Thursday, April 9, 2015

India - MUDRA - Finance for Micro Units in Hindi




Text of PM’s address at the launch of Pradhan Mantri MUDRA Yojana on 8 April 2015




http://pib.nic.in/photo/2015/Apr/l2015040863904.jpg

उपस्थित सभी महानुभाव,

हमारे देश में एक अनुभव ये आता है कि बहुत सी चीजें Perception के आसपास मंडराती रहती है। और जब बारीकी से उसकी और देखें तो चित्र कुछ और ही नजर आता है। जैसे एक सामान्य व्यक्ति को पूछो तो उसको लगेगा कि “भई, ये जो बड़े-बड़े उद्योग हैं, बड़े-बड़े उद्योग घराने हैं, उससे रोजगार ज्यादा मिलता है।“ लेकिन अगर बारीकी से देखें तो चित्र कुछ और होता है, इसमें इतनी ज्यादा पूंजी लगी है। इतने सारे ताम-झांम, हवाबाजी, ये सब हम देखते आए हैं।

लेकिन अगर बारीकी से देखें तो ultimately हम विकास में हैं। रोजगार हमारी प्राथमिकता है और भारत जैसा देश जिसके पास Demographic dividend हो, जहां पर 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 से कम आयु की हो, उस देश ने अपने विकास की जो भी नीतियां बनानी हो, उसके केंद्र में ये युवा शक्ति होना चाहिए। अगर वो बराबर match कर लिया, तो हम नई ऊंचाईयों को पार कर सकते हैं। ये जितने बड़-बड़े उद्योगों की हम चर्चा सुनते आए हैं, उसमें सिर्फ एक करोड़ 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। सवा सौ करोड़ देश में सवा करोड़ लोगों को रोजगार, ये जो बहुत बड़े-बड़े लोग जिसके लिए दुनिया में चर्चा रहती है, आधा अखबार जिनसे भरा पडा रहता है, वो देते हैं।

लेकिन इस देश में छोटा-छोटा काम करने वाला व्यक्ति करीब 5 करोड़ 70 लाख लोग, 12 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं। उन सवा करोड़ को रोजगार देने के लिए बहुत सारी व्यवस्थाएं सक्रिय है। लेकिन 12 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले लोगों के लिेए थोड़ी सी हम मदद करें, तो कितना बड़ा फर्क आ सकता है इसका हम अंदाज कर सकते हैं। और इस 5 करोड़ 75 लाख इस क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं, जो स्वरोजगार एक प्रकार से हैं - दर्जी होंगे, कुम्हार होंगे, टायर का पंक्चर करने वाले लोग हैं, साइकिल की repairing करने वाले लोग हैं, अपनी एक ऑटो रिक्शा लेकर के काम करने वाले लोग हैं, सब्जी बेचने वाले, गरीब-गरीब लोग हैं। उनका पूरा जो कारोबार है, उसमें ज्यादा से ज्यादा हिसाब लगाएं जाएं, तो 11 लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा उसमें पूंजी नहीं लगी है। यानी सिर्फ 11 लाख करोड़ रुपयों की पूंजी लगी है, 5 करोड़ 75 लाख उसका नेतृत्व कर रहे हैं, और 12 करोड़ लोगों का पेट भरते हैं।


ये बातें जब सामने आईं तो लगा कि देश में स्वरोजगारी के अवसर बढ़ाने चाहिए। देश की Economy को ताकत देने वाला जो नीचे पायरी पर जो लोग हैं, उनकी शक्ति को समझना चाहिए। और उनके लिए अवसर उपलब्ध कराने चाहिए और इस मूल चिंतन में से ये मुद्रा की कल्पना आई है। मेरा अपना एक अनुभव इसमें काम कर रहा था, क्योंकि सिर्फ आर्थिक जगत के लोगों के आंकड़ों के आधार पर निर्णय करना, इतना सरल नहीं होता है। लेकिन कभी-कभी अनुभव बहुत काम आता है।

मैं गुजरात में मुख्यमंत्री रहा तो मैंने पतंग उद्योग की तरफ थोड़ा ध्यान दिया। अब गुजरात में पतंग एक बड़ा त्‍योहार के रूप में मनाया जाता है, और ज्‍यादातर, अब वो पूरा Environment Friendly Industry है, Cottage Industry है। और लाखों की तादाद में गरीब मुसलमान उस काम में लगा हुआ है 90 प्रतिशत से ज्‍यादा पतंग बनाने व कबाड़ का काम गुजरात में मुसलमान कर रहा है, लेकिन वो वही पुरानी चीजें करता था। वो पतंग अगर उसको तय तीन कलर का बनाना है तो तीन कलर के कागज लाता था पेस्टिंग करता था और फिर पतंग बनाता था। अब दुनिया बदल चुकी है तीन कलर का कागज प्रिंट हो सकता है, टाइम बच सकता है। तो मैंने चेन्‍नई की एक Institute को काम दिया कि जरा सर्वे किजिए कि इनकी मुसीबत क्‍या है, कठिनाईयां क्‍या है, अनुभव ये आया कि छोटे-छोटे लोगों को थोड़ी मदद दी जाए थोड़ा Skill Development हो जाए, थोड़ी पैकेजिंग सिखा दिया जाए, आप उसमें कितना बड़ा बदलाव ला सकते है। मुझे आज कहने से आनंद होता है कि जो करीब 35 करोड़ का पतंग का बिजनेस था थोड़ी मदद की वो पतंग का उद्योग 500 करोड़ cross कर गया था।

फिर मेरी उसमें जरा रूचि बढ़ने लगी तो मैं कई चीजे नई-नई करने लगा। बांस, बांस वो लाते थे असम से। कारण क्‍या तो पतंग में जिस बांस के पट्टे की जरूरत होती है वो साइज का बांस गुजरात में होता नहीं था तो मैंने ये जेनेटिक इंजीनियरिंग वालों को पकड़ा। मैंने कहा बांस हमारे यहां ऐसा क्‍यों न हो दो गांठ के बीच अंतर ज्‍यादा हो ताकि वो हमारा ही लोकल बांस का product उसको काम आ जाए। बांस वो बाहर से लाता है तो उसको फाइनेंस की व्‍यवस्‍था हो फिर मैंने एडवरटाइजमेंट कम्‍पनी को बुलाया। मैंने कहा जरा पतंग वालों के साथ बैठो पतंग के ऊपर कोई एडवरटाइजमेंट का काम हो सकता है क्‍या उनकी कमाई बढ़ सकती है।

छोटी-छोटी चीजों को मैंने इतना ध्‍यान दिया था और मुझे उतना आनंद आया था उस काम में - I’m Talking about 2003-04 - कहने का मेरा तात्‍पर्य यह था कि जो बिल्‍कुल उपेक्षित सा काम था उसमें थोड़ा ध्‍यान दिया गया, फाइनेंस की व्‍यवस्‍था की गई, उसने तेज गति से आगे बढ़ाया। ये ताकत सब दूर है। आप देखिए हर गांव में दो-चार मुसलमान बच्‍चे ऐसे होंगे, इतनें Innovative होते है technology में ईश्‍वरदत्‍त उनको कृपा है। वो तुरंत चीजों को पकड़ लेते है। आप एक ताला उसको रिपेयर करने को दीजिए वो दूसरे दिन वो ताला वैसा बना के दे देगा। जिनके हाथों में ये परम्‍परागत कौशल है। ऐसे लोगों को अगर हम मदद करें और वो कुछ गिरवी रखें तब मिले तो उसके पास तो गिरवी रखने के लिए कुछ नहीं है - सिवाय कि उसका ईमान। उसकी सबसे बड़ी पूंजी है उसका ईमान। ये गरीब इंसान की जो पूंजी है, ईमान। उस पूंजी के साथ मुद्रा अपनी पूंजी जोड़ना चाहता है, ताकि वो सफलता की कुंजी बन जाए और उस दिशा में हम काम करना चाहते है।

