीडियो

श्री कृष्ण चरित्र के आधारित हिंदी फिल्में

More Hindi Articles on Krishna Ashtami

Article in Jagran

Wikipedia Article



Krishna Story in Hindi - Videos

Part 1
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Part 2
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Part 3
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Part 4
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दीपावली - Deepavali - Dipavali - Diwali in Hindi

http://www.vignanam.org/veda/sri-krishna-ashtottara-sata-namavali-hindi.html

http://vaidikasamhita.com/2016/08/24/krishna-ashtottara-shatanamavali-hindi/

http://www.vignanam.org/veda/sri-krishna-ashtottara-sata-namavali-telugu.html

https://www.sanskritimagazine.com/indian-religions/hinduism/krishna-ashtottaram-the-108-names-of-lord-shri-krishna-and-their-meaning/

Updated 1 September 2018, 24 August 2016, 17 Aug 2014, 27 Aug 2013

Sunday, November 26, 2017

Mahatma Gandhi - Hindi Essays


राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी

मोहनदास करमचन्द गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात  पोरबंदर में हुअ।  पिता राजकोट के दीवान थे। मोहनदास गाँधी मैट्रिक  करने के बाद इंग्लॅण्ड गए और वहां उन्होंने न्यायशास्त्र  अध्ययन किया। गांधी बैरिस्टर बनकर भारत  आए और मुम्बई  में अधिवक्ता के  रूप में काम  करने लगा।


राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी
Web Dunia Article

महात्‍मा गांधी  - Bharat Discovery Article


अहिंसा और सत्य के पुजारी महात्मा गांधी

महात्‍मा गांधी की स्मृति में

महात्मा गांधी

गांधीजी की जीवनी
http://www.hindi.mkgandhi.org/bio5000/bio_5000.htm

Chapters 10 chapters are there
प्रस्तावना
जन्म और प्रारंभिक शिक्षा


राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी - सुभाष चन्द्र बोस

4 जून 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुये महात्मा गांधी को ‘देश का पिता’ कहकर संबोधित किया।
पुनः 6 जुलाई 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने रेडियो सिंगापुर रेडियो से एक संदेश प्रसारित करते हुये महात्मा गांधी को ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया।

Bharat Discovery Org Article

https://navbharattimes.indiatimes.com/india/mahatma-gandhis-father-of-the-nation-title-unconstitutional-mha/articleshow/16958974.cms



http://www.hindi.mkgandhi.org/index.html


गांधीजी के साथ जुड़े हुए मुंबई के जगे
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TV9 Marathi upload


More Hindi Essays -


Updated 27 November 2017, 2 October 2014

Friday, April 28, 2017

India Information Board - Hindi - इण्डिया समाचार फलक



India - Information Board - English

इण्डिया समाचार फलक


April 2017

30 April 2017
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29 April
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तीन तलाक पर क्या बोले नरेन्द्र मोदी...
नई दिल्ली| शनिवार, 29 अप्रैल 2017
http://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/narendra-modi-117042900038_1.html

28 April
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प्राइम टाइम इंट्रो : क्या मोदी के कारण हारता है विपक्ष?
https://khabar.ndtv.com/news/blogs/does-opposition-gets-defeated-due-to-narendra-modi-1686407

Interview of Amit Shah, BJP President
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MODI@3 सालः नीति आयोग से कितना बदल गया इंडिया? 3 गेमचेंजर प्रोजेक्ट
http://aajtak.intoday.in/story/pm-narendra-modi-government-three-year-tenure-report-card-1-925512.html


राजनीतिक जीवन यात्रा- नरेन्द्र मोदी




31 October 2014
किनके चंगुल में है भारतीय मुसलमान - यूसुफ किरमानी

सरकार से नहीं, सिर्फ अदालत से उम्मीद - धर्मेंद्रपाल सिंह Nav Bharat Times  Editorial

24 October 2014
अडानी जी की कृपा - यूसुफ किरमानी



15 December 2013

Run for Unity - Remember Sardar Patel

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8 December 2013

Rajnadhjiki mediase samvad
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Updated 30 April 2017,  2 November 2014