कुम्‍हार है, अब बिजली गांव में पहुंच गई है। वो भी चाहता है कि मैं मटकी बनाता हूं और चीजें बनाता हूं। लेकिन अगर Electric motor लग जाए तो मेरा काम तेज हो जाएगा। लेकिन Electric motor खरीदने के लिए पैसा नहीं है। बैंक के लिए उनके पास इतना समय भी नहीं है और उतना नेटवर्क भी नहीं है। लेकिन मैं आज, यहां बैंक के बड़े-बड़े लोग बैठे है। मेरे शब्‍द लिख करके रखिए। एक साल के बाद बैंक वाले Queue लगाएगें मुद्रा वालों के यहां और कहेंगे भई 50 लाख हमको client दे दीजिए।

क्‍योंकि अब देखिए प्रधानमंत्री जन-धन योजना में हिन्‍दुस्‍तान की बैंक सेक्‍टर ने जो काम किया है, मैं जितना अभिनंदन करूं उतना कम है जी, जितना अभिनंदन करूं उतना कम है। कोई सोच नहीं सकता था, क्‍योंकि बैंक के संबंध में एक सोच बनी हुई थी कि बैंक यानी इस दायरे से नीचे नहीं जा सकते। तो बैंक के लोगों ने गर्मी के दिनों में गांव-गांव घर-घर जा करके गरीब की झोपड़ी में जा करके उसको देश की फाइनेंस की Main Stream में लाने का प्रयास किया और इस देश के 14 करोड़ लोगों को, 14 करोड़ लोगों को बैंक खाते से जोड़ दिया। तो ये ताकत हमने अनुभव की है तो उसका ये अलग एक नया step है।

आज वैसे एक ओर भी अवसर है SIDBI का रजत जयंती वर्ष है SIDBI 25 साल की उम्र हो गई और मूलतः SIDBI का कारोबार इसी काम से शुरू हुआ था, छोटे-छोटे लोगों को... लेकिन जितनी तेजी से क्योंकि भारत देश rhythmic way में progress करे तो अपेक्षाएं पूरी नहीं होंगी। हमने उस rhythm को बदलकर के jump लगाने की जरूरत है। हमने दायरा बढ़ाने की जरूरत है। हमने अधिक लोगों को इसके अंदर जोड़ने की आवश्यकता है और सामान्य मानवी का अपना अनुभव है।

आप देखिए हिंदुस्तान में जहां भी women self help group चलते हैं, पैसों के विषय में शायद ऐसी ईमानदारी कहीं देखने को मिलेगी नहीं। उनको अगर 5 तारीख को पैसा जमा करवाना है तो 1 तारीख को जाकर के जमा करवाकर आ जाती हैं। बचत हमारे यहां स्वभाव है, उसको और जरा ताकत देने की आश्यकता है। हमारी परंपरागत वो शक्ति है।

मुद्रा बैंक के माध्यम से व्यवसाय के क्षेत्र में, स्वरोजगार के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में जो निचले तबके पर आर्थिक व्यवस्था में रहे हुए लोग हैं, वे हमारा सबसे बड़ा client, हमारा सबसे बड़ा target group है। हम उसी पर focus करना चाहते हैं। इन 5 करोड़ 75 लाख जो छोटे व्यापारी हैं... और उनका average कर्ज कितना है? पूरे हिंदुस्तान में 11 लाख करोड़ की उनके पास पूंजी है total पूरे देश में कोई ज्यादा amount नहीं है वो और average कर्ज निकाला जाए तो एक यूनिट का average कर्ज 17 thousand है सिर्फ। 17 thousand हैं, यानि कुछ नहीं है। अगर उसको एक लाख के कर्ज की ताकत दे दी जाए। उसको इतना अगर जोड़ दिया जाए और ये 11 लाख करोड़ है वो एक करोड़ तक अगर पहुंच जाए। हम कल्पना कर सकते हैं देश की economy को GDP को, नीचे से ताकत देने का इतना बड़ा force जो कि कभी untapped था।

और इसलिए जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लेकर के आए थे तब हमने कहा था, जहां बैंक नहीं उसको बैंक से जोड़ेंगे। आज जब हम मुद्रा लेकर के आए हैं, तो हमारा मंत्र है जिसको funding नहीं हो रहा है, जो un-funded है, उसको funding करने का हम बीड़ा उठाते हैं।

ये एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें शुरू के समय में सामान्य व्यक्ति जाएगा ये संभव नहीं है क्योंकि बेचारों को अनुभव बहुत खराब है। वो कहता है भई मुझे तो साहूकार से ही पैसा लेना पड़ता है। 24 percent, 30 percent interest देना पड़ता है, वो ही मुझे आदत हो गई है। वो विश्वास नहीं करेगा कि उसको इस प्रकार से ऋण मिल सकता है। हम ये एक नया विश्वास पैदा करना चाहते हैं कि आप देश के लिए काम कर रहे हो, देश के विकास के भागीदार हो, देश आपके लिए चिंता करने के लिए तैयार है। ये message मुझे देना है।

और ये मुद्रा के concept के द्वारा, उसी दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हमारे देश में agriculture sector में value addition - इतनी बड़ी संभावनाएं हैं। अगर उसकी एक विधा को develop कर दिया जाए तो हमारे किसान को कभी संकटों से गुजरना नहीं पड़ेगा। और ये छोटे-छोटे entrepreneur के माध्यम से ये पूरा network खड़ा किया जा सकता है जो सामान्य किसान, जो सामान्य पैदावार करता है, उसमें value addition का काम करे। और स्थानीय स्तर पर करे। कोई बहुत बड़ी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। अपने आप उसका काम आगे बढ़ जाएगा।

और हम देखते हैं आम उसको बेचना है, तो बेचारे को बड़ा कम पैसा मिलता है लेकिन एक अगर एक छोटा सा unit भी हो, आम में से अचार बना दे तो ज्यादा पैसा मिलता है और अचार को भी अच्छा बढ़िया bottle में packing करे और ज्यादा पैसा मिलता है और कोई नटी bottle लेकर खड़ी हो जाए तो और ज्यादा पैसा मिलता है advertising होता है तो।

यानि वक्त बदल चुका है, branding, advertising इन सारी चीजों की जरूरत पड़ गई है। हम ऐसे छोटे-छोटे लोगों को ताकत देना चाहते हैं। और उनको अगर ताकत मिलती है तो देश की economy की नीचे की धरातल, जितनी ज्यादा मजबूत होगी, उतनी देश की economy को लाभ होने वाला है। और जब मैंने ये आकड़े बताए तो आप भी चौंक गए होगे कि इतना बड़ा तामझाम सवा करोड़ लोग रोजगार पाते है। और जिसकी ओर कोई देखता नहीं है, वो 12 करोड़ लोगों के पेट भरता है। कितना बड़ा अंतर है। ये जो 12 करोड़ लोग है 25 करोड़ को रोजगार देने की ताकत देते है। वो Potential पड़ा है। और ज्‍यादा कोई शासकीय व्‍यवस्‍था में बड़े बदलाव की भी जरूरत नहीं है। थोड़ी संवदेनशीलता चाहिए, थोड़ी समझ चाहिए और थोड़ा Pro-Active role चाहिए।

मुद्रा एक ऐसा platform खड़ा किया गया है, जिस platform के साथ इसको... आज छोटी-मोटी finance की व्‍यवस्‍थाएं चल पड़ी है। दुनिया में कई जगह पर प्रयोग हुए है Micro finance के। लिए मैं चाहूंगा कि हम पूरे विश्‍व में Micro finance के जो Successful Model है हम भी उसका अध्‍ययन करें। उसकी जो अच्‍छाइयां है जो हमारे लिए suitable है, हम उसको adopt करें। और हिन्‍दुस्‍तान इतना बड़ा देश है कि जो चीज नागालैंड में चलती है वो महाराष्‍ट्र में चलेगी जरूरी नहीं है। विविधता चाहिए। और विविधताओं के अनुसार स्‍थानीय आवश्‍यकताओं के अनुसार अपने मॉडल बनाएं उसकी requirement करें। वरना हम दिल्‍ली में बैठ करके tailor के लिए ये और फिर कहेंगे कि तुमको ये मिलेगा तो मेल नहीं बैठेगा। वो वहां है उसी को पूछना पड़ेगा कि भई बताओं तुम्‍हारे लिए क्‍या जरूरत है? ये अगर हमने कर दिया तो हम बहुत बड़ी मात्रा में समाज के इस नीचे के तबके को मदद कर सकते है।

जिस प्रकार से सामान्‍य व्‍यक्ति की चिंता करना ये हमारा प्रयास है... और आपने इस सरकार के एक-एक कदम देखें होंगे, गतिशीलता तो आप देखते ही होंगे। वरना सामान्‍यत: देश में योजनाओं की घोषणा को ही काम माना जाता था और आप रोज नई योजना की घोषणा करो तो अखबार के आधार पर देश को समझने वाले जो लोग है वो तो यही मानते है कि वाह देश बहुत आगे बढ़ गया। और दो-चार साल के बाद देखते है कि वही कि वही रह गए। हमारी कोशिश है योजनाओं को धरती पर उतारना।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना ये सीधा-सीधा दिखता है। पहल योजना - दुनिया में सबसे बड़ा Cash Transfer का काम। गैस सब्सिडी में। 13 करोड़ लोगों के गैस सब्सिडी सिलेंडर, सब्सिडी सीधी उसके बैंक खाते में चली गई। यानी अगर एक बार निर्णय करें कि इस काम पूरा करना है और हर काम को आप देखिए... जब हमने 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री जन-धन योजना की बात कही करीब-करीब सवा सौ दिन के अंदर उस काम को पूरा कर दिया।

जब हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना के बाद हम आगे बढ़े सौ दिन के भीतर-भीतर हमने पहल का काम पूरा कर दिया।

और आज जब बजट के अंदर घोषणा हुई, 50 दिन भी नहीं हुए, वो आज योजना आपके सामने रख दी। और ये Functional होगी और उसका परिणाम मैं कहता हूं एक साल मैं ज्‍यादा समय नहीं कहता। एक साल के भीतर-भीतर हमारी जो Established Banking System है, वो मुद्रा के मॉडल की ओर जाएगी मैं दावे से कहता हूं क्‍योंकि इसकी ताकत इसकी ताकत पहचान में आने वाली है। वे अपना एक लचीली बैंकिंग व्‍यवस्‍था खड़ी करेंगे, एक बहुत बड़ी ऑफिस चाहिए, कोई एयरकंडीशन चाहिए कोई जरूरत नहीं है। ऐसे Bare footed बैंकरर्स तैयार हो सकते है जो मुद्रा के मॉडल पर बड़ी-बड़ी बैंकों का काम भी कर सकते है।

आने वाले दिनों में कम से कम धन लगा करके भी ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को रोजगार देने का काम इसके साथ सरलता से हो सकता है और ये लोग जो संकट से गुजरते है, ब्‍याज के चक्‍कर में गरीब आदमी मर जाता है। उसको बचाना है और उसकी जो ताकत है उसके लिए अवसर देना है उस अवसर की दिशा में काम कर रहे है, जिस प्रकार से देश में ये जो वर्ग है उसकी जितनी चिंता करते है, उतनी ही देश के किसान की चिंता करना उतना ही जरूरी है।

किसी न किसी कारण से देश का किसान प्राकृतिक संकटों से जूझ रहा है। गत वर्ष, वर्षा कम हुई। वर्षा कम होने के कारण वैसे ही किसान मुसीबत से गुजारा कर रहा था और इस बार जितनी मात्रा में बेमौसमी वर्षा और ओले गिरना। इतनी तबाही हुई है किसान की। हमने मंत्रियों को भेजा था। खेतों में जा करके किसानों से बात करके परिस्थिति का जायजा लिया। कल इन सारे मंत्रियों से मैंने डिटेल में रिपोर्ट ली थी। इन किसानों को हम क्या मदद कर सकते हैं। और मैंने पहले दिन कहा था कि किसान को इस मुसीबत से बचाना, उसका साथ देना, उसको संकटों से बाहर लाना। ये सरकार की, समाज की, हम सबकी जिम्मेवारी है और किसान की चिंता करना ये आवश्यक है।

Natural calamity पहले भी आई है। लेकिन सरकार के जो parameter रहे हैं, उन parameters में आज के संकट में किसान को ज्यादा मदद नहीं मिल सकती है। और इसलिए ये संकट की व्यापकता इतनी है और उस समय है जबकि उसको फसल लेकर के बाजार में जाना था। एक प्रकार से उसके नोटों का बंडल ही जल गया, इस प्रकार से हम कह सकते हैं। इतना बड़ा उसका, उसका पूरा पसीना बहाया हुआ उसका, ये हालत हुई है। और इसलिए हमने insurance company को भी आदेश किया है कि बहुत ही proactive होकर के उनकी मदद की जाए। बैंकों को हमने आदेश किया है कि बैंक उनके जो कर्ज हैं, उनके संबंध में किस प्रकार से restructure करे ताकि उनको इस संकट से बाहर लाया जाए।

सरकार की तरफ से भी एक बहुत बड़ा अहम निर्णय हम करने जा रहे हैं। अब तक खेत में 50 प्रतिशत से ज्यादा अगर नुकसान हुआ हो, तभी वो उस मदद पाने की list में आता है। 50 प्रतिशत से ज्यादा अगर नुकसान हुआ होगा तभी आपको मदद मिल सकती है। अगर 50 प्रतिशत से कम हुआ है तो मदद नहीं मिल सकती है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों का भी ये एक सुझाव था कि साहब ये norms बदलना चाहिए। हमारे मंत्री अभी जाकर के आए, उन्होंने प्रत्यक्ष देखा, और ये सब देखने के बाद एक बहुत बड़ा हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है कि अब किसान के वो जो 50 प्रतिशत के नुकसान वाला दायरा था उसको बदलकर के 33 percent भी अगर नुकसान हुआ है तो भी वो किसान हकदार बनेगा।

उसके कारण मुझे मालूम है बहुत बड़ा बोझ आने वाला है, बहुत बड़ा बोझ आने वाला है लेकिन किसान को 50 प्रतिशत वाले हिसाब में रखने से उसको ज्यादा लाभ नहीं मिलेगा। 33 percent जो कि कईयों की मांग थी, उसको हमने स्वीकार किया है।

दूसरा विषय है उसको जो मुआवजा दिया जाता है। देश में आजादी के बाद सबसे बड़ा निर्णय पहली बार हुआ है 50 प्रतिशत को 33 प्रतिशत लाना। और दूसरा महत्वपूर्ण आजादी के बाद इतना बड़ा jump नहीं लगाया है, किसानों को मदद करने में हम इतना बड़ा jump इस बार लगा रहे हैं। और आज उसको जो मदद करने के सारे parameters हैं, उसको अब डेढ़ गुना कर दिया जाएगा। अगर उसको नुकसान में पहले 100 रुपया मिलता था, 150 मिलेगा, लाख मिलता था तो डेढ़ लाख मिलेगा, उसकी मदद डेढ़ गुना कर दी जाएगी।

कभी हमारे यहां incremental होता था 5 percent, 2 percent, 50 प्रतिशत वृद्धि। और ये किसान को तत्काल मदद मिले। राज्यों ने सर्वे का काम किया है। भारत सरकार और राज्य सरकार मिलकर के उसको आगे बढ़ाएगी लेकिन मैं चाहता हूं हमारे देश के किसानों को जितनी मदद हो सके, उतनी मदद करने के लिए ये सरकार संकल्पबद्ध है। क्योंकि आर्थिक विकास की यात्रा में किसान का भी बहुत बड़ा योगदान है और हमारी जीवन नैया चलाने में भी किसान का बहुत बड़ा योगदान है। बैंक हो, insurance company हो, भारत सरकार हो, राज्य सरकार हो, हम सब मिलकर के किसान को इस संकट की घड़ी से हम बाहर लाएंगे। ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।

फिर एक बार मैं SIDBI की इस रजत जयंती वर्ष के प्रारंभ पर उनको मैं बहुत-बहुत शुभकामना देता हूं और SIDBI आने वाले दिनों में नए लक्ष्य को लेकर के और नई ऊंचाइयों को पार करने में सफल होगा, ऐसी मेरी शुभकामनाएं हैं।

और मुद्रा platform प्रधानमंत्री मुद्रा योजना आने वाले दिनों में देश की आर्थिक, जो पक्की धरोहर है उसको जानदार बनाना, शानदार बनाने के काम में मुद्रा बहुत बड़ा role play करेगी। और ये पूंजी उसकी सफलत की कुंजी बने, ये मंत्र को हम चरितार्थ करेंगे। इसी एक शुभ आशय के साथ आज इस महत्वपूर्ण योजना को प्रारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx
(Release ID :118058)

IPL Advertising Options, Costs and Revenues



Multi Screen Media, the official broacaster of IPL is going make about 1000 crore in 2015.

It has signed up 12 sponsors.


Pepsico
Vodafone
HeroMotoCorp
Intex Mobiles
Vimal Pan Masala

Amazon
Paytm
Magicbricks
Car Dekho

The sponsors have taken up 50% of ad inventory.

Others have already bought 45% of the remaining. Only 5% of the spots are there now.

IPL viewership is now 191 million in 2014.

India - Demographic Trends - 2050



Pew, USA based think tank came out with a prediction. In 2050 , in India Hindus will grow to 1.3 billion but will constitute 77 percent from present 80%. Muslims will rise to 311 million and will constitute 18% from present 14%.

Vishwa Hindu Parishad is calling Hindus to have more children. Reported papers. Is it knee jerk reaction? Does the present generation most of whom were born after 1947 care about this changes in population mix? If nationalistic spirit is very strong, religious differences do not matter. Is there any force in the country promoting nationalism? Is there a force in the country promoting religious differences and isolation of religions? Are there people trying to benefit from a difference by aggravating the difference further on imagined issues that leverage the basic difference? Are forces trying to bring unity among neighbours who have different religions.


India - Living Freedom fighters




2015

There are around 12,000 living freedom fighters in India in 2015.

They are looking forward to more benefits from the Government and Govt. is also willing to consider their request and provide them more

Tuesday, April 7, 2015

India has Resources to Excel in the Third Industrial Revolution

India missed the first and second industrial revolutions. But India is well poised to prosper in the third industrial revolution.

Third industrial revolution is based on renewable energy and internet or digital communication. India has the basic resources required in both the areas.

Jeremy Rifkin described India as Saudi Arabia of Renewable Energy and exhorted Indian policy makers and businessmen to concentrate on renewable energy and develop technology for harnessing it.

In the area of digital communication also, India is well endowed with large number of educational institutes and graduates and post graduates. It made a name for the software services in international markets thus providing the base for further progress in the field. What is needed is the realization that a great opportunity is there to encash by focusing on developing renewable energy and digital communication to provide them to domestic consumers and provide services related to them in international markets by being ahead in technology developments in these two areas.

News items on Rifkin in India

Ficci press release on mega trends  http://www.ficci.com/pressrelease/856/FICCI-press-jan-17-megatrends.pdf

http://telugutimes.in/shownews.asp?cat=1&subCat=8&ContentId=13212

http://www.financialexpress.com/news/india-could-lead-3rd-industrial-revolution-rifkin/900735/

http://www.mydigitalfc.com/news/india-cusp-economic-transformation-jeremy-rifkin-357

http://www.businessworld.in/businessworld/businessworld/content/India-Can-Lead-New-Revolution.html

Articles and Video on Rifkin's Third Industrial Revolution Idea


Jeremy Rifkin is Wharton School professor who authored the best selling book “The third industrial revolution.”

7 April 2015

It is interesting to read to this new item. Modi Government has embarked on big solar energy push.


Updated 7 April 2015, 3 March 2012

Sunday, April 5, 2015

India - National Maritime Week in Hindi - मर्चेंट नेवी सप्ताह

30 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में मर्चेंट नेवी सप्ताह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास को याद करते हुए भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को याद किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहला बंदरगाह लोथल में स्थापित किया गया था।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अहमदाबाद नगर निगम ने वर्ष 1890 के आसपास एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें एक नहर प्रणाली के माध्यम से 100 किमी दूर समुद्र को जोड़ने के लिए एक जलमार्ग का निर्माण किया जाना था। भारत में जहाज निर्माण की ऐतिहासिक परंपरा के बारे में बात करते हुए उन्होंने देश में नौवहन और बंदरगाह उद्योग के चौतरफा, मजबूत और समेकित विकास पर जोर दिया।

1964 के बाद से, ‘मर्चेंट नेवी सप्ताह’ का समापन प्रतिवर्ष 5 अप्रैल को होता है। हर वर्ष 5 अप्रैल को भारतीय समुद्री क्षेत्र की उपलब्धियों को मनाते हुए मुंबई से लंदन तक पहले इंडियन फ्लैग मर्चेंट वेसल, ‘एस एस लॉयल्टी’ के प्रथम नौकायन के स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पोत से अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में भारत के आगमन की शुरुआत हुई।

राष्ट्रीय समुद्री दिवस समारोह पूरे देश के विभिन्न शहरों के बंदरगाह में आयोजित किया जाएगा। एक पुष्पांजलि अर्पित की रस्म प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में गहरे समुद्र में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए जिन बहादुर नौसेना अधिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नाविक स्मारक में पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया जाएगा। ‘मेक इन इंडिया – समुद्री क्षेत्र के लिए एक अवसर’ विषय पर एक संगोष्ठी भी मुंबई में और राज्य स्तरों पर आयोजित की जाएगी। 5 अप्रैल को मुख्य समारोह के दौरान विभिन्न नौवहन क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘वरुण पुरस्कार’, उत्कृष्टता पुरस्कार, वीरता पुरस्कार भी दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री को कई योजनाओं और इससे संबंधित मामलों पर जानकारी दी गई।

भारतीय मर्चेंट नेवी कैडेट / प्रशिक्षुओं के लिए ऑन-बोर्ड नौका प्रशिक्षण हेतु वित्तीय सहायता योजना
भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के 2000 कैडेट और इसके संबद्ध बैच, जिन्होंने वर्ष 2010, 2011 और 2012 में अपने ऑन-शोर (on-shore) कक्षा प्रशिक्षण पूरा कर लिया है लेकिन भारतीय फ्लैगशिपमें प्रशिक्षण सीट की अनुपलब्धता के कारण ऑन-बोर्ड नौका प्रशिक्षण नहीं ले पाये हैं, उन्हें इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत उन्हें प्रशिक्षण लागत का 30% या तीन लाख रुपये, जो भी कम हो, की अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी। यह योजना कैडेट की सभी श्रेणियों के लिए उपलब्ध होगी। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों से संबंधित कैडेट 70% (प्रशिक्षण की शेष लागत) ऋण संबंधित सामाजिक क्षेत्र के मंत्रालयों के वित्त और विकास निगमों के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे।

तटीय नौवहन के लिए मॉडल शिफ्ट प्रोत्साहन योजना
यह योजना वर्तमान (12 वीं) पंचवर्षीय योजना के 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च 2017 तक चलेगी जिसका उद्देश्य मौजूदा परिवहन मोड, जैसे – सड़क और रेल से तटीय परिवहन और अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन से घरेलू नौभार (कार्गो) परिवहन के मोडल शिफ्ट को प्रोत्साहित करना है। प्रोत्साहन निम्नलिखित हैं :
   I.     सात वस्तुओं, उर्वरक, खाद्यान्न, पत्थर, टाइल्स, चीनी, खाद्य नमक और अधिक आयामी कार्गो से संबंधित बल्क या ब्रेक-बल्क कार्गो की ढुलाई पर 1 रूपया प्रति टन समुद्री मील अधिकतम 1500 समुद्री मील तक प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  II.     फुल कंटेनर लोड (एफसीएल) में कंटेनर में किसी भी वस्तु की ढुलाई के लिए 3000/- रुपये प्रति टीइयू प्रोत्साहन दिया जाएगा।
आरओ-आरओ पोत के माध्यम से वाहनों की ढुलाई के लिए निम्नलिखित प्रोत्साहन दिये जाएंगे : 300/- रुपये प्रति दोपहिया वाहन;  600/- रुपये प्रति तीन पहिया वाहन; और अन्य वाहनों के लिए प्रति वाहन 3000/- रुपये।

भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय ने गुजरात, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों और लंबे समुद्री आवागमन और समुद्री परंपरा से समृद्ध अन्य तटीय बंदरगाह वाले शहरों में भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव दिया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी में एक परिसर स्थापित करने का भी प्रस्ताव है। विश्वविद्यालय का समुद्री क्षेत्र में कुशल मानव शक्ति बनाने का प्रस्ताव है क्योंकि यहाँ जबर्दस्त रोजगार क्षमता उपलब्ध है। इसमें एक उपकुल‍पति को भी नियुक्त करने का प्रस्ताव है जो भारत के पश्चिमी तट पर स्थित विश्वविद्यालय के परिसरों पर विशेष ध्यान देंगे और अगर जरुरत हुई तो इसके लिए पर्याप्त बजटीय सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

सागरमाला परियोजना

“सागरमाला परियोजना” की शुरुआत भारत के समुद्र तट के साथ बड़े बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और इसके तेजी से विस्तार तथा मौजूदा और भविष्य के परिवहन आस्तियों का उचित उपयोग करते हुए अंतर्देशीय और तटीय नेविगेशन के विकास के उद्देश्य से शुरू की गई है। मंत्रालय ने वर्ष 2015-16 के लिए 692 करोड़ रुपए का अनुरोध किया जिसमें से 200 करोड़ रुपये अगले वित्त वर्ष के दौरान आवंटित किया गया है। कैबिनेट ने पहले से ही परियोजना को मंजूरी दे दी है।
विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार से संबंधित छूट (cabotage restriction)
 नौवहन मंत्रालय मर्चेंट शिपिंग अधिनियम,1958 के अनुभाग 407  के तहत विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में निम्नलिखित विशेषताओं के साथ छूट देने पर विचार कर रहा है :

a)  आरओ-आरओ / हाइब्रिड आरओ-आरओ / आरओ-पैक्स / प्योर कार वाहक / प्योर कार और ट्रक वाहक आदि विशेष जहाजों, जिनकी भारत में कम आपूर्ति है, यात्रियों को ले जाने वाले किसी भी प्रकार के जहाजों के लिए (जैसे – नौका), प्रोजेक्ट कार्गो या अति आयामी कार्गो (ओडीसी) के लिए अधिसूचना की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में छूट।

b)  पूर्वी तट पर स्थित भारत के सभी बंदरगाहों के लिए एक्जिम कंटेनरीकृत कार्गो और खाली डिब्बे लाने एवं ले जाने के लिए विशेष क्षेत्र में समुद्र, वायु, या अन्य परिवहन सेवाओं को संचालित करने के अधिकार के प्रतिबंध में छूट।

अंतर्देशीय जल परिवहन :
अंतर्देशीय जल परिवहन की नई योजनाएं शुरू की गईं हैं जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं :
जल मार्ग विकास परियोजना : इस परियोजना की घोषणा वर्ष 2014-15 के बजट भाषण में की गई थी जिसका उद्देश्य ओपन रिवर नेविगेशन तकनीक और हार्डवेयर के साथ-साथ ड्रेजिंग, आधुनिक नदी सूचना प्रणाली, डिजिटल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, रात्रि नौचालन सुविधा, टर्मिनल सुविधा और चैनल मार्किंग के आधुनिक तरीकों को मजबूत बनाना है। परियोजना के पूरा होने से 1500 से 2000 डीडब्ल्यूटी जहाज चलाने के लिए 3.0 मीटर का न्यूनतम उपलब्ध गहराई (एलएडी) बनेगी ताकि कम से कम हल्दिया और इलाहाबाद के बीच व्यावसायिक नौचालन हो सके। 4200 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना विश्व बैंक की वित्तीय मदद से लागू की जा रही है।

नए प्रमुख बंदरगाह
सरकार ने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के क्रमशः दुर्गाराजपतनम और सागर में एक नए प्रमुख बंदरगाह की स्थापना करने का निर्णय लिया है। दोनों बंदरगाहों की स्थापना से संबंधित परियोजनाएं पीपीपी मोड में विकसित की जाएंगी जिसे पहले ही मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल गई थी।

पोर्ट कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन
मंत्रिमंडल ने प्रमुख बंदरगाह में कुशल निकासी प्रणाली पर ध्यान देने और कनेक्टिविटी में सुधार करने के लिए विशेष उद्देश्य हेतु वाहन (एसपीवी) बनाने के लिए नौवहन मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। एसपीवी निम्नलिखित परियोजनाओं को शुरू करेगा :

प्रमुख बंदरगाहों के लिए प्रत्येक स्तर पर कनेक्टिविटी
बंदरगाहों में निकासी अवसंरचना का आधुनिकीकरण
आंतरिक बंदरगाह रेलवे प्रणाली का प्रबंधन और संचालन
बंदरगाह संबंधित रेलवे परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना
राष्‍ट्रीय समुद्री दिवस पर नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी के नेतृत्‍व में आज समुद्री क्षेत्र के एक शिष्‍टमंडल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की।

इस अवसर पर श्री गडकरी ने प्रधानमंत्री को फ्लैग लगाया।

इस दौरान बातचीत में प्रधानमंत्री ने इस तथ्‍य को रेखांकित किया कि भारत की समुद्री विरासत लगभग पांच हजार साल पुरानी है। देश में सबसे पुराने बंदरगाह के तौर पर लोथल का जिक्र आता है। उन्‍होंने समुद्री क्षेत्र के सभी पक्षों से मिलकर देश में एक विश्‍व स्‍तरीय समुद्री संग्रहालय बनाने के लिए काम करने की अपील की ताकि भारत की शानदार समुद्री विरासत से दुनिया परिचित हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में समुद्री जहाजों के निर्माण की जबर्दस्त क्षमता है। मेक इन इंडिया पहल के तहत इस क्षमता का उपयोग जरूरी है।
श्री नितिन गडकरी ने इस मौके पर प्रधानमंत्री को नौवहन क्षेत्र में कौशल विकास की योजनाओं की जानकारी दी।

http://www.narendramodi.in/hi/prime-minister-inaugurates-merchant-navy-week-2015/

Friday, April 3, 2015

PM Narendra Modi - M.P. of Varanasi - Hindi Article वाराणसी सांसद - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


http://www.narendramodi.in/varanasi/hi/


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - 2014 के ऐतिहासिक चुनाव


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के ऐतिहासिक चुनावों से पहले इस प्राचीन नगर की यात्रा के दौरान वाराणसी को भारत की गौरवशाली संस्कृति का उद्गम तथा परंपराओं, इतिहास, संस्कृति और समरसता का संगम स्थल कहा था। वाराणसी से मतदाताओं ने उन्हें रिकॉर्ड अंतर से विजयी बनाया।

उनके लोकसभा क्षेत्र के रूप में वाराणसी एक ऐसे परिवर्तन से रूबरू है, जिसकी पहले कभी कल्पना नहीं की गई थी। इस शहर को विश्व विरासत स्थल बनाने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं, जिसका वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2014 में अपना नामांकन दाखिल करने के साथ किया था। स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ-सफाई को लेकर विशेष जोर देने के साथ ही उत्कृष्ट पर्यटन और बुनियादी सुविधाओं पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपनी भागीदारी तथा नियमित निगरानी के साथ स्वच्छता अभियान को शुरू किया और इसके नतीजे दिखने लगे हैं।


स्वच्छता, संपर्क और संरक्षण

वाराणसी, जो भारत की विरासत में पहले ही विशेष स्थान बना चुका है, अब एक नया इतिहास रचने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इस प्राचीन शहर को दुनिया के समक्ष धरती के सर्वाधिक स्वच्छ, कनेक्टेड और संरक्षित स्थलों में एक के रूप में प्रस्तुत करने लिए विशेष प्रयास किए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक बड़े अभियान के परिणाम पहले ही दिखने लगे हैं। प्रमुख घाटों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी आज एक हकीकत है और जापानी शहर क्योटो के साथ एक विशेष साझेदारी समझौते से वाराणसी को भारत-जापान संबंधों की विविधता और गहराई तथा इसके मानवीय आयामों को दर्शाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने भारतीय रेल की मदद से और कपड़ा तथा पावरलूम उद्योग का पुनरोद्धार कर इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर भी खास जोर दिया है।

नरेंद्र मोदी और जयापुर: एक अटूट रिश्ता

संकट के समय में बना रिश्ता अटूट होता है और यही बात नरेंद्र मोदी और जयापुर पर लागू होती है। वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उनके नाम की घोषणा होने के बाद नरेंद्र मोदी को गांव में लगी आग के बारे में पता चला और उन्होंने तत्काल अधिकारियों के साथ बात कर उन्हें राहत कार्य में जुटने के लिए कहा।


सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए जयापुर

सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए जयापुर को चुनने के बाद नरेंद्र मोदी का मानना था कि गांव के समग्र विकास के लिए लोगों और उनके प्रतिनिधि को मिलकर काम करना होगा। नरेंद्र मोदी ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसद गांव को गोद नहीं ले रहे बल्कि इस योजना के जरिए गाँव के लोग सांसदों को अपनी छांव में ले रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अच्छा जन प्रतिनिधि को ग्रामीणों के विशाल अनुभवों और समस्याएं सुलझाने की उनकी अंतर्दृष्टि से बहुत कुछ सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना का मतलब गांव में अतिरिक्त धनराशि सुलभ कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चिंत करना है कि योजनाएं सही ढंग से लागू की जाएं और समूचा गांव समस्याएं सुलझाने और विकास सुनिश्चित करने में भागीदारी करे। नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो उन कमियों को दूर करना चाहते हैं, जिनके चलते पिछले 60 वर्षों से गांवों की प्रगति रुकी हुई है।

सामूहिक चेतना की शक्ति का उपयोग

जयापुर में नरेंद्र मोदी ने जनशक्ति और इसके जरिए मिल सकने वाले जबरदस्त परिणामों पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने सामाजिक चेतना पैदा करने और लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति के माध्यम से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने पर अत्यधिक जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रत्येक गांव को अपना जन्मदिन या अपना स्थापना दिवस मनाना चाहिए और सभी को इस उत्सव में भाग लेना चाहिए। यह जातिवाद को समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीका है।


प्रधानमंत्री ने एक बड़ी जनसभा में लोगों से पूछा कि क्या हम यह तय कर सकते हैं कि हम जयापुर को गंदा नहीं होने देंगे? क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि भोजन करने से पहले बच्चें अपने हाथ अवश्या धोएंगे? उन्होंने कहा कि इन बातों के लिए सरकार के हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सकारात्मक सामाजिक ऊर्जा से एक आदर्श गांव बनाने में मदद मिलेगी।

नरेंद्र मोदी ने जयापुर गांव के प्रत्येक परिवार से यह भी कहा कि वे बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में मनाएं। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास वाराणसी के लिए कई योजनाएं हैं, जिन्हें वो जनता की ताकत यानी जनशक्ति के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा जयापुर के लोगों से मिलने और उन्हें संबोधित करने के बाद वहां के लोगों ने उनके विचार पर अमल करते हुए बेटी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया और वृक्षारोपण किया। परिवारों ने बताया कि जयापुर में प्रधानमंत्री को सुनने के बाद उन्होंने बेटी के जन्म का उत्सव मनाने के बारे में सोचा।

अपने गांवों को आदर्श बनाना

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर एक गांव को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया गया तो इससे अन्य गांव भी प्रेरित होंगे और अधिकारियों को भी यह पता चलेगा कि कैसे योजनाओं को अच्छी तरह लागू किया जा सकता है। ग्रामीण विकास के अपने विजन पर जोर देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें बड़े शहरों की आपूर्ति संचालित प्रणाली से हटकर गांवों की जरूरतों के अनुसार मांग संचालित प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आकांक्षाएं शहरी क्षेत्रों के लोगों से कम नहीं हैं और उन्हें पूरा करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने सफाई के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि नागरिकों के जीवन में सुधार लाने के लिए इसे एक लंबा सफर तय करना होगा।


“वाराणसी इतिहास से भी पुरातन है, परम्पराओं से भी पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और अगर इन सभी को एक साथ रख दिया जाए तो उनसे भी कहीं अधिक पुराना है।”  ये वाराणसी के लिए मार्क ट्वेन के शब्द हैं।


वाराणसी भारत की गौरवशाली संस्कृति का उद्गम तथा परंपराओं, इतिहास, संस्कृति और समरसता का संगम स्थल है। यह संकट मोचन मंदिर की मंगल भूमि है। यह धरा दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करती है, जो यहां शांति और मोक्ष की तलाश में आते हैं। सारनाथ में ही गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना प्रथम धर्मोपदेश दिया था। वाराणसी पूजनीय संत रविदास की जन्मस्थली है। बनारस में ही महात्मा कबीर का भी जन्म हुआ, परवरिश हुई और यहीं से उन्होंने अपने ज्ञान का उजियारा दुनिया भर में फैलाया। मिर्जा ग़ालिब ने बनारस को ‘काबा-ए-हिन्दुस्तान’ और ‘चिराग-ए-दैर’ यानि दुनिया की रोशनी कहा था। जब पंडित मदन मोहन मालवीय को शिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए स्थान का चयन करना था, उन्होंने बनारस को ही चुना। गंगा-जमुनी तहज़ीब के महान दूत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जिक्र किये बिना वाराणसी का परिचय अधूरा सा लगता है। वाराणसी के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का प्यार अतुलनीय और अविस्मरणीय है। मुझे बेहद खुशी हुई जब अटल जी की सरकार ने वर्ष 2001 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को भारत रत्न से नवाज़ा।

सच में वाराणसी और यहां के लोगों में कुछ तो ख़ास है। इस देवभूमि का हर निवासी अपने अन्दर कहीं न कहीं देवत्व लिए हुए है। वाराणसी हजारों वर्षों से ज्ञान, शिक्षा और संस्कृति का प्रतीक रही है। यह शिव की नगरी है। शिव जो विभिन्न संस्कृतियों के बीच समन्वय सेतु हैं। शिव जो संसार को बुराइयों से बचाने के लिए खुद विष पीकर नीलकंठ कहलाते हैं।

यह माना जाता है कि ये वाराणसी ही है जहां गंगा माँ का सौंदर्य और महत्व उस उच्चतम स्तर को प्राप्त कर लेता है जहाँ गंगा का दर्शन मात्र ही मुक्ति का माध्यम बन जाता है। पर आज यही मोक्षदायिनी गंगा स्वयं अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। हम गंगा नदी में नये प्राण भरने के प्रयास कर रहे हैं और हमने इस पवित्र नदी के पुनरोद्धार के लिए बहुआयामी से तरीके से कार्रवाई शुरू की है।

वाराणसी गंगा-जमुनी संस्कृति का सबसे बड़ा केंद्र भी है। हिंदू धर्म में तो ये सर्वाधिक पवित्र शहर माना ही जाता है, लेकिन ये शहर जैन और बौद्ध धर्म में भी काफी महत्व रखता है। गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन पास ही सारनाथ में दिया था। भारत रत्न बिस्मिल्ला खान की शहनाई की गूंज भी हिंदू- मुस्लिम एकता का ऐलान यहीं पर करती रही है। परिणामतः वाराणसी आज आध्यात्मिक ज्ञान का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है।

भगवान विश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ शानदार विरासत से प्रेरणा लेकर हम वाराणसी के वैभवशाली भविष्य के निर्माण के लिए निकल पड़े हैं।

हमारी सोच है कि वाराणसी विश्व विरासत स्थल के तौर पर उभरे जो उपासकों के साथ साथ भारत की संस्कृति को समझने और आत्मसात करने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करे। इसका अर्थ है कि हमें वाराणसी के लिए अत्याधुनिक पर्यटन सुविधाओं का निर्माण करना होगा। मेरा दृढ़ विश्वास है कि एक बार अगर हम पर्यटन को आवश्यक प्रोत्साहन देने में सक्षम हो जाते हैं, तो इससे न केवल अधिक से अधिक पर्यटक यहाँ आयेंगे बल्कि गरीब से गरीब व्यक्ति अपनी आजीविका में इज़ाफ़ा कर सकेगा। ज्यादा सैलानी आएंगे तो यह उन लोगों के लिए लाभप्रद होगा जो मंदिरों से जुड़े हैं, घाटों पर रह रहे हैं और जो गंगा के घाटों से सवारियों का परिवहन करते हैं। समूचा शहर और उससे जुड़े क्षेत्र की काया ही पलट जायेगी।

मैं चाहता हूं कि वाराणसी भारत की बौद्धिक राजधानी बने।


नई दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी है। मुंबई को वित्तीय राजधानी कहा जाता है। इसी कड़ी में मैं चाहता हूं कि वाराणसी भारत की बौद्धिक राजधानी बने। हम काशी को ऐसे शहर के रूप में विकसित करना चाहेंगे जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र हो और जहां ज्ञान का निरंतर प्रवाह हो।
यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जैसे विश्व-स्तरीय शिक्षा संस्थान हैं जिनके संवर्धन और सतत विकास की जरूरत है क्योंकि ये संस्थान न केवल बनारस की पहचान हैं बल्कि भोजपुरी क्षेत्रों सहित पूरे पूर्वांचल में ज्ञान की अलख जलाए रखने के लिए भी ये अपरिहार्य हैं।

वाराणसी अपने हस्त-शिल्प और कारीगरी के लिए विश्व-विख्यात है।

बनारस पर्यटन का बहुत बड़ा केंद्र है और साथ ही अपने हस्त-शिल्प और कारीगरी के लिए विश्व-विख्यात है। आज आवश्यकता है कि हम वाराणसी की समृद्ध विरासत का पुनरुद्धार करें। यहां के कुटीर उद्योगों के साथ ही हस्तशिल्प और हथकरघा व्यवसाय को पुनर्जीवित करें। यहीं पर रोज़गार का सृजन करें। ऐसा करके हम हजारों लोगों को न केवल उनके घर के नज़दीक ही रोजगार दे सकेंगे बल्कि वाराणसी को उसका पुराना गौरव भी लौटा सकेंगे।

वैसे भी वाराणसी ही ऐसी जगह है जहां गंगा उत्तर वाहिनी हैं। शक्तिशाली गंगा की धारा भी यहाँ आकर अपनी दिशा बदल कर मुड़ जाती है। इसलिए अब वाराणसी से ही बड़े परिवर्तन की शुरुआत होगी। देश सुशासन के पथ पर बढ़ रहा है और वाराणसी से निकला यह सन्देश पूरे देश में अलख जगाएगा।


प्रधानमंत्री की यात्राएं


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही 2014 में दो बार वाराणसी आ चुके हैं और भविष्य में अपनी यात्राओं के लिए उत्सुक हैं। आप सभी से मिलने और आपका फीडबैक जानने के लिए अपनी यात्राओं का उपयोग करते हुए वो पहले ही यहां रहने वाले सभी लोगों के लिए कुछ प्रमुख पहलों की शुरुआत कर चुके हैं। नीचे दिए गए लेखों को पढ़कर आप पिछली यात्राओं के बारे में अधिक जानकारी ले सकते हैं और जान सकते हैं कि भविष्य में क्या होने वाला है।


मदन मोहन मालवीय की स्तुति


जब भी मानवता ने ज्ञान युग में प्रवेश किया है, तब भारत ने विश्व गुरु की भूमिका निभाई है और इसलिए 21वीं सदी भारत के लिए अत्यधिक जिम्मेदारी का समय है क्योंकि विश्व एक बार फिर ज्ञान युग में प्रवेश कर रहा है।

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन की शुरुआत की।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी की धरती ने हमें शिक्षा की संस्कृति दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ ही समग्र मानवतावादी दृष्टिकोण विकसित करने के लिए है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर में और समाज के सभी वर्गों में “अच्छी शिक्षा” की बहुत मांग है। यदि भारत के युवाओं को अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाए, तो वो दुनिया भर में शिक्षकों की इस मांग को पूरा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा,“यदि एक शिक्षक बाहर जाता है तो उसे फायदा मिलता है और वो पूरी एक पीढ़ी की सोच को प्रभावित करता है।” साथ ही उन्होंने कहा कि मदन मोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं प्रशिक्षण मिशन इस दिशा में एक कदम है।

नरेंद्र मोदी ने एक इंटर-यूनीवर्सिटी सेंटर की आधारशिला रखी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस कनेक्ट वाई-फाई को लांच किया। प्रधानमंत्री ने युक्ति पहल के तहत छह शिल्पकारों को पुरस्कार दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से उपयुक्त तकनीक के उपयोग के जरिए हमारे शिल्पकारों के कौशल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने युक्ति पहल के तहत छह शिल्पकारों को पुरस्कार दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से उपयुक्त तकनीक के उपयोग के जरिए हमारे शिल्पकारों के कौशल को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वाराणसी महोत्सव

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी महोत्सव की शुरुआत की और कहा कि ऐसे आयोजनों से पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने वाराणसी के स्कूलों और शिक्षा संस्थानों से आह्वान किया कि वो वाराणसी की संमृद्ध संस्कृति के विभिन्न पहलुओं में विशेषज्ञता अर्जित करें। इस तरह वो वाराणसी आने वाले पर्यटकों का ध्यान खींचने में अपनी तरफ से योगदान कर सकेंगे।


स्वच्छ भारत के लिए स्वच्छ वाराणसी


“2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर भारत उन्हें स्वच्छ भारत के रूप में सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि दे सकता है”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में राजपथ से स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत के अवसर भारत के नागरिकों का आह्वान करते हुए ये शब्द कहे। एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की दो अक्टूबर को देश के कोने-कोने में शुरुआत हुई। इस अभियान का उद्देश्य दो अक्टूबर 2019 तक एक ‘स्वच्छ भारत’ के स्वप्न को साकार करना है।

वाराणसी एक ऐसा शहर है जिसे उसके ऐतिहासिक घाटों और धार्मिक पूजा स्थलों के लिए जाना जाता है। लेकिन साफ-सफाई का अभाव अक्सर इन स्थानों के रूप और सौंदर्य को बिगाड़ देता है। नरेंद्र मोदी ने नवंबर में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की यात्रा के दौरान स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने वाराणसी में गंगा नदी के किनारे अस्सी घाट पर गंदगी को दूर करने के लिए श्रमदान में हिस्सा लेकर इस अभियान की शुरुआत की।

उन्होंने इस अभियान में शामिल होने और एक स्वच्छ भारत बनाने में योगदान देने के लिए नौ जानेमाने लोगों को नामित भी किया। विकास परियोजनाओं के उद्घाटन में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री अगली बार सुशासन दिवस के अवसर पर वाराणसी आए। उन्होंने एक बार फिर झाडू थामी और अस्सी घाट के नजदीक जगन्नाथ मंदिर पर सफाई अभियान में हिस्सा लिया। उनकी पिछली यात्रा के बाद से आम लोगों और संगठनों ने जिस तरह स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाया, उस पर उन्होंने खुशी जताई। इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने नौ सुविख्यात लोगों को नामित भी किया।

स्वच्छता अभियान में लोगों की भागीदारी का आह्वान करने से ये अभियान एक राष्ट्रीय आंदोलन में तब्दील हो गया। स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से लोगों में जिम्मेदारी की भावना पैदा हुई। प्रधानमंत्री ने अपनी बातों और कार्यों से लोगों को प्रेरित कर स्वच्छ भारत के संदेश को फैलने में मदद की। इसके साथ ही साफ-सफाई के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया, जिनका सामना घरों में समुचित शौचालय की कमी के चलते करीब आधे भारतीय परिवारों को करना पड़ता है।

स्वच्छता के लिए विभिन्न क्षेत्रों के लोग साथ आए और इस अभियान में शामिल हुए। खिलाड़ियों से लेकर आध्यात्मिक नेताओं तक, सेना के जवानों से लेकर फिल्मी कलाकारों तक, कारोबारी समुदाय के सदस्यों से लेकर सरकारी अधिकारियों तक, भारत को स्वच्छ बनाने के लिए सभी साथ आ गए। भारत को स्वच्छ बनाने के लिए देश भर में लाखों लोग दिन प्रति दिन सरकारी विभागों, एनजीओ और स्थानीय सामुदायिक केंद्रों के स्वच्छता अभियानों में शामिल हो रहे हैं।
लोगों का जोरदार समर्थन पाकर स्वच्छ भारत अभियान एक जन आंदोलन बन गया है। बड़ी संख्या में नागरिक भी आगे आए हैं और उन्होंने एक साफ और स्वच्छ भारत के लिए प्रतिज्ञा की है। स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत के बाद सड़क साफ करने के लिए झाडू उठाना, कचड़े को साफ करना, सफाई पर ध्यान देना और एक स्वच्छ वातावरण को बनाए रखना आदत बन गई है। लोग जुड़ने लगे हैं और वो इस संदेश को फैलाने में मदद कर रहे हैं कि ‘स्वच्छता ईश्वर की भक्ति के सबसे समीप है।’



वाराणसी और रेल के साथ अनूठा रिश्ता

कल से मैं यहीं, DLW के परिसर में ठहरा हूँ।
चारों तरफ रेल्वे के माहौल ने मुझे मेरे बचपन से जोड़ दिया।

नरेंद्र मोदी ने वाराणसी की अपनी यात्रा के दौरान डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के विस्तार समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री वाराणसी की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) में रुके थे। वाराणसी की रेलवे इकाई में रुकने से नरेंद्र मोदी के मन में एक रोचक संबंध बना, जिसने उन्हें बचपन की याद दिला दी।

अपनी यात्रा पूरी करने पर उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि डीएलडब्ल्यू में रुकने से उनके मन में अपने बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं जब वह रेलगाड़ियों और रेलवे स्टेशनों के साथ करीब से जुड़े थे।प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह उन्हें यात्रियों और रेलगाड़ियों की याद आई और किस तरह यह उनके लिए एक तरह का भावनात्मक अनुभव था। भविष्य को लेकर नरेंद्र मोदी ने कहा कि बचपन की ये यादें नए संकल्प और नई संभावनाओं को बढ़ावा देंगी।

“बचपन से ही मेरा नाता रेल्वे से रहा,
रेल्वे स्टेशन से रहा, रेल के डिब्बे से रहा।
कल से मैं यहीं DLW के परिसर में ठहरा हूँ। चारों तरफ रेल्वे के माहौल ने मुझे मेरे बचपन से जोड़ दिया। शायद पहली बार
पूरा समय बचपन, वो रेल के डिब्बे, वो यात्री, सबकुछ मेरी आँखों के सामने ज़िंदा हो गया।
वे यादें बहुत ही भावुक थी।
यहां सबका अपनापन बहुत भाया।
सभी कर्मयोगी भाइयों को धन्यवाद।
अब तो मुझे बार बार यहां आना होगा।
फिर बचपन की स्मृतियों के साथ नए संकल्प, संभावनाएं बनेंगी।
माँ गंगा का प्यार और आशीर्वाद हमारे देश को निर्मल बनाये, हमारी सोच को निर्मल बनाये यही प्रार्थना।”

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान नए हाई हार्सपावर डीजल लोकोमोटिव को झंडी दिखाकर रवाना किया और उसे भारत की स्वदेशी क्षमताओं तथा ‘मेक इन इंडिया’ के उनके विजन का उदाहरण बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे “जय जवान, जय किसान” को याद करते हुए कहा इस नारे ने खाद्य उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने यह आशा जताई कि “मेक इन इंडिया” हमें अपनी सभी जरूरतों में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण और इसे सेवा उन्मुख बनाने का वादा किया, ताकि यह देश के विकास का इंजन बन सके। नरेंद्र मोदी ने कहा कि रेलवे के लिए सही एवं सुप्रशिक्षित मानव संसाधन सुनिश्चित करने के लिए चार रेल विश्वविद्यालय स्थापित किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे को सिर्फ़ परिवहन के माध्यम के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे आर्थिक विकास का आधार बनना चाहिए। उन्होंने रेलवे कर्मचारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि भारत में भारतीय रेल सबसे अच्छी सेवा प्रदान करे